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नहीं सुधर रहा प्रदूषण का स्तर, मुंबई की हवा ‘खराब’! …दिल्ली, पटना की वायु गुणवत्ता में सुधार

• आइजॉल की हवा सबसे स्वच्छ

सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में पिछले कुछ दिनों से बारिश नहीं हो रही है, इसका असर अब प्रदूषण के रूप में सामने आने लगा है। बारिश नहीं होने के कारण हवा में प्रदूषित तत्वों की मात्रा बढ़ गई है। बता दें कि बारिश का पानी हवा में मौजूद प्रदूषित तत्वों को कम कर देता है। दो दिनों से मुंबई की हवा ‘खराब’ हो रही है, इसका सबसे ज्यादा असर कुलाबा, वर्ली, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में दिखाई दे रहा है। अगर बारिश नहीं होती है तो प्रदूषण का प्रभाव और भी बढ़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले समय में खासकर दीवाली जैसे त्योहारों के दौरान वायु प्रदूषण के और भी बढ़ने की संभावना है। मुंबई में मंगलवार को नवी मुंबई में एक्यूआई २०१, मलाड में २००, मझगांव में १७०, अंधेरी में १६१ और कोलोबा में ३१८ दर्ज किया गया, जो खराब से मध्यम श्रेणी में था।

अभी भी दिल्ली टॉप पर
रेस्पिरर रिपोर्ट्स (आरआर) के विश्लेषण के अनुसार, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता में २०१९ से २०२२ तक पीएम २.५ का स्तर बढ़ा है। इस दौरान मुंबई की हवा की गुणवत्ता ‘खराब’ पाई गई। जबकि इसकी तुलना में दिल्ली और लखनऊ की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम देश के छह महत्वपूर्ण शहरों में लागू किया गया। इनमें मुंबई के साथ दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरु, लखनऊ और पटना शहर शामिल थे। अध्ययन से पता चला कि दिल्ली अभी भी प्रदूषण सूची में शीर्ष पर है। हालांकि, १ अक्टूबर, २०२२ से ३० सितंबर, २०२३ के बीच दिल्ली की वायु गुणवत्ता में धीरे-धीरे सुधार पाया गया। जबकि इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर पटना शहर है।

मुंबई की स्थिति खराब
मुंबई में हवा की गुणवत्ता खराब होने का प्रमुख कारण शहर भर में चल रही कई पुनर्विकास और निर्माण परियोजनाओं से होने वाला धूल उत्सर्जन है। बढ़ते प्रदूषण का कारण थर्मल पावर प्लांटों का विस्तार, ऑटोमोबाइल से होने वाला प्रदूषण, बायोमास जलाना और मनपा के ठोस कचरे का कुप्रबंधन भी है। दूसरी ओर, बेंगलुरु में पीएम २.५ उत्सर्जन में सबसे अधिक योगदान वाहन से होने वाले उत्सर्जन का है।

नदी से सटे कई शहरों की हवा साफ
नदी से सटे १० शहरों की सूची जारी की गई। इसमें दिल्ली के साथ-साथ बिहार के सात शहर भी शामिल हैं। जहां की वायु गुणवत्ता में सुधार पाया गया है। वहीं आइजोल भारत का सबसे स्वच्छ हवा वाला शहर है। यहां पीएम २.५ का लेवल सिर्फ ११ माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है। बता दें कि पीएम २.५ एक सूक्ष्म कण (२.५ माइक्रोन व्यास से कम) है जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है क्योंकि १० माइक्रोमीटर से कम व्यास वाले ये कण किसी के फेफड़ों में गहराई तक जा सकते हैं, और कुछ रक्तप्रवाह में भी मिल सकते हैं।

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