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राजेनीति ने बढ़ाई भाजपा में रंजिश! वसुंधरा के तेवर नहीं हो रहे हैं नरम, दस विधायकों के पहले जत्थे ने की पूर्व मुख्यमंत्री से भेंट

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

राजस्थान में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? इस पर आठ दिन बीत जाने की बाद भी सस्पेंस कायम है। इसी बीच वसुंधरा राजे के नेताओं से मिलने का दौर अभी जारी है। हालांकि, सीएम फेस डिसाइड करने के लिए पार्टी हाईकमान की तरफ से ३ पर्यवेक्षक तो बना दिए गए हैं, लेकिन वे नवनिर्वाचित विधायकों से बैठक करने कब जयपुर आएंगे, इसका खुलासा नहीं किया जा रहा है। ऐसे में प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एक्टिव हो गई हैं और रविवार सुबह से ही वे अपने आवास पर बीजेपी विधायकों से मुलाकात कर रही हैं। इस `राजे’ नीति से भाजपा में निश्चित तौर पर टेंशन बढ़ गई है, वहीं दूसरी ओर वसुंधरा राजे के तेवर नरम पड़ने का नाम नहीं ले रहे हैं। इसी कड़ी में रविवार को दस विधायकों के पहले जत्थे ने पूर्व मुख्यमंत्री से मुलाकात की।

बता दें कि राजस्थान में सीएम पर सस्पेंस के बीच रेस में शामिल वसुंधरा राजे अपनी तमाम कोशिशों में जुटी हैं। वह अपने समर्थक विधायकों के साथ लगातार मीटिंग कर रही हैं। वसुंधरा राजे से जयपुर में कुछ विधायक भी उनसे मिलने पहुंचे थे। वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री बनने के लिए तमाम जद्दोजहद कर रही हैं। ऐसे में अब नई दिल्ली से लेकर जयपुर तक राजनीतिक गलियारे में सरगर्मियां तेज हो गई हैं और यह भी कहा जा रहा है कि वसुंधरा अब `राजे’नीति का रहस्य कभी भी खोल सकती हैं। इससे पहले वसुंधरा को इस बीच दिल्ली भी बुलाया गया था, लेकिन कथित रूप से फिर भी उनके तेवर में कोई कमी नहीं देखी जा रही है। रविवार को जयपुर में वसुंधरा समर्थक डेगाना विधायक अजय सिंह किलक, शेरगढ़ विधायक बाबू सिंह राठौड़, बिलाड़ा विधायक अर्जुन लाल गर्ग, कोलायत विधायक अंशुमान सिंह भाटी और पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी उनसे मिलने पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि कम से कम १० विधायकों ने रविवार को उनसे मुलाकात की।

सीएम फेस पर सस्पेंस क्यों?

वसुंधरा राजे से जयपुर में उनके आवास पर हालिया चुनाव में जीतकर आने वाले विधायक और पूर्व विधायक भी मुलाकात करने पहुंचे थे। राजस्थान विधानसभा चुनाव के नतीजे ३ दिसंबर को घोषित किए गए, जिसमें बीजेपी ने १९९ में से ११५ सीटें हासिल कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। हालांकि, एक हफ्ते बाद भी मुख्यमंत्री के चयन को लेकर अभी भी सस्पेंस बरकरार है। इस देरी के लिए कई कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें सबसे प्रमुख कारण है दिल्ली से राजस्थान तक पैâली वसुंधरा राजे सिंधिया की राजनीतिक बिसात। ऐसा लगता है कि बीजेपी नेतृत्व के सामने वसुंधरा राजे को लेकर हालात बड़े चुनौतीपूर्ण हैं। हालांकि, पार्टी उन्हें कमजोर नहीं करना चाहती, लेकिन ऐसा भी लग रहा है कि पार्टी उन्हें दरकिनार भी नहीं कर पा रही है।

 

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