मुख्यपृष्ठस्तंभजनसंख्या को बनाना होगा विकास की सीढ़ी!

जनसंख्या को बनाना होगा विकास की सीढ़ी!

राजेश माहेश्वरी
लखनऊ

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि तीन महीने में हिंदुस्थान की जनसंख्या चीन से अधिक हो जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंदुस्थान इस वर्ष अप्रैल में जनसंख्या के मामले में चीन को पछाड़ देगा। उच्च जन्म दर और युवाओं की अधिक आबादी की वजह से १९५० के बाद पहली बार हिंदुस्थान की जनसंख्या चीन से अधिक होगी। यह चिंता का विषय है। २०११ की जनगणना के अंतिम आंकड़ों के मुताबिक हिंदुस्थान की आबादी १.२१ अरब यानी १२१ करोड़ थी। यह जनसंख्या अमेरिका, इंडोनेशिया, ब्राजील, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों की कुल आबादी से भी अधिक है। जनसंख्या को नियंत्रण करना आज के दौर की सबसे प्रमुख चुनौती है, वहीं बढ़ती आबादी किसी संकट से कम नहीं है। तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि अधिक जनसंख्या होने पर जनसंख्या एक संसाधन के रूप में काम आ सकती है। मानव संसाधन का प्रयोग करके हर देश तरक्की की सीढ़ियों पर चढ़ सकता है। इसके साथ-साथ अधिक जनसंख्या का बाजार पर भी बड़ा प्रभाव पड़ता है क्योंकि दुनिया भर की बड़ी से बड़ी कंपनियां उस देश में पैसे इन्वेस्ट करने के लिए तैयार रहती हैं। मगर इसके नुकसान भी कम नहीं हैं। आज के समय में अगर किसी देश की जनसंख्या कम ही रहे तो ही सही है क्योंकि अधिक जनसंख्या होने पर किसी भी देश के कृषि पर भार पड़ता है। विकास का ख्याल बाद में आता है, पहले सरकार को यह देखना पड़ता है कि सब लोग अपना पेट तो भर पा रहे हैं। जीवनस्तर पर भी बेहद बुरा प्रभाव पड़ता है क्योंकि रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत सुविधाएं भी कम लोगों को ही नसीब हो पाती हैं। अधिक जनसंख्या के कारण गरीबी, बेरोजगारी, पर्यावरणीय दुर्दशा, अत्यधिक खेती आदि जैसी समस्याएं लगी रहती हैं।
ज्यादातर देशों में यह पाया गया है कि अधिक जनसंख्या होने के कारण वहां पर काम करनेवाले लोगों की संख्या भी अधिक होती है और इसीलिए ऐसे देशों में जनसंख्या वृद्धि के कारण आर्थिक लाभ के ज्यादा अवसर रहते हैं। चीन का ही उदाहरण ले लीजिए। चीन में बड़े पैमाने पर जनसंख्या वृद्धि के बारे में हम सब जानते हैं लेकिन इस बात पर भी गौर करिए कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक चीन है, वहीं जापान का उदाहरण लीजिए। आज जापान की आबादी में युवा से ज्यादा अधिक उम्र के लोग शामिल हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा उम्र के लोग जापान में रहते हैं और यह जापान के लिए चिंता का विषय है। दिन-ब-दिन घटती जनसंख्या की वजह से जापान को कामगारों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों के एक वर्ग का मानना है कि हमारे देश में मौजूदा समय में विश्व में सर्वाधिक जनसंख्या युवाओं की है यदि इस आबादी का उपयोग हिंदुस्थान की अर्थव्यवस्था को गति देने में किया जाए तो यह हिंदुस्थान को जनसांख्यिकीय लाभांश प्रदान करेगा। किंतु यदि शिक्षा गुणवत्ता की परख न हो, रोजगार के अवसर सीमित हों, स्वास्थ्य एवं आर्थिक सुरक्षा के साधन उपलब्ध न हों तो बड़ी कार्यशील आबादी एक अभिशाप का रूप धारण कर सकती है। अतः विभिन्न देश अपने संसाधनों के अनुपात में ही जनसंख्या वृद्धि पर बल देते हैं। हिंदुस्थान में वर्तमान स्थिति में युवा एवं कार्यशील जनसंख्या अत्यधिक है किंतु उसके लिए रोजगार के सीमित अवसर ही उपलब्ध हैं। ऐसे में यदि जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित न किया गया तो स्थिति भयावह हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार कुशल आबादी एक ताकत है और हमें आबादी को संसाधनों के निर्माता के रूप में देखना चाहिए। आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, गरीबी खत्म करने तथा अधिक समावेशी समाज के निर्माण में मानव पूंजी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह मानव पूंजी आज हिंदुस्थान की संपदा का सबसे तेजी से बढ़नेवाला घटक है। इस पूंजी का लाभ उठाने के लिए हमें शिक्षा के क्षेत्र में तेज गति से काम करने की आवश्यकता है।
फिलहाल, हिंदुस्थान अपनी तेजी से बढ़ती जनसंख्या को विकास की सीढ़ी नहीं बना पाया है, इसलिए हिंदुस्थान को अभी जनसंख्या पर नियंत्रण करना बहुत जरूरी है। सरकार को जनसंख्या नियंत्रण के साथ-साथ खाद्यान्न की सुनिश्चितता, कृषि को लाभकारी बनाना एवं कीमतों पर नियंत्रण जैसे उपाय करने की आवश्यकता है। वन और जल-संसाधनों का उचित प्रबंधन किया जाना चाहिए। सरकार सहित राजनेताओं, नीति-निर्माताओं और आम नागरिकों सभी को साथ मिलकर एक ठोस जनसंख्या नीति का निर्माण करना होगा ताकि देश की आर्थिक विकास दर बढ़ती आबादी के साथ तालमेल स्थापित कर सके।

(लेखक उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय पर मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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