मुख्यपृष्ठनए समाचारप्रोजेक्ट पड़ताल : मेट्रो एक्वा लाइन के लिए करना होगा लंबा इंतजार!

प्रोजेक्ट पड़ताल : मेट्रो एक्वा लाइन के लिए करना होगा लंबा इंतजार!

 डिपो के कार्य में देरी के कारण बढ़ी लागत
 काम पूरा होने में लगेंगे ३-४ महीने
अभिषेक कुमार पाठक

मुंबईकर तेजी से बढ़ते मेट्रो नेटवर्क में नवीनतम कनेक्टिविटी एक्वा लाइन (मेट्रो तीन) के शुरू होने का इंतजार बेसब्री से कर रहे हैं। लेकिन यह इंतजार इतने जल्द खत्म होनेवाला नहीं है। क्योंकि मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की मैनेजिंग डायरेक्टर अश्विनी भिड़े ने बताया कि मेट्रो ३ के शुरू होने में अब भी ३-४ महीने लगेंगे। क्योंकि डिपो कनेक्टिविटी का काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि हमारी कोशिश है कि हम इसे अप्रैल तक शुरू कर सकें। यदि हम जनवरी के अंत तक डिपो को जोड़ सकते हैं तो सभी परीक्षण और अनुमतियां मिलने में अगले दो से तीन महीने लगेंगे। मेट्रो दिसंबर २०२३ तक तैयार हो चुकी है, लेकिन नागरिकों की सेवा में आने में इसे तीन से चार महीने और लगेंगे। फिलहाल पहले चरण (आरे से बीकेसी) का काम ९३.४ फीसदी पूरा हो गया है। इस बात की जानकारी मराठी पत्रकार संघ में आयोजित अप्पा पेंडसे व्याख्यान कार्यक्रम में दी गई थी। यह कार्यक्रम जो मेट्रो की वर्तमान स्थिति और भविष्य में मेट्रो से लोगों को होनेवाले लाभ की स्थिति पर आयोजित किया गया था। याद दिला दें कि पहले एमएमआरसी ने बताया था कि दिसंबर २०२३ तक इसका काम पूरा किया जाएगा और जनवरी २०२४ के अंत में इसका लोकार्पण किया जाएगा।
मेट्रो ३ के खिलाफ दायर किए गए थे ९६ मामले
भिड़े ने कहा कि मेट्रो ३ के खिलाफ ९६ मामले दायर किए गए थे। कोर्ट ने मेट्रो ३ की सुनवाई काफी देर में की। हालांकि, सामने जो लोग थे, उनकी ओर से किये जा रहे हस्तक्षेप के कारण इन मामलों में देरी हुई। लेकिन हर पैâसला हमारे पक्ष में आया। कुछ मामलों में कोर्ट ने सामने वाले पक्ष का पक्ष भी समझा। कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति पिछले ५ साल से काम कर रही है। ये सभी मामले लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत बहुत पारदर्शी तरीके से हल किए। इसलिए हम अपना काम बेहतर तरीके से पूरा कर सके।

देरी के कारण हुई थी कुल लागत १४ हजार करोड़ रुपए
इस मौके पर अश्विनी भिड़े ने उपस्थित लोगों के समक्ष मुंबई मेट्रो ३ के कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। साथ ही आरे कारशेड का मामला काफी दिनों तक रुका रहा और उस वजह से प्रोजेक्ट में देरी हुई। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट में देरी की वजह से वित्तीय नुकसान हुआ था। प्रोजेक्ट की कुल लागत १४ हजार करोड़ रुपये तक बढ़ गई थी और डिपो के कार्य में देरी के कारण लागत ४ से ५ करोड़ रूपए बढ़ गई थी।

ओवरऑल प्रोजेक्ट रिपोर्ट -८७.फीrसदी
सिविल वर्क- ९७.१फीसदी
स्टेशन कंस्ट्रक्शन- ९३.६फीसदी
टनलिंग- १०० फीrसदी
सिस्टम वर्क – ६४.३फीसदी
डिपो वर्क- ९१.० फीसदी
मेन लाइन ट्रैक – ७२.० फीrसदी
फेज १ (आरे – बीकेसी)
ओवरऑल – ९३.४ फीसदी
स्टेशन और टनल वर्क – ९८.९फीसदी
ओवरऑल स्टेशन कंस्ट्रक्शन – ९६. ६ फीrसदी
ओवरऑल सिस्टम वर्क ७९.२ फीसदी
मेन लाइन ट्रैक- १०० फीसदी
ओसीएस वर्क- ७८.० फीसदी
फेज २ (बीकेसी- कफ परेड)
ओवरऑल – ८०.७ फीसदी
स्टेशन और टनल वर्क- ९६.८ फीसदी
ओवरआल स्टेशन कंस्ट्रक्शन- ९२.१ फीrसदी
ओवरऑल सिस्टम वर्क- ५०.० फीसदी
मेन लाइन ट्रैक-५६.०फीसदी
ओसीएस वर्क – ४७.९फीसदी

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