मुख्यपृष्ठराजनीति‘राज'नीति : अमीन खान का छलका दर्द

‘राज’नीति : अमीन खान का छलका दर्द

रमेश सर्राफ धमोरा
झुंझुनू

मारवाड़ में कांग्रेस के बड़े नेता अमीन खान को कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया है। अपने निष्कासन से अमीन खान का दर्द छलक उठा और उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के बायो में बदलाव करते हुए डिस क्वॉलिफाइड मेंबर आफ कांग्रेस पार्टी लिख दिया है। अमीन खान को लोकसभा चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने ६ साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। अमीन खान पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी उम्मेदाराम बेनीवाल का समर्थन नहीं कर निर्दलीय रविंद्र सिंह भाटी के पक्ष में वोट देने की अपील की थी। वह कांग्रेस पार्टी से पांच बार विधायक, कई बार मंत्री रह चुके हैं। २०२३ के विधानसभा चुनाव में पार्टी के जिलाध्यक्ष फतेह खान की बगावत के चलते उन्हें निर्दलीय रविंद्र भाटी से हारना पड़ा था। पिछले चुनाव में अमीन खान फतेह खान से भी कम वोट पाकर तीसरे स्थान पर रह गए थे। पिछले महीने फतेह खान को फिर से कांग्रेस में शामिल कर लिया गया था। उससे अमीन खान खासे से नाराज थे।
पायलट को झटका
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत जालौर-सिरोही लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव में मतदान होने के बाद उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के पूर्व सचिव बालेंदु सिंह शेखावत की कांग्रेस प्रभारी से शिकायत की थी कि उन्होंने उनके क्षेत्र में जाकर उनके खिलाफ चुनाव प्रचार किया था। वैभव गहलोत की शिकायत पर प्रदेश प्रभारी सुखजिंद्र सिंह रंधावा ने बालेंदु सिंह शेखावत को ६ साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। बालेंदु सिंह शेखावत का निष्कासन सचिन पायलट गुट के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। बालेंदु सिंह शेखावत के पिता दीपेंद्र सिंह शेखावत श्रीमाधोपुर क्षेत्र से कई बार विधायक, राजस्थान सरकार में मंत्री व विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके हैं। शेखावत सचिन पायलट के कट्टर समर्थक माने जाते हैं। बताया जाता है कि सीकर जिले के रहने वाले बालेंदु शेखावत को ५०० किलोमीटर दूर चुनाव लड़ रहे वैभव गहलोत की शिकायत पर सचिन पायलट को नीचा दिखाने के लिए ही पार्टी से निष्कासित किया गया बताया जा रहा है। चर्चा है कि बालेंदु शेखावत अपने गलत ढंग से किए गए निष्कासन की दिल्ली जाकर सफाई देंगे।
दिग्गजों में धुक-धुकी
भाजपा के बड़े दिग्गज नेताओं में इन दिनों खलबली मची हुई है। राजस्थान सरकार के मंत्री, विधायक व बड़े पदाधिकारी के मन में इस बात को लेकर धुक-धुकी हो रही है कि यदि उनके क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी पिछड़ जाता है तो पार्टी आलाकमान के सामने वह क्या जवाब देंगे? अभी तक आ रही खबरों के मुताबिक, करीब एक दर्जन से अधिक मंत्रियों, विधायकों व अधिकांश पार्टी पदाधिकारी के स्वयं के बूथ पर पार्टी प्रत्याशी को विपक्षी दलों के मुकाबले कम वोट मिलने की चर्चा हो रही है। इसके साथ ही भाजपा के कई दिग्गज नेताओं के खुद के बूथ पर कम मतदान होना भी उनके लिए नकारात्मक स्थिति पैदा कर रहा है। राजस्थान में चर्चा है कि चुनाव परिणाम के बाद कई नेताओं के भाग्य का पैâसला होगा। जिन मंत्रियों के क्षेत्र में पार्टी कमजोर रहेगी, उनकी छुट्टी कर पार्टी को जीत दिलाने वाले विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। इसी तरह बोर्डों में भी पार्टी को बढ़त दिलाने वालों को ही पदाधिकारी बनाया जाएगा। चर्चा है कि पार्टी आलााकमान हर बूथ वार वोट प्रतिशत का मिलान कर समीक्षा करेगा।
(लेखक राजस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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