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सियासतनामा : फिर पलटेंगे?

सैयद सलमान
मुंबई

इस समय दो यात्राएं और दो नेता खास चर्चा में हैं। एक कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ और दूसरी तेजस्वी यादव की ‘जनविश्वास यात्रा’ जो ३,००० किलोमीटर का लक्ष्य पूरी कर चुकी है। जब से नीतिश कुमार ने पलटी मारी है, तब से तेजस्वी ने सीधे जनता से संवाद को तरजीह दी और उनके बीच पहुंचे। कहना गलत नहीं होगा कि उन्हें अच्छा प्रतिसाद भी मिला। नीतिश कुमार को जनता के बीच सत्तालोलुप बताने में वे काफी हद तक कामयाब भी रहे। लेकिन अब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार में रुचि लेकर डैमेज कंट्रोल में लगे हैं। बिहार पहुंचे पीएम मोदी ने न सिर्फ सीएम नीतिश के साथ मंच साझा किया, बल्कि उनसे फिर न पलटने का वादा भी ले लिया। लेकिन मोदी और नीतिश के साथ काम कर चुके जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर का दावा है कि नीतिश एक बार फिर मतदाताओं को ठगकर पलट जाएंगे। जो भी हो नीतिश भले ही पीएम का साथ पा जाएं लेकिन बार-बार पलटने से उनकी साख जरूर धूमिल हुई है और उन्होंने अपनी विश्वसनीयता खो दी है।

चौंकाने जैसा कुछ नहीं
लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी है। कुछ विवादित चेहरों का टिकट काटा गया है, कुछ अब भी बरकरार हैं। कुछ विवादास्पद चेहरे नए भी हैं, जिन्हें टिकट मिला है। भाजपा भोजपुरी कलाकारों पर मेहरबान रही है। मनोज तिवारी, रवि किशन, निरहुआ रिपीट हुए हैं तो पवन सिंह का इजाफा हो गया है। मजबूरी में ही सही भाजपा ने अपनी छवि से निकलने की कोशिश में एक मुस्लिम अब्दुल सलाम को भी केरल से टिकट दिया है। फिल्मी सितारों और परिवारवाद पर तल्ख टिप्पणियां करनेवाले भाजपा नेता भोजपुरी कलाकारों और बांसुरी स्वराज को टिकट दिए जाने पर खामोश हैं। गौतम गंभीर और जयंत सिन्हा ने खुद टिकट लेने से इनकार किया। वजह कुछ भी हो लेकिन इस वक्त जब ‘गद्दारों की भर्ती’ चालू हो, ऐसे में वर्तमान सांसदों का ‘न’ कहना भी बहुत कुछ कहता है। टेनी को टिकट देना तो किसानों के साथ भद्दा मजाक है। अगली लिस्ट में भाजपा के और भी पत्ते खुलेंगे। यानी पहली लिस्ट में कुछ भी खास चौंकाने वाली बात नहीं है। फिलहाल, अगली लिस्ट का इंतजार है।
त्योहार और श्रीमान
यूपी की सियासत में एक नाम ऐसा है जो बिहार के नीतिश कुमार की तरह पलट जाने के मामले में उनसे कम नहीं है। कभी भाजपा, कभी सपा, यहां तक कि एमआईएम से भी गठबंधन करते रहे हैं। वे श्रीमान हैं सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर जो कब किसके साथ हों, कब पलट जाएं कहा नहीं जा सकता। फिलहाल सुर्खियों में रहनेवाले ओमप्रकाश राजभर भाजपा के साथ हैं, लेकिन उन्होंने यूपी मंत्रिमंडल विस्तार और मंत्री बनाए जाने में देरी पर खुलकर अपनी नाराजगी जता दी है। ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा को धमकी दी है कि अगर राज-पाट नहीं मिला तो वे होली ही नहीं मनाएंगे। पिछले साल ही जुलाई में उनका भाजपा से दोबारा गठबंधन हुआ था तब से ओपी राजभर लगातार अपने मंत्री बनने का एलान करते रहते हैं। मजे की बात है, वे कभी नवरात्र, कभी दिवाली, कभी खरमास बाद या होली जैसे त्योहारों के दौरान मंत्रिमंडल में शामिल होने की बातें कहते रहे हैं। लेकिन बार-बार पाला बदलने वाले इन श्रीमान को शायद भाजपा त्योहार भी ढंग से मनाने नहीं देना चाहती। यह तो ज्यादती हुई न?
बगावत को हवा
हिमाचल प्रदेश की एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस के छह बागियों ने ‘क्रॉस वोटिंग’ की और भाजपा का साथ देकर प्रदेश का सियासी पारा चढ़ा दिया। इस बगावत की वजह से भाजपा उम्मीदवार हर्ष महाजन ने कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी को पराजित कर दिया था। पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर छह विधायकों को अयोग्य घोषित किया जा चुका है। हताशा का आलम यह है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह स्वीकार करती नजर आर्इं कि भाजपा की वर्विंâग कांग्रेस से बेहतर है और चुनाव में कांग्रेस भाजपा के मुकाबले फील्ड में कमजोर पड़ रही है। भाजपा ने कांग्रेस में असंतोष को भुनाने के लिए ही पूर्व कांग्रेस नेता हर्ष महाजन को मैदान में उतारा था। हिमाचल की उथल-पुथल को देखते हुए प्रियंका गांधी ने खुद इस मामले में हस्तक्षेप किया है। लेकिन बगावत को हवा देने में माहिर भाजपा हिमाचल में किसी भी हद तक जाकर सरकार गिराने पर आमादा है। कांग्रेस को सतर्क रहने की जरूरत है, वरना लोकसभा चुनाव से पहले सरकार पर गहराया संकट बढ़ भी सकता है।

(लेखक मुंबई विश्वविद्यालय, गरवारे संस्थान के हिंदी पत्रकारिता विभाग में समन्वयक हैं। देश के प्रमुख प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

 

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