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राज्य की जेलों में ओवरफ्लो हुए कैदी! जेलों की क्षमता से १६ हजार अधिक कैदी हैं कैद, हर एक सुरक्षा गार्ड पर है १० कैदियों का भार

-गृहविभाग के आंकड़ों से उजागर हुई सच्चाई
-कर्मचारियों की भर्ती में कटौती से बढ़ी समस्या
-गृह विभाग ने जारी किया आंकड़ा
सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य की जेलों में कैदी ओवरफ्लो हो गए हैं। इन जेलों में क्षमता से अधिक १६ हजार कैदी हैं। राज्य की जेलों की कैदी क्षमता २५,२९३ है, परंतु इनमें ४१,५१४ वैâदी हैं। ऐसे में जेलों में कानून-व्यवस्था की समस्या निर्माण होने का खतरा है। इसे देखते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग ने ६ हजार कर्मचारियों के पद निर्माण करने का आदेश दिया था, परंतु वित्त विभाग ने इसमें कटौती करते हुए मात्र २ हजार कर्मचारियों की नियुक्ति करने का निर्णय लिया है।
राज्य में सेंट्रल जेल, जिला जेल, विशेष जेल, महिला जेल, ओपन जेल मिलाकर कुल ६० जेल हैं। इन सभी जेलों की वैâदी क्षमता २५,३९३ है, परंतु इनमें ४१,५१४ से अधिक वैâदी वैâद हैं। जेल में वैâदियों की प्रचंड भीड़ के कारण जेल कर्मचारियों को भारी तनाव का सामना करना पड़ रहा है।
छह वैâदियों पर हो एक गार्ड
राष्ट्रीय नियम के अनुसार, ६ कैदियों पर एक सुरक्षा गार्ड होना चाहिए। लेकिन राज्य में फिलहाल एक गार्ड पर १० से अधिक वैâदियों का भार है। राज्य के ६० जेलों के लिए ५,०६८ कर्मचारियों के पद मंजूर हैं, परंतु वर्तमान समय में केवल ४,१९४ पदों की मंजूरी दी गई है। जिसके कारण कर्मचारियों की अपेक्षा वैâदियों की संख्या ८³ अधिक है।
वित्त विभाग ने घटाई संख्या
पिछले दिनों कानून महाविद्यालय के रुचि कक्कड़ ने मुंबई के सेंट्रल जेलों में जाकर वैâदियों से मुलाकात की थी। जेल में क्षमता से अधिक कैदी होने के कारण उन्होंने राज्य के मानवाधिकार आयोग के पास शिकायत की थी। आयोग ने राज्य सरकार को जेल के लिए ६,१३७ पद निर्माण करने का प्रस्ताव पुलिस महानिदेशक व जेल महानिरीक्षक को दिया था। जेल प्रशासन ने वित्त विभाग के पास यह प्रस्ताव भेजा था, परंतु वित्त विभाग ने कर्मचारियों की संख्या में कटौती करके प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया। वित्त विभाग के निर्देश के अनुसार, पुलिस महानिदेशक ने २,२३८ पद का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। अंत में वित्त विभाग ने २ हजार पद सृजित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को दिया। जिस पर आखिर में मंत्रिमंडल की बैठक में मुहर लगाई गई।

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