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महीनेभर में ली ७५१ शासनादेशों की ‘डोज’ … ‘ईडी’ सरकार को ‘जीआर’ का पावर!

• मंत्रिमंडल के फैसले के बाद जारी होता है जीआर
•  जीआर जारी होने के बाद ही फैसले पर होता है अमल
सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य की ‘ईडी’ यानी एकनाथ शिंदे-देवेंद्र फडणवीस सरकार की सत्ता आए एक महीने से ऊपर हो गए हैं, लेकिन आज तक मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो सका है। मगर इस सरकार के पास ‘जीआर’ का पावर है। इसी ‘जीआर’ पावर के सहारे यह सरकार चल रही है। इसी पावर का इस्तेमाल करते हुए इस सरकार ने पिछले एक महीने में ७५१ शासनादेश का ‘डोज’ लिया यानी जारी किया है।
गौरतलब है कि मेट्रो-३ परियोजना के लिए १४७ करोड़ रुपए के कर्ज, शिंदे गुट के विधायक शंभुराज देसाई के दादा व महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री बालासाहेब देसाई के स्मारक के लिए ५२ लाख रुपए, शिंदे गुट के विधायकों के निर्वाचन क्षेत्र के काम के लिए निधि, नियमित कामकाज के लिए आवश्यक शासनादेश का समावेश है। राज्य सरकार के कार्यभार में शासनादेश यानी जीआर का बड़ा महत्व होता है। मंत्री अथवा मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद ‘जीआर’ जारी होता है। जब तक ‘जीआर’ जारी नहीं होता, तब तक उस पर अमल नहीं होता है। नियुक्ति, पदोन्नति, निधि मंजूर करने जैसे अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों पर अमल इसके माध्यम से होता है। इसी प्रकार विकास निधि मंजूर करने के लिए भी ‘जीआर’ निकाला जाता है। मंत्रिमंडल का विस्तार अधर में लटका हुआ है, इसके बावजूद भी ‘ईडी’ सरकार ने एक महीने में करीब ७५१ शासनादेश जारी किए हैं, मंत्रिमंडल के अभाव में भी ईडी सरकार का ‘जीआर’ दनादन शुरू है।

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