" /> पॉर्न बनेगी महामारी!…… टेक्नोलॉजी से बनाया जा रहा वीडियो

पॉर्न बनेगी महामारी!…… टेक्नोलॉजी से बनाया जा रहा वीडियो

डीपफेक के विशेषज्ञ हेनरी एजडर का दावा
कुछ दशक पहले तक लोगों के पास इंटरनेट नहीं था, ऐसे में पॉर्न कल्चर भी ना के बराबर था। हालांकि जैसे-जैसे दुनिया तकनीकी तौर पर बेहतर हुई है, उसी स्तर पर पॉर्न की दुनिया भी विकसित हुई है। अब एक प्रमुख कानूनी विशेषज्ञ का दावा है कि डीपफेक पॉर्नाेग्राफी आने वाले समय में यौन शोषण की महामारी साबित हो सकता है। कुछ सालों पहले तक किसी शख्स के चेहरे को बदलकर उसकी इमेज को मोडिफाई करने की खबरें आती रही हैं। लेकिन डीपफेक तकनीक के चलते यही प्रक्रिया अब वीडियो में भी दोहराई जाने लगी है, जो आने वाले दौर में कई लोगों खासकर महिलाओं के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।
डीपफेक एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जिसमें कंप्यूटर तकनीक का इस्तेमाल कर किसी भी इंसान के शरीर पर कोई भी चेहरा रखा जा सकता है। ये तकनीक इतनी कारगर है कि इसमें कहीं से भी ऐसा प्रतीत नहीं होता कि किसी व्यक्ति की बॉडी पर किसी दूसरे शख्स का चेहरा इस्तेमाल किया गया है।
२०१७ से बढ़ा व्रेâज
डीपफेक के विशेषज्ञ हेनरी एजडर इस टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट को काफी बारीकी से फॉलो कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डीपफेक का क्रेज २०१७ के आस-पास शुरू हुआ था। एक शख्स ने एक ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर शेयर करने के साथ ही इस तकनीक को आमलोगों के लिए थोड़ा आसान बना दिया था।
गंभीरता से लेने की जरूरत
उन्होंने कहा कि पहले जहां डीपफेक के लिए जटिल विजुअल इफेक्ट्स और प्रोग्रामिंग की जरूरत होती थी। अब कुछ हद तक ज्यादातर लोग इसे कर सकते हैं लेकिन नतीजे किसी भी इंसान के कंप्यूटर स्किल्स पर निर्भर करते हैं। उन्होंने कहा कि इसका काफी गलत इस्तेमाल हो सकता है और इसे गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है।
बन सकती है बड़ी समस्या
डरहम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मेक्ग्लायन का इस मामले में कहना है कि यूं तो डीपफेक का शिकार हुए लोगों की संख्या फिलहाल काफी कम है। अगर हम इसे लेकर पूरी तरह से लापरवाह रहे तो भविष्य में ये बड़ी समस्या बन सकती है। उन्होंने कहा कि अगर हमने इस तकनीक पर काबू नहीं पाया तो ये एक महामारी का रूप धारण कर सकता है। इसे शोषण की महामारी कहना गलत नहीं होगा।