मुख्यपृष्ठनए समाचारघाती सरकार में पर कतरने की राजनीति हुई तेज

घाती सरकार में पर कतरने की राजनीति हुई तेज

-फडणवीस के रवैये से खफा दिखे अजीत पवार… दो ‘हाफ’ में टक्कर

रामदिनेश यादव / नागपुर

घाती सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। घाती सरकार बनाने के लिए भाजपा के साथ गद्दार एकनाथ शिंदे या फिर अजीत पवार भले आ गए हों, लेकिन भाजपा की ‘गंदी’ राजनीति से अब वे तड़फडाने लगे हैं। उनको घुटन होने लगी है, यही वजह है कि इस सरकार में शीर्ष तीन नेताओं के बीच समय-समय पर टकराव देखने को मिल रहा है। कभी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तो कभी उप मुख्यमंत्री अजीत पवार और एकनाथ शिंदे में, तो अब देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार के बीच संघर्ष देखने को मिल रहा है। ‘एक फुल दो हाफ’ सरकार में अब दोनों हाफ के बीच लड़ाई शुरू है। जी हां राज्य के दोनों उप मुख्यमंत्रियों के बीच नवाब मलिक के मुद्दे को लेकर तनाव है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो सरकार में अजीत पवार के कद को छोटा करने के लिए देवेंद्र फडणवीस की ओर से पवार के पर कतरने की राजनीति तेज हो गई है। नवाब मलिक के मुद्दे को फडणवीस ने जानबूझकर उछाला और अजीत पवार को पीछे धकेल दिया है। जिसे लेकर अजित पवार के समर्थकों में भी काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। जबकि देवेंद्र और अजीत पवार की लड़ाई में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मूक दर्शक बनकर लड़ाई का आनंद ले रहे हैं।
क्यों है विवाद
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार एक-दूसरे से भिड़ते नजर आ रहे हैं। विधायक नवाब मलिक के महागठबंधन में शामिल होने को लेकर उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा दूसरे उप मुख्यमंत्री अजीत पवार को पत्र भेजे जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। एनसीपी के अजीत पवार गुट के नेताओं का कहना है कि फडणवीस अजीत पवार को निजी तौर पर बता सकते थे। लेकिन जानबूझकर उन्होंने ऐसा नहीं किया। अजित पवार को नुकसान पहुंचाने के लिए फडणवीस ने पत्र कांड किया है। इस पत्र कांड से महागठबंधन की अंदरूनी नाराजगी खुलकर सामने आ गयी।
फडणवीस ने नवाब मलिक के खिलाफ पत्र भेजकर अपनी छवि चमकाने की कोशिश की, उन्होंने अजीत पवार को दबाते हुए नवाब को देशद्रोही बताकर साइड कर दिया। अजीत पवार के समर्थकों को अब सरकार में जगह नहीं देंगे और अजीत पवार की ताकत कम करने का यह एक षड्यंत्र ही था।

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