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गुजरात की बुलेट के लिए गरीबों की रेल उपेक्षित : डीरेल का डरावना सच! …सरकारी उदासीनता और कर्मियों की लापरवाही से हो रहे हादसे

नागमणि पांडेय / मुंबई
सबका साथ सबका विकास का झांसा देकर देश की कमान हासिल करनेवाले नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री भले ही देश के बने हैं लेकिन उन्होंने ज्यादातर काम गुजरात के विकास के लिए किया है। इसके लिए उन्होंने महाराष्ट्र और मुंबई के आर्थिक महत्व को कम करने की हरसंभव कोशिश की। यहां से कंपनियों और कई प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों को गुजरात और दूसरे प्रदेश में ले गए। इतना ही नहीं अब पीएम मोदी और उनकी सरकार गुजरात के व्यापारियों की सहूलियत के लिए महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन पर जो लगा रही है लेकिन इसका खामियाजा देशभर के दूसरे गरीब रेल यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। दावा किया जा रहा है कि मोदी सरकार और उनके रेल मंत्रालय का ज्यादा ध्यान बुलेट ट्रेन पर लगा है, जिसके कारण दूसरी ट्रेनें उपेक्षित हो रही हैं। उनके रख-रखाव पर लगने वाले खर्च में कटौती की जा रही है। कम गुणवत्ता वाली सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। नतीजतन, ट्रेनों के डिरेल होने के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है। इसका सर्वाधिक खामियाजा मुंबई से संचालित होनेवाली सेंट्रल और वेस्टर्न रेलवे की ट्रेनों को भुगतना पड़ा है, जहां वर्ष २०२० से २०२२ के बीच ११ बड़े रेल हादसे हुए हैं।

मध्य रेलवे और पश्चिमी रेलवे अपनी लापरवाहियों के कारण हमेशा चर्चा में रहती हैं। आए दिन रेल हादसों की खबरें अखबारों में देखकर आम यात्री अब रेल में यात्रा करने से घबराने लगे हैं। क्यों कि ‘डी’रेल का एक डरावना सच सामने आया है। दरअसल, रेलवे सुरक्षा आयुक्त के वर्ष २०२१-२२ की रिपोर्ट के अनुसार, रेल की कुल दुर्घटनाओं में से ६० प्रतिशत दुर्घटनाएं रेलवे और रेलवे कर्मचारियों की लापरवाही से हुई हैं। एक ओर बुलेट ट्रेन पर पैसों की बरसात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर गरीबों की मेल एक्सप्रेस ट्रेनों की उपेक्षा की जा रही है।
शनिवार को हुए दो हादसे
शनिवार को बोरिवली से अमदाबाद के लिए रवाना हुई एक यात्री ट्रेन बड़े हादसे का शिकार होने से बच गई। उक्त ट्रेन वैतरणा रेलवे स्टेशन से आगे बढ़ी ही थी कि कपलिंग टूटने से इंजन बोगी छोड़कर लगभग २० मीटर आगे बढ़ गया। सौभाग्य से इस दौरान कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई, लेकिन इन हादसे से यात्रियों में हडकंप मच गया था। इसके कारण गुजरात की ओर ट्रेनों का परिचालन काफी देर के लिए बाधित रहा।
कॉस्ट कटिंग बना बड़ा कारण
इस दुर्घटना के साथ ही रेलवे सेफ्टी कमिश्नर की रिपोर्ट एक बार फिर चर्चा में आ गई, जिसमें वर्ष २०२१-२०२२ हुए हादसों की जांच की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष २०२०-२१ में देशभर में कुल २२ रेल हादसे हुए हैं, जबकि वर्ष २०२१-२२ में ३५ दुर्घटनाए हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें ६० प्रतिशत दुर्घटना रेल कर्मचारियों की लापरवाही ओर रेलवे प्रशासन द्वारा ट्रेनों के परिचालन तथा रख-रखाव के प्रति बरती जानेवाली उपेक्षा को कारण बताया गया है। वर्ष २०१६ में राजस्थान में हुए पैसेंजर ट्रेन हादसे में रेलवे की लापरवाही सामने आई थी, जिसमें रेलवे ट्रैक पर लगाए जानेवाले ६ लॉक की बजाय सिर्फ तीन लॉक लगाए गए थे। उसमें भी कुछ खराब थे, जिसके परिणामस्वरूप ट्रेन हादसा हुआ था। उसी तरह वर्ष २०१३ में टिटवाला के पास कपलिंग टूटने से दुर्घटना हुई थी, जिसमें जांच के बाद रेलवे की लापरवाही सामने आई थी। उस समय भी जांच में रेलवे कर्मचारी की लापरवाही बताई गई थी।

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