मुख्यपृष्ठस्तंभसियासतनामा: बेरोजगारी और महंगाई, परिवर्तन से परिवर्तन!, शर्म से तोड़ा नाता

सियासतनामा: बेरोजगारी और महंगाई, परिवर्तन से परिवर्तन!, शर्म से तोड़ा नाता

सैयद सलमान मुंबई

बेरोजगारी और महंगाई

पांच राज्यों के चुनाव के बाद अब अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। आशानुरूप सफलता न मिलने से कांग्रेस खेमे में उदासी भले हो, लेकिन राहुल गांधी ने हार नहीं मानी है। राहुल गांधी `भारत जोड़ो यात्रा’ की तर्ज पर `यूपी जोड़ो यात्रा’ की शुरुआत कर रहे हैं। तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी एक बार फिर कार्यकर्ताओं में विश्वास जगाने और लोकसभा चुनाव में बेहतर नतीजे देने की योजना पर काम कर रही है। राहुल के तेवरों से लग रहा है कि इस बार यात्रा के दौरान वे बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर ज्यादा फोकस करेंगे। राहुल गांधी ने संसद की सुरक्षा में चूक के मामले पर बोलते हुए भी बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों का जिक्र किया था। यह जरूरी भी है, क्योंकि मूल समस्याओं से ध्यान भटका कर भावनात्मक मुद्दों को तरजीह देने से सत्ता तो मिल जाती है, लेकिन देश की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था पर इसका नकारात्मक असर हो रहा है।

परिवर्तन से परिवर्तन!

राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद कुछ बदलाव के कयास लगाए जा रहे थे। मध्य प्रदेश से इसकी शुरुआत हो गई है। कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर उनकी जगह जीतू पटवारी को पार्टी अध्यक्ष बनाया गया है। कमलनाथ के नेतृत्व को लेकर कई बार पार्टी के भीतर भी आवाज उठती रही थी, लेकिन आलाकमान से उनकी नजदीकियों की वजह से पैâसला नहीं हो पाता था। आखिर यह निर्णय तब लिया गया, जब पार्टी ने जीतने की पूरी संभावना के बाद भी हार का स्वाद चखा। राहुल गांधी की मोहब्बत की दुकान तो खूब चमकी, लेकिन उसे वोटों में परिवर्तित नहीं किया जा सका। हालांकि, सत्तापक्ष के भी नेता ढंके-छुपे शब्दों में राहुल की मेहनत को स्वीकार करते हैं। अब अगर राहुल-खड़गे पूरे देश में जमे-जमाए और कुर्सी से चिपके नेताओं को किनारे लगाने लगें तो आश्चर्य नहीं करना चाहिए। मुकाबला जब साम-दाम-दंड-भेद में माहिर भाजपा से हो तो रणनीति बदलनी जरूरी है। कांग्रेस ने शायद इस बात की गहराई को समझ लिया है। यह परिवर्तन ही शायद कोई परिवर्तन ले आए।

शर्म से तोड़ा नाता

चाल, चरित्र और चेहरा का दम भरने वाली भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश के सोनभद्र से बुरी खबर आई। यहां से विधायक रामदुलार गोंड को एक नाबालिग बच्ची से रेप के मामले में २५ साल की कैद की सजा सुनाई गई है। हाल ही में कोर्ट ने करीब ९ साल तक चली लंबी सुनवाई में भाजपा विधायक को दोषी करार दिया था। विधायक महोदय एक साल से लगातार बच्ची के साथ दुष्कर्म कर रहे थे। पीड़िता की उम्र महज १५ साल की थी। दूसरों की बहन-बेटियों पर अभद्र टिप्पणियों के लिए मशहूर भाजपा के बड़े नेता और उसका आईटी सेल पूरी तरह खामोश है। किसी मजबूर बच्ची के साथ किया गया यह कृत्य कानून की नजर में अपराध तो साबित हो गया, लेकिन ऐसे दबंग अपराधियों को प्रश्रय देने वाले बड़े नेताओं से सवाल पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने इस मुद्दे पर विधायक से कभी सवाल किया? उसे तो तभी पार्टी से बर्खास्त कर विधानसभा अध्यक्ष को सूचित कर देना चाहिए था। कम से कम शर्मिंदगी तो न उठानी पड़ती। शायद शर्म से पार्टी नाता तोड़ चुकी है।

यूपी का सियासी पारा

इस समय विपक्ष में अगर किसी नेता का रुतबा बढ़ा हुआ लग रहा है तो वो हैं नीतिश कुमार। बिहार में जातिगत जनगणना और आरक्षण के विस्तार के बाद जेडीयू नेता उत्साहित हैं। अब तो उन्हें दूसरे राज्यों से बुलावा आ रहा है और नीतिश की वहां रैलियों के आयोजन की योजना है। जातिगत जनगणना और आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस के राहुल गांधी और सपा के अखिलेश यादव भी मुखर भूमिका में हैं। इस मुद्दे के नायक बनकर उभरे नीतिश कुमार के उत्तर प्रदेश से लोकसभा चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं। कयास लगाया जा रहा है कि प्रयागराज की फूलपुर या यूपी की किसी अन्य सीट से वे चुनाव लड़ सकते हैं। कांग्रेस और सपा का साथ मिलने की पूरी संभावना है। प्रधानमंत्री भी गुजरात से जाकर यूपी में चुनाव लड़ते हैं। ऐसे में भाजपा नीतिश को बाहरी बताने से बचेगी। नीतिश के लड़ने से यूपी का चुनाव रोचक हो जाएगा। मोदी बनाम नीतिश की यह जंग यूपी की सियासत का पारा गर्म करने के लिए काफी है।

अन्य समाचार