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बिहार में फूटा राजनीतिक `बम’! भाजपा को सबक सिखाने के मूड में नीतीश कुमार

  • महाराष्ट्र से लिया नीतिश ने सबक
  • पार्टी बचाने के लिए शुरू किया मंथन

सामना संवाददाता / पटना
‘सबका साथ अपना विकास’ की नीति पर चलकर भाजपा पूरे हिंदुस्थान पर अपना आधिपत्य जमाना चाहती है। इसलिए भाजपा विरोधियों के साथ-साथ अपने सहयोगी दलों को भी एक-एक करके निपटाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए भाजपा एक खास पैटर्न पर काम कर रही है। भाजपा सहयोगी दल के लोगों को फोड़कर आपस में लड़ाती है और फिर सहयोगी दल के बागी धड़े को अपने साथ मिलाकर सहयोगियों की बची हुई पार्टी को खत्म कर देती है। बिहार में चिराग पासवान और मुकेश कुमार सहनी को निपटा चुकी भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ एक बार फिर शुरू हो गया है। विधानसभा चुनाव में ज्यादा (७७) सीटें जीतने के बाद भी सीएम पद से दूर रही भाजपा अब जल्द-से-जल्द सीएम की कुर्सी पर कब्जा जमाना चाहती है। इसके लिए ४५ सीटें जीत कर सीएम बने नीतिश कुमार और उनकी पार्टी जदयू को अगला टागरेट बनाने की तैयारी भाजपा पूरी कर चुकी है। दूसरी तरफ महाराष्ट्र के सियासी संकट से सबक लेते हुए नीतिश भी तमाम विकल्पों पर काम करने में जुट गए हैं। इसलिए ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले ४८ घंटों में बिहार की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
भाजपाई पैंतरों को भांप गए हैं नीतिश
बिहार में सत्तारूढ़ भाजपा-जदयू सरकार के आपसी संबंध बेहद खराब होने का दावा बिहार की राजनीति के जानकार कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि बिहार में भाजपा के मंसूबे ठीक नहीं है। इसे सीएम नीतिश कुमार भांप चुके हैं। भाजपा के पैंतरों से नाराज नीतिश ने रविवार को मोदी सरकार की थिंक टैंक नीति आयोग की बैठक में शामिल नहीं हुए। जबकि बैठक में पश्चिम बंगाल की सीएम और टीएमसी नेता ममता बनर्जी सहित २३ मुख्यमंत्रियों ने भाग लिया। इससे पहले १७ जुलाई को नीतिश कुमार स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर अमित शाह द्वारा बुलाई गई सीएम की बैठक में भी शामिल नहीं हुए। कुमार ने निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के लिए पीएम मोदी द्वारा आयोजित भोज (२२ जुलाई) और तीन दिन बाद नए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शपथ ग्रहण में भी भाग नहीं लिया। इससे पहले, मुख्यमंत्री देश की कोविड स्थिति पर पीएम मोदी द्वारा बुलाई गई सीएम की बैठक में शामिल नहीं हुए। अब चर्चा है कि नीतिश कुमार भाजपा के साथ गठबंधन तोड़कर आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट के साथ मिलकर सरकार बना सकते हैं। खबर है कि नीतिश कुमार ने फोन पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से बात की है।
भाजपा भी मनाने के मूड में नहीं
जाति आधारित जनगणना के मुद्दे पर नीतिश कुमार भाजपा से अलग-थलग नजर आए और उन्होंने विपक्षी दलों के साथ जाति आधारित जनगणना की मांग की। जानकारी के अनुसार सरकार चलाने में फ्री हैंड नहीं मिलने के अलावा नीतिश चिराग प्रकरण के बाद आरसीपी मामले से भाजपा से खफा हैं। जदयू से आरसीपी सिंह के इस्तीफे के बाद जेडीयू और भाजपा के रिश्‍तों में दरार दिखने लगी है। नीतिश के खिलाफ आरसीपी सिंह के आक्रामक तेवर ने सियासत में तूफान मच गया है।

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