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आर्थिक संकट में पोल्ट्री व्यवसाय!…६० प्रतिशत मुर्गी के चारे में बढ़ोतरी

• हो सकता है अंडा उत्पादन प्रभावित
सामना संवाददाता / मुंबई । राज्य समेत देशभर में मुर्गी पालन (पोल्ट्री) उद्योग पिछले दो साल से महंगाई की मार झेल रहा है। मुर्गी के चारे की कीमतों में ६० फीसदी की बढ़ोतरी से व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है, वहीं किसानों को भी करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। आनेवाले समय में अंडा उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

राज्य में प्रतिदिन करीब एक करोड़ अंडे का उत्पादन
विश्व में अंडा उत्पादन में भारत का तीसरा स्थान है। चीन और अमेरिका के बाद भारत का स्थान है। राज्य में रोजाना करीब एक करोड़ अंडे का उत्पादन होता है। देश के पोल्ट्री उद्योग का कारोबार २०२० तक २ लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया था। पोल्ट्री उद्योग तेजी से कृषि व्यवसाय के रूप में विकसित हो रहा है। तमिलनाडु के बाद आंध्र प्रदेश राज्य में तीसरे स्थान पर है। देश सहित ओमान, मालदीव, इंडोनेशिया, रूस, बहरीन, वियतनाम, नाइजीरिया सहित खाड़ी देशों को अंडे, पूरे अंडे की प्रक्रिया करके पावडर तैयार विभिन्न पदार्थों का निर्यात किया जाता है। प्रसंस्कृत अंडा उत्पादों का निर्यात विश्व बाजार में अंडे के पावडर और उबले अंडे की सबसे ज्यादा मांग है।

खाद्य कीमतों में कितनी वृद्धि?
अंडा देनेवाली मुर्गी को खिलाने के लिए मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, चावल की भूसी आदि और कुछ औषधीय विटामिन और पोषक तत्वों का उपयोग किया जाता है। इस भोजन को तैयार करने में फिलहाल २८ रुपए प्रति किलो तक का खर्च आता है। पिछले कुछ दिनों में प्रति किलो की कीमत १० रुपए बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले भोजन की लागत कुल उत्पादन का ८० प्रतिशत थी, लेकिन अब यह बढ़कर १२० प्रतिशत हो गई है। मक्का २५ रुपए किलो, सोयाबीन ६६ रुपए किलो, मूंगफली का आटा ५२ रुपए किलो, चावल की भूसी २० रुपए किलो आदि खाद्य पदार्थ महंगे बिक रहे हैं। इसमें फिर से दवाएं, विटामिन और पौष्टिक खाद्य पदार्थ का भी समावेश हैं। कुल खाद्य कीमतों में ६०-७० प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कारोबार घाटे में चल रहा है। किसानों को प्रतिदिन १०,००० पक्षियों के पालन में २०,००० रुपए का नुकसान हो रहा है।

पोल्ट्री उद्योग किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
राज्य में हजारों परिवार पोल्ट्री उद्योग पर निर्भर हैं। भारी संख्या में लोगों को पोल्ट्री और चिकन केंद्रों में रोजगार मिलता है। पोल्ट्री उद्योग कृषि से जुड़े व्यवसाय के रूप में विकसित हुआ है। कई किसान कृषि से उत्पादित मक्का, गेहूं और सोयाबीन का उपयोग करके भोजन की लागत को कम करने का प्रयास करते हैं। इस साल भारी बारिश के कारण खरीफ सोयाबीन बर्बाद हो गया है। सोयाबीन का बाजार भाव ७,५०० रुपए प्रति क्विंटल हो गया है, जबकि मक्का २,७०० रुपए प्रति क्विंटल हो गया है।

देश की खाद्य सुरक्षा में योगदान कितना है?
२०२१-२२ की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार देश २०१४-१५ में ७८.४८ अरब अंडे का उत्पादन कर रहा था। २०२०-२१ में यह बढ़कर १२२.११ अरब हो गया है। २०२२ में हर साल प्रति व्यक्ति दर वर्ष ९१ अंडे का उत्पादन हो रहा है। बच्चों और वयस्कों की प्रोटीन की जरूरतों को पूरा करने के लिए अंडे का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। घरेलू मांग को पूरा करने के लिए २०१५ में निर्यात का मूल्य ८७.३२ बिलियन मिलियन था। मौजूदा समय में निर्यात का आंकड़ा एक करोड़ डॉलर को पार कर गया है।

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