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बच्चियों की सुरक्षा स्वयं करें

योगेश कुमार सोनी

दिल्ली से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक बेहद परेशान करनेवाली खबर आ रही है। मामला यह है कि गाजियाबाद के लोनी कोतवाली क्षेत्र के बंथला चिरोड़ी मार्ग पर १० साल की बच्ची को कार में डालकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया है। बच्ची ने ५८ साल के बुजुर्ग समेत दो लोगों पर घटना को अंजाम देने का आरोप बताया है। घटना के तीन दिन बाद पीड़िता परिजनों के साथ थाने पहुंची और मामले की शिकायत की। पुलिस ने मामले में एक आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि बच्ची के पिता की कुछ वर्ष पहले मौत हो गई थी। इसके बाद चाचा ही बच्ची व पूरे परिवार का पालन-पोषण कर रहा है। पीड़िता के घरवालों ने बताया कि बच्ची बीते रविवार को घर के पास में पड़ोस के कुछ बच्चों के साथ खेल रही थी और खेलते-खेलते लोनी थाना क्षेत्र की एक कॉलोनी में पहुंच गई। रास्ता समझ ने आने की वजह से वह इधर-उधर भटकने लगी तभी उसके पास कार आकर रुकी। कार में दो लोग सवार थे जिन्होंने बच्ची को कहा कि कहां जा रही हो। बच्ची बोली घर जा रही थी लेकिन रास्ता भटक गई। कार सवारों ने बच्ची को घर छोड़ने की बात कही और कार में बैठा लिया। दोनों कार को लेकर बंथला चिरोड़ी मार्ग पर पहुंचे। आरोप है कि दोनों आरोपियों ने एक के बाद एक बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना को अंजाम देने का बाद आरोपियों ने उसे वहीं छोड़ दिया। इस घटनाक्रम से एक बात तो यह साबित हो जाती है कि आज भी हमारे देश में छोटी बच्चियां तक सुरक्षित नहीं हैं। इस मामले में एक सबसे ज्यादा तकलीफ देनेवाली बात यह है कि दुष्कर्म में ५८ वर्षीय बुजुर्ग भी शामिल है। न जाने वे वैâसे दिमाग व सोच के लोग होते हैं, जो बच्चियों के साथ भी ऐसा करते हैं। आज हम महिलाओं के समान अधिकार व सुरक्षा की कितनी भी बड़ी-बड़ी बातें कर लें लेकिन हकीकत हर रोज, हर पल हमारे समक्ष आती है। हम ऐसी घटनाओं से लगभग हर रोज ही रुबरु हो जाते हैं और यह तो वे घटनाएं जो सामने आती हैं। इसके अलावा हर रोज ऐसी घटनाएं होती हैं, जो हमारे सामने आती ही नहीं। चूंकि, कुछ लोग शर्म के मारे ऐसे मामलों में पुलिस के पास नहीं जाते और कहीं-कहीं बाहुबलियों का इतना वर्चस्व होता है कि कमजोर व बेहसहारा को दबा दिया जाता है। आज देश की स्थिति दयनीय है चूंकि हम उन चीजों से हार रहे हैं, जो मानव जीवन के लिए बुनियादी हैं। शिक्षा, सुरक्षा व रोजगार लेकिन हमारी सरकार किसी पर भी कसौटी पर नहीं उतर रही है। हम हर मुद्दे को दबा सकते हैं लेकिन महिला सुरक्षा पर चुप नहीं रह सकते। यदि इसी तरह बच्चियों के साथ ऐसा होता रहेगा तो वो दिन दूर नहीं कि लोग सड़कों पर उतरकर सरकार की कार्यशैली का विरोध करेंगे। यहां सरकार को गंभीर होने की जरूरत है चूंकि जब किसी की बहन-बेटी पर कोई बात आती है तो वह मरने-मारने से नहीं डरता। इसलिए उसकी हद की रोकने के लिए सरकार को हद में आना पड़ेगा और महिला सुरक्षा को लेकर साहसिक कदम उठाने होंगे, जिससे लोगों के मन में विश्वास पैदा हो। इसके अलावा उन सभी लोगों से निवेदन है कि छोटी बच्चियों का ध्यान रखा जाए आजकल जमाना सही नहीं है व किसी पर भी विश्वास नहीं कर सकते। अपनी व अपने बच्चों की सुरक्षा स्वयं करने की आवश्यकता है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक मामलों के जानकार हैं।)

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