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शक्तिशाली बमों से देश में मच सकती है तबाही!

कश्मीर में हथियारों की कमी के बाद छोटे मगर शक्तिशाली बमों की ओर मुड़े आतंकी

सुरेश एस डुग्गर / जम्मू कुछ दिन पहले एक अरसे के बाद एक बार फिर से जम्मू कश्मीर में स्टिकी बमों का खतरा उस समय मंडराया जब जम्मू-श्रीनगर हाईवे के बायपास स्थित बत्रा अस्पताल के पास एक स्टिकी बम को निष्क्रिय करने के बाद पुलिस का कहना था कि आतंकी आने वाले दिनों ऐसे बमों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर सकते हैं।
कश्मीर में आतंकियों के पास हथियारों की कमी का नतीजा यह है कि आतंकी पुराने हथियारों की ओर फिर से मु़ड़ गए हैं। जिनमें आईईडी और हथगोले प्रमुख हैं। हालांकि उन्होंने अपने आयुद्ध भंडार में अब स्टिकी बमों को भी शामिल कर लिया है जो किसी भी समय कश्मीर में खतरनाक साबित हो सकते हैं। इसके प्रति सुरक्षाधिकारी सबको चेता रहे हैं।
पिछले लगभग एक साल से करीब २०० हमलों में आतंकियों द्वारा जम्मू से लेकर कश्मीर के अंतिम छोर तक आईईडी और ग्रेनेड हमलों से दहशत फैलाने  का प्रयास किया जा चुका है। कुछेक को तो सुरक्षाबल नाकाम कर पाने में कामयाब रहे हैं पर कुछेक में सफलता आतंकियों के हाथ लगी थी।
अभी आईईडी और हथगोलों के कामयाब व नाकाम हमलों से सुरक्षाबल जूझ ही रहे थे कि स्टिकी बमों की बरामदगी और कई खेपों के जम्मू कश्मीर में पहुंच जाने की खबरों ने सभी को दहशतजदा कर दिया है। इसके प्रति सुरक्षाधिकारियों ने चेताते हुए कहा है कि यह भयानक और शक्तिशाली भी हो सकते हैं और आतंकी इनसे तबाही मचा सकते हैं।
पिछले साल कश्मीर में स्टिकी बमों के दो हमले हुए थे। उसके बाद सांबा
बॉर्डर पर इसकी एक बड़ी खेप पकड़ी गई थी। हालांकि उसके बाद न ही इनकी कोई बरामदगी हुई थी और न ही कोई इस्तेमाल हुआ जिस कारण सुरक्षाबल इनके प्रति लापरवाह हो गए थे।
पिछले साल मार्च महीने मेंं कश्मीर में एक टिप्पर को स्टिकी बम से उड़ाने की नाकाम कोशिश के बाद कुछ स्टिकी बम बरामद हुए तो खुफिया अधिकारियों ने कहा था कि अब आतंकी ग्रेनेड व आईईडी के स्थान पर स्टिकी बमों को तरजीह दे सकते हैं। इसके पीछे के कारणों को सुरक्षाधिकारी कुछ इस तरह से गिनाते थे कि यह बड़ी मात्रा में जम्मू कश्मीर पहुंच चुके हैं, यह आसानी से छुपाए जा सकते हैं और यह मेटल डिटेक्टर की नजर से भी बच जाते हैं।
ऐसे में जम्मू कश्मीर के नागरिकों का दहशतजदा होना जायज है। इसका भी कारण सुरक्षाधिकारियों की वह चेतावनी है जिसमें वे कहते थे कि आतंकी इन स्टिकी बमों का इस्तेमाल आम नागरिकों के वाहनों पर चिपका कर विस्फोट करने के इरादे लिए हुए हैं।

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