मुख्यपृष्ठस्तंभसियासतनामा : आकर्षण का केंद्र

सियासतनामा : आकर्षण का केंद्र

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने अपना अध्यक्ष बदलकर सियासी पारा चढ़ा दिया है। यूं तो अध्यक्ष बदलना, कायम रखना या किसी भी तरह का फेरबदल करना सभी पार्टियों का विशेषाधिकार है। लेकिन अजय राय नामक जिस व्यक्ति ने नरेंद्र मोदी के सामने दो चुनाव लड़े हों, जो भाजपा का दबंग नेता रह चुका हो, अगर वही किसी प्रदेश की कमान थामे तो `आकर्षण का केंद्र’ अपने आप बन जाएगा। अजय राय के यूपी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनते ही तरह-तरह के कयास लगाए जाने शुरू हैं। राहुल गांधी अमेठी से और अगर प्रियंका गांधी लड़ना चाहें तो वाराणसी से चुनाव लड़ सकती हैं जैसी घोषणा करके उन्होंने भाजपा को घेरना चाहा है। यह वही अमेठी है, जहां से केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने २०१९ के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को हराया था। जातिगत राजनीति के लिए बदनाम यूपी की सियासत में अजय राय क्या करिश्मा करेंगे अभी यह कहना मुश्किल है। लेकिन अजय राय की नियुक्ति के बाद भाजपा नेताओं के ऊल-जलूल बयानों से ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस का ये फैसला भाजपा को चिढ़ाने में कामयाब रहा है।

सीनियर वाला तेवर
गुजरात की एक घटना भाजपा के लिए शर्मिंदगी का कारण बन गई है। हुआ यूं कि `मेरी माटी, मेरा देश’ कार्यक्रम के तहत शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के दौरान दो महिला नेताओं के बीच बहस हो गई। यह कोई साधारण महिलाएं नहीं थीं। उनमें से एक पार्टी की सांसद हैं और दूसरी विधायक। बहस भी चप्पल उतारने की बात को लेकर। श्रद्धांजलि देने के दौरान चप्पल उतारने पर सांसद पूनमबेन ने कथित तौर पर क्रिकेटर अजय जाडेजा की पत्नी और विधायक रिवाबा जाडेजा पर ताना मारते हुए उन्हें `अज्ञानी’ और `ओवर स्मार्ट’ कहा। पूनम का तर्क था कि ऐसे कार्यक्रमों में पीएम और राष्ट्रपति भी चप्पल नहीं उतारते। रिवाबा को पूनमबेन की टिप्पणी पसंद नहीं आई और वह गुस्से से लाल-पीली होकर जवाब देने लगीं। हालांकि, पूनमबेन सफाई दे रही हैं कि रिवाबा को कोई गलतफहमी हुई है। पूनम दो बार से सांसद हैं और एक बार विधायक भी रह चुकी हैं। थोड़ा सीनियर वाला तेवर तो आएगा ही। बहुतों का यही तेवर भाजपा के लिए कहीं सिर दर्द न बन जाए।

दोनों की भलाई
इस साल के अंत तक मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा ने पहले दो राज्यों के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी कर अपना दांव चल दिया है। हालांकि, भाजपा ने अभी तक राजस्थान में अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कांग्रेस की ओर से फिलहाल ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है। वह अभी तीनों राज्यों की बैठकों और उम्मीदवारों की सूची पर मंथन कर रही है। वैसे भी कांग्रेस की रणनीति में शामिल रहा है कि वह अंतिम समय में अपने उम्मीदवार उतारती है। कांग्रेस के लिए राजस्थान का मामला थोड़ा-सा मुश्किल था। इस बीच गहलोत-पायलट कई बैठकों में शामिल हुए हैं। कांग्रेस के लिए राहत की बात है कि कई दौर की बैठकों के बाद गहलोत-पायलट के बीच जारी जंग थम गई है। दोनों की भलाई भी इसी में है।

मीडिया का भी मोहभंग?
विपक्षी गठबंधन `इंडिया’ और सत्तापक्ष `एनडीए’ पुरजोर तरीके से आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों में लग गए हैं। दिल्ली की सत्ता से भाजपा को बाहर करने के लिए विपक्ष ने दो दौर की रणनीतिक बैठकें पूरी कर ली हैं। मुंबई में होने वाली बैठक पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं। ऐसे में चुनावी संभावनाओं को टटोलने वाले सर्वे भी खूब हो रहे हैं। बुद्धिजीवी वर्ग इसे अमूमन प्रायोजित सर्वे मानकर उसपर बहुत ज्यादा विश्वास नहीं करता। अभी पिछले साल, छ: महीने पहले के अधिकांश सर्वे भाजपा की प्रचंड जीत का दावा कर रहे थे। लेकिन `इंडिया’ गठबंधन बनने के बाद पहली बार आए एक निजी चैनल के सर्वे से पता चला है कि गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में `एनडीए’ बनाम `इंडिया’ की लड़ाई में एनडीए पिछड़ रहा है। जो भी हो जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं मीडिया के बोल भी बदल रहे हैं। आगे और भी बदल जाएं तो ताज्जुब नहीं होगा। मोहभंग नाम की भी कोई चीज होती है।

सैयद सलमान मुंबई
(लेखक देश के प्रमुख प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक व मुंबई विश्वविद्यालय, गरवारे संस्थान के हिंदी पत्रकारिता विभाग में समन्वयक हैं।)

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