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५५ लाख छात्रों की प्राथमिक स्वास्थ्य जांच बंद! … ‘ईडी’ सरकार के फैसले से बच्चों पर छाया बीमारी का खतरा

 राज्य के ८१,५५६ प्राथमिक स्कूल हुए स्वास्थ्य सेवा से वंचित

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
राज्य की ‘ईडी’ सरकार स्वास्थ्य संसाधन बढ़ाने के लिए गंभीर ही नहीं दिखाई दे रही है। आलम यह है कि जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में शुरू की गर्इं कई योजनाएं मौजूदा सरकार ने या तो बंद कर दिया है या उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इसी तरह प्राथमिक स्कूलों के छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर चलाई गई ‘स्वास्थ्य जांच और सर्जरी योजना’ को ‘ईडी’ सरकार ने बंद कर दिया है। इससे राज्य के ५५ लाख छात्रों की प्राथमिक स्वास्थ्य जांच बंद हो गई है। इसका असर राज्य के ८१,५५६ प्राथमिक स्कूलों के छात्रों पर पड़ा है, जिन्हें स्वास्थ्य सेवा से वंचित होना पड़ा है।

‘ईडी’ सरकार के राज में चरमराईं स्वास्थ्य सेवाएं!
लापरवाही के चलते सरकारी अस्पतालों में मरीजों की हो रही हैं मौतें

कोरोना जैसी महामारी से सबक लेने की बजाय महाराष्ट्र में मौजूदा ‘ईडी’ सरकार लापरवाही की हदें पार कर रही है। आरोप है कि महाराष्ट्र में जब से ‘ईडी’ सरकार की सत्ता आई है, तभी से स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं। चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ की लापरवाही के कारण सरकारी अस्पतालों में मरीजों की मौतें हो रही हैं।
बता दें कि केंद्र और राज्य की निधि पर्याप्त मात्रा में खर्च न किए जाने से उन्हें सही तरीके से स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। अस्पताल दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में यह भी जानकारी सामने आई है कि बीते दो वर्षों में राज्य सरकार ने परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत पहली से लेकर चौथी कक्षा तक के छात्रों के लिए चलाई जा रही स्वास्थ्य जांच व सर्जरी योजना को बंद कर दिया है। विभाग के मुताबिक, बीते कई सालों से पहली से लेकर चौथी तक के छात्रों की चिकित्सा जांच होती थी। इसके साथ ही उनमें बीमारियां दिखाई देने पर उसका इलाज किया जाता था। साथ ही कई मामलों में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे छात्रों की सर्जरी भी की जाती थी, लेकिन यह योजना दो सालों से बंद कर दी गई है। दूसरी तरफ बच्चों की आंखों की जांच और उन्हें चश्मे मुहैया कराने के लिए उपलब्ध निधि साल २०२१-२२ में पूरी खर्च नहीं हो सकी, जबकि साल २०२२-२३ में ३० फीसदी राशि ही खर्च की जा सकी है। इसके साथ ही इस कार्यक्रम के तहत चलनेवाली २८ और अन्य योजनाओं पर भी यह सरकार पर्याप्त तरीके से प्रस्तावित निधि को खर्च नहीं कर पाई है।
जानकारी के मुताबिक राज्य के ८१,५५६ सरकारी स्कूलों में करीब ५५,२६,८७४ विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़नेवाले छात्रों की स्वास्थ्य जांच और जरूरत पड़ने पर बिना किसी शुल्क के सर्जरी कराने का बीड़ा महाविकास आघाड़ी सरकार ने उठाया था। इसके लिए योजना की शुरुआत भी हुई थी। लेकिन साल २०२२ में शिंदे सरकार ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि कोविड महामारी के कारण स्कूल बंद थे, जिस कारण बच्चों के स्वास्थ्य की जांच को लेकर चलाए गए अभियान को नहीं चलाया जा सका। ऐसे में योजना के लिए मंजूर निधि को खर्च नहीं किया जा सका। हालांकि, शिंदे सरकार ने यह भी साफ कर दिया कि साल २०२३ में योजना को बंद कर दिया गया, जिस कारण मंजूर निधि को खर्च नहीं किया गया।
इन योजनाओं पर खर्च हुई इतनी राशि
आरटीआई के तहत दी गई जानकारी के अनुसार राज्य के परिवार कल्याण कार्यक्रम विभाग ने बताया है कि पिछले दो सालों में कुल मंजूर २,८८,५२,८३८ में से २,५१,८९,५१३ रुपए खर्च किए गए हैं। इसके साथ ही ४५,८३,४८७ रुपए खर्च नहीं हो सके।
विभाग की तरफ से कहा है कि निधि खर्च न होने के पीछे कई कारण हैं। साल २०२१-२२ में कोविड महामारी का असर था। उस दौरान विभाग को निधि देरी से मिली थी। इसके साथ ही नियोजित दौरे भी नहीं हुए थे। ऐसे में तमाम योजनाओं पर उक्त निधि खर्च नहीं की जा सकी। इसके अलावा केंद्र सरकार से कई चीजों की मांग की गई थी, लेकिन उसे पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं कराया गया।

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