मुख्यपृष्ठस्तंभ‘राज'नीति : पुलिस मुखिया बने साहू

‘राज’नीति : पुलिस मुखिया बने साहू

रमेश सर्राफ धमोरा झुंझुनू

पुलिस महकमे के सबसे सीनियर ऑफिसर उत्कल रंजन साहू राजस्थान पुलिस के नए मुखिया यानी पुलिस महानिदेशक बने हैं। कार्मिक विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। अब आगामी दो साल के लिए साहू राजस्थान पुलिस के डीजीपी रहेंगे। ओडिशा के रहने वाले आईपीएस उत्कल रंजन साहू वर्ष १९८८ बैच के आईपीएस हैं और वे ही राजस्थान पुलिस में सबसे सीनियर अधिकारी हैं। दिसंबर २०२० में उनका प्रमोशन डीजी रैंक पर हुआ था। तब से वे होमगार्ड के डीजी रहे। साहू प्रदेश के ८ जिलों में धौलपुर, बाड़मेर, हनुमानगढ़, सीकर बांसवाड़ा, श्रीगंगानगर, भीलवाड़ा और जोधपुर शहर के एसपी रह चुके हैं। जोधपुर एसपी रहते हुए वर्ष २००५ में उन्हें पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है। वसुंधरा राजे के कार्यकाल में जनवरी २०१४ से लेकर दिसंबर २०१८ तक वे इंटेलिजेंस में एडीजी रह चुके हैं। इस दौरान वर्ष २०१६ में उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। जब से वे डीजी रैंक पर पदोन्नत हुए, तब से होमगार्ड में तैनात रहे।
गहलोत की गुगली
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजनीति के चतुर खिलाड़ी माने जाते हैं। उनको पता रहता है कि किस समय कौन सा दांव चलने से बाजी जीती जाती है। राजस्थान से राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को एक सीट मिलेगी। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नहीं चाहते थे कि उनके किसी विरोधी को राज्यसभा जाने का अवसर मिले। विशेष कर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व अलवर के पूर्व सांसद भंवर जितेंद्र सिंह व कांग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अजय माकन को गहलोत किसी भी स्थिति में राजस्थान से राज्यसभा में नहीं भेजना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को राजस्थान से राज्यसभा में जाने के लिए तैयार किया। सोनिया गांधी ने राज्यसभा चुनाव के लिए जयपुर से नामांकन कर दिया है और उनकी जीत भी तय मानी जा रही है। सोनिया गांधी के राजस्थान से राज्यसभा सदस्य बनने पर अशोक गहलोत को सपोर्ट मिलेगा। कांग्रेस की राजनीति में माना जाता है कि अशोक गहलोत सोनिया गांधी के निकटवर्ती नेताओं में शुमार हैं।
यादव का टिकट कटा
केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र यादव को इस बार राज्यसभा का टिकट नहीं दिया गया है। भूपेंद्र यादव २०१२ से लगातार दो बार राजस्थान से राज्यसभा सांसद रहे हैं। चर्चा है कि पार्टी उन्हें अलवर से लोकसभा चुनाव लड़ाने की सोच रही है। भूपेंद्र यादव वसुंधरा राजे के सहयोग से राजनीति में आगे बढ़े थे, मगर जैसे ही २०१४ के लोकसभा चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और अमित शाह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने, तब भूपेंद्र यादव ने वसुंधरा राजे का खेमा छोड़कर मोदी, शाह के साथ हो गए। भूपेंद्र यादव ने अभी तक कोई भी प्रत्यक्ष चुनाव नहीं लड़ा है। वे राज्यसभा के रास्ते सांसद बनकर संगठन की राजनीति करते रहे हैं। २०२१ में उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री बनाया गया था। राजस्थान में अलवर लोकसभा सीट यादव बहुल मानी जाती है। अलवर से सांसद रहे बाबा बालकनाथ के विधायक बनने से अलवर सीट खाली हो गई है। ऐसे में अगले लोकसभा चुनाव में पार्टी भूपेंद्र यादव को चुनाव लड़वा सकती है।
एक्शन में पंत
राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांश पंत इन दिनों एक्शन में नजर आ रहे हैं। मुख्य सचिव की जिम्मेदारी संभालने के बाद सुधांश पंत लगातार सचिवालय में वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियां कर रहे हैं। उसके साथ ही जिलों व संभाग मुख्यालयों पर तैनात वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की भी तैनाती कर रहे हैं। सुधांश पंत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार की ब्यूरोक्रेसी का सेटअप बनाने में दिन-रात जुटे हुए हैं। वे ऐसे अधिकारियों को मुख्य पदों पर तैनात कर रहे हैं, जिनकी छवि साफ है तथा जो तेजी से काम करने के लिए जाने जाते हैं। भ्रष्ट छवी वाले अधिकारियों को किनारे लगाया जा रहा है। इसी के साथ मुख्य सचिव पंत लगातार अलग-अलग कार्यालयों का स्वयं भी निरीक्षण कर रहे हैं और जिलों में भी अधिकारियों को निरीक्षण करने के निर्देश दे रहें हैं। इसका असर यह हुआ है कि अब सरकारी अधिकारी, कर्मचारी निर्धारित समय पर कार्यालय आकर लंबित कार्यों का निपटारा करने में जुट गए हैं। पंत कड़क अनुशासन के लिए जाने जाते हैं।
(लेखक राजस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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