मुख्यपृष्ठसमाज-संस्कृतिप्रो. रघुवीर सिंह को मिला हायर एजुकेशन लीडर अवार्ड

प्रो. रघुवीर सिंह को मिला हायर एजुकेशन लीडर अवार्ड

सामना संवाददाता / जयपुर

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के वीसी प्रो. रघुवीर सिंह पिछले दिनों हायर एजुकेशन लीडर ऑफ द ईयर-2023 के अवार्ड से नवाजे गए। प्रो. सिंह को यह अवार्ड एजुकेशन सेक्टर में उनके एक्सट्राओरडिनरी कंट्रीब्यूशन-विशेष योगदान के लिए मिला है। ब्रेनवंडर्स की ओर से जयपुर के होटल क्लार्क्स में आयोजित 9वीं एडुलीडर्स समिट में यह अवार्ड ब्रेनवंडर्स के फाउंडर एवम सीईओ मनीष नायडू और माइंड सेज इंटरनेशनल की फाउंडर एलिजाबेथ टेलर ने संयुक्त रूप से प्रो. सिंह को ट्रॉफी और सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। समिट में देश की 100 से अधिक यूनिवर्सिटीज के नामचीन शिक्षाविदों ने शिरकत की। उल्लेखनीय है कि ओबीई के एक्सपर्ट प्रो. सिंह अपनी अब तक की शैक्षणिक विकास यात्रा में 50 से अधिक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। कुलाधिपति सुरेश जैन, जीवीसी मनीष जैन और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन ने वीसी प्रो. रघुवीर सिंह को हायर एजुकेशन सेक्टर का ऊर्जावान व्यक्तित्व का धनी बताते हुए कहा कि प्रो. सिंह की लीडरशिप में तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी नित नई बुलंदियों को छुएगी।
समिट में वीसी प्रो. सिंह रोल ऑफ एआई इन हायर एजुकेशन पर व्याख्यान देते हुए बोले कि एआई टेक्नोलॉजी का चमत्कार है, लेकिन यह एक दोधारी तलवार की मानिंद है। टेक्नोलॉजी ने हमारी लिविंग, वर्किंग, एजुकेशन, इंफॉर्मेशन सरीखी रिसीविंग और लर्निंग के तौर-तरीकों को बदल दिया है। इसीलिए एआई का प्रयोग करते समय सावधानी बरतने की दरकार है। प्रश्न यह है कि आप इसे प्रयोग क्यों करना चाहते हैं? यदि हम इसके गुलाम हो गए तो शिक्षा के क्षेत्र में इसका परिणाम विनाशकारी हो सकता है। आपको इसे बचाना होगा। हम एआई और चैट जीपीटी जैसी तकनीक की वजह से परिवर्तन के दौर में हैं। यदि इस पर अति निर्भर होते हैं तो एआई वास्तव में खतरा है। इस कटु सच्चाई को भी नहीं नकारा जा सकता यदि आप एआई पर मुकम्मल तौर पर फोकस कर लेते हो तो आप एजुकेशन को मिस कर देते हो, लेकिन सामान्य और बार-बार होने वाले मेमोरी बेस्ड टास्क और एक्टीविटीज के लिए एआई उचित विकल्प हो सकती है। एआई एंड चैट जीपीटीज मानव को ट्रिक कर सकती हैं। एआई की मिस इंफॉर्मेशन से प्रोफेशनल एडिटर्स शॉक्ड हैं। पर्सनलाइज, कस्टमाइज एंड क्यूरेडिट ही लर्निंग है, क्योंकि युवा क्या सीखना चाहते हैं और क्या रेलेवेंट है, यही एडल्ट लर्निंग है। फॉर्मल एजुकेशन का लिमिटिड यूज नहीं है। एआई एक कुंजी की तरह है। यह सब पब्लिक डोमेन में है। एआई एजुकेशन के लिए सपोर्टिड होनी चाहिए। प्रो. सिंह ने बताया कि स्टुडेंट्स दो तरह से सीखते हैं। इसके लिए थिंकिंग, प्रॉब्लम सोलविंग, हयूमन रिलेशंस, माइंड सेट, सेंसिटिविटी की दरकार है। टीचर्स में एआई से रिप्लेसिंग का डर बना है। यदि टीचर्स खुद को चेंज या अपडेट नहीं करेगा तो वह स्वतः ही रिप्लेस हो जाएगा। टेक्नोलॉजी से अपनी तुलना मत करो, बल्कि अपने रिच एरिया जैसे- हॉटर्स, ड्राइव और शॉॅफ्ट स्किल्स को पहचानो और उसमें बेस्ट बनो।

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