मुख्यपृष्ठस्तंभराजस्थान में दो पत्नियों वाले राजनेता

राजस्थान में दो पत्नियों वाले राजनेता

रमेश सर्राफ धमोरा

राजस्थान में भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में दो सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। इनमें से एक प्रत्याशी चुन्नीलाल गरासिया की दो पत्नी हैं। इसका जिक्र उन्होंने राज्यसभा चुनाव के नामांकन के समय दिए गए शपथपत्र में किया है। वे और उनकी पहली पत्नी लक्ष्मी देवी गरासिया करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं। वहीं दूसरी पत्नी सुशीला गरासिया के पास मात्र १४.५२ लाख की संपत्ति है। चुन्नीलाल गरासिया की स्वयं की संपत्ति करीब ३.६७ करोड़ रुपए की है। उनकी पहली पत्नी की संपत्ति २.४४ करोड़ की है। शपथपत्र के अनुसार गरासिया ने खुद की आय व्यापार और कृषि से होना बताया है। पहली पत्नी लक्ष्मी देवी को प्राइवेट जॉब और दूसरी पत्नी सुशीला को सरकारी नौकरी में बताया है।
शपथपत्र के अनुसार गरासिया की दोनों पत्नियों के पास बराबर सोने-चांदी की ज्वेलरी है। दोनों के पास २०० ग्राम सोने के जेवर हैं। इनकी कीमत १२.५० लाख है। दोनों के पास ५००-५०० ग्राम चांदी है। इसकी कीमत ३५ हजार रुपए है। पहली पत्नी के पास कार है। दूसरी के पास अपना कोई वाहन नहीं है। चुन्नीलाल गरासिया के पास ३ कार और ३ बाइक हैं। इनकी कुल कीमत ७ लाख ९३ हजार रुपए है। गरासिया के पास ६ लाख ५५ हजार रुपए नकद हैं। पहली पत्नी के पास ५ लाख ८५ हजार नकद और दूसरी पत्नी के पास ५० हजार रुपए नकद हैं।
चुन्नीलाल गरासिया उदयपुर ग्रामीण से दो बार विधायक रह चुके हैं। भैंरोसिंह शेखावत की सरकार में पहली बार विधायक बनते ही वो चिकित्सा और खान राज्य मंत्री भी रहे थे। गरासिया मूलरूप से डूंगरपुर के बिलुडा गांव के रहनेवाले हैं। राजनीति में आने से पहले चुन्नीलाल गरासिया बैंक में एलडीसी हुआ करते थे। गरासिया संघ के तृतीय वर्षीय स्वयंसेवक प्रशिक्षित हैं तथा संघ पदाधिकारियों के काफी करीबी हैं। वर्तमान में बीजेपी के एसटी मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। इससे पहले वे बीजेपी राजस्थान के प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके हैं।
इसी तरह राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री बने बाबूलाल खराड़ी की भी दो पत्नियां हैं। दोनों उनके साथ झोपड़े में ही रहती हैं। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। दोनों बेटे देवेंद्र खराड़ी और प्रद्युम्न खराड़ी गांव में ही खेती करते हैं। खराड़ी के दोनों बेटे और पत्नियां फिलहाल राजनीति से दूर हैं। उनके दोनों बेटों और दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। मंत्री बाबूलाल खराड़ी की पहली शादी १९९५ में मनी देवी से हुई थी। उसके साथ भी तीन-चार साल तक लिव इन रिलेशनशिप में रहने के बाद शादी की रस्में पूरी की थी। दूसरी पत्नी तेजू बाई उनके साथ वर्ष १९९६ से रह रही थी। बाद में ८ साल पहले आधिकारिक तौर पर शादी भी कर ली थी। मंत्री बाबूलाल खराड़ी के पास पक्का मकान तक नहीं है। वे आज भी कच्चे मकान यानी झोपड़ी में रहते हैं। बाबूलाल खराड़ी आदिवासी क्षेत्र के झाड़ोल विधानसभा क्षेत्र से चौथी बार विधायक बने हैं। ठेठ आदिवासी क्षेत्र से आनेवाले खराड़ी को कैबिनेट मंत्री बनने का मौका मिला है।
जानकारी के अनुसार आदिवासी क्षेत्र में लिव इन रिलेशनशिप से मिलता-जुलता दापा प्रथा प्रचलित है। इसमें युवक-युवती साथ रहने पर सहमति बनाते हैं। फिर लड़के वाले लड़की पक्ष को कुछ राशि देते हैं। इसका फैसला सामाजिक स्तर पर होता है। इसके बाद युवक-युवती पति-पत्नी की तरह साथ रह सकते हैं। बरसों पुरानी इस प्रथा में अब बदलाव सिर्फ इतना आया है कि दापा के दौरान स्टांप पर लिखा-पढ़ी होने लगी है। हालांकि, पढ़े-लिखे कुछ युवा शादी की रस्में पूरी करने के बाद ही जीवन शुरू करने लगे हैं।
राजस्थान में उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सिरोही सहित कई आदिवासी बहुल जिलों में आज भी कहीं-कहीं यह प्रथा प्रचलित है, परंतु आज ये उतनी नहीं जितनी कई साल पहले देखने को मिलती थी। इंटरनेट व टी.वी. की बढ़ोत्तरी व शिक्षा का इन इलाकों में समुचित प्रसार-प्रचार के कारण युवा पीढ़ी में चेतना आई है। वे इसे कुप्रथा के रूप में देखते हैं व शादी करके ही घर बसाने में विश्वास रखते हैं। साथ ही लड़की के घरवाले भी लड़की के एवज में पैसा लेना बुराई मानने लगे हैं।

(लेखक राजस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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