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सियासतनामा: सत्ता की भूख

पंजाब इन दिनों राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित और मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच की रार को लेकर चर्चा में है। राज्यपाल पुरोहित ने आप सरकार पर उनके पत्रों का जवाब नहीं देने का आरोप लगते हुए मुख्यमंत्री मान को कड़े शब्दों में एक चेतावनी पत्र लिखा है, जिसमें उनके सवालों का जवाब देने को कहा गया है। सवालों का जवाब नहीं मिलने पर राष्ट्रपति को पत्र लिखने के लिए मजबूर होने की बात भी उन्होंने कही है। यह पत्र नशीले पदार्थ की उपलब्धता और उपयोग के संबंध में लिखे गए, बताए गए हैं। मान ने इस पत्र को राज्यपाल की धमकी बताते हुए कहा है कि पंजाबियों को प्यार से जीता जा सकता है धमकियों से नहीं। आरोप लग रहे हैं कि दिल्ली में विधायकों को न खरीद पाने के बाद ऑर्डिनेंस लानेवाली भाजपा अब पंजाब में राज्यपाल से सरकार गिरवाने की चाल चल रही है। भाजपा द्वारा नामित राज्यपालों पर यह आरोप पहले भी लग चुके हैं कि वह विपक्षी सरकारों को परेशान करते हैं। जैसा कि मान ने कहा, शायद इसे ही `सत्ता की भूख’ कहते हैं।

निचले स्तर की राजनीति
उत्तर प्रदेश का घोसी उप-चुनाव रोचक हो गया है। यहां सपा विधायक दारा सिंह चौहान के इस्तीफे की वजह से उपचुनाव हो रहा है। सपा छोड़ कर भाजपा में गए दारा सिंह चौहान को ही भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है। उनके मुकाबले सपा ने सुधाकर सिंह को उम्मीदवार बनाया है। अब मामला एनडीए बनाम इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव एलायंस (इंडिया) का है, इसलिए दोनों की प्रतिष्ठा साख पर लगी है। भारी भरकम स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी कर भाजपा ने दबाव बनाने की कोशिश की है। उधर कांग्रेस ने भी सपा प्रत्याशी को समर्थन देकर विपक्षी एकता को बल दिया है। नामांकन के बाद जैसे ही चौहान ने चुनाव प्रचार शुरू किया, उन्हें स्थानीय स्तर पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा। एक जगह उन पर स्याही भी फेंकी गई। हालांकि, स्याही फेंकने वाले का दावा है कि यह काम भाजपा ने ही करवाया है। क्या उपचुनाव जीतने के लिए इतने निचले स्तर की राजनीति की जाएगी?

सेंधमार हैं परेशान
राजस्थान में चुनावी माहौल बनना शुरू हो गया है। सत्ता पाने को आतुर भाजपा की समझ में ही नहीं आ रहा है कि वह कैसी रणनीति बनाए कि अशोक गहलोत को सत्ताच्युत किया जा सके। सचिन पायलट को लुभाने की तमाम कोशिशें भी नाकाम रहीं। फिलहाल, राजस्थान के मतदाताओं को लुभाने के लिए भाजपा ने चार परिवर्तन यात्रा निकालने की योजना तैयार की है। भाजपा राजस्थान में खुद गुटबाजी से परेशान है। इसी कारण भाजपा ने किसी प्रदेश स्तर के नेता को चारों परिवर्तन यात्राओं का चेहरा नहीं बनाया है। एक चेहरा आगे करने से दूसरे गुट के नाराज होने का अंदेशा जो है। इससे बचने के लिए ही पार्टी ने यह कदम उठाया है, ताकि चुनाव से पहले कोई मतभेद सामने न आने पाए। अब भाजपा को एहसास हो रहा है कि आतंरिक गुटबाजी क्या गुल खिला सकती है। दूसरे दलों में सेंधमारी करनेवाली भाजपा ने मजबूरन सेफ गेम खेलते हुए पीएम मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।

लालू से खार
बैडमिंटन खेलते हुए एक तस्वीर सियासी घमासान मचा सकती है, यह अंदाजा खुद लालू प्रसाद यादव को भी नहीं रहा होगा। चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद की जमानत रद्द करने के लिए सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दलील दी कि लालू बिल्कुल ठीक हैं और बैडमिंटन खेलते हैं, इसलिए उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए। जवाब में एक बेटे के तौर पर तेजस्वी यादव ने दलील दी कि, लालू सही तरीके से बैडमिंटन नहीं खेल रहे थे, बल्कि वो तो एक-आध शॉट लगाकर देख रहे थे। जबकि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कहा कि केंद्र सरकार में बैठे लोग लालू प्रसाद को बेवजह परेशान कर रहे हैं। हालांकि, लालू को फिलहाल अक्टूबर तक राहत मिल गई है। लालू यादव ने इंडिया अलायंस के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसलिए भी भाजपा उनसे खार खाए बैठी है और सीबीआई को आगे कर फिर उन्हें जेल में डालने पर आमादा है।

सैयद सलमान, मुंबई
(लेखक देश के प्रमुख प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक व मुंबई विश्वविद्यालय, गरवारे संस्थान के हिंदी पत्रकारिता विभाग में समन्वयक हैं।)

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