मुख्यपृष्ठराजनीतिजनता के हित को सर्वोपरि माना- राजन विचारे

जनता के हित को सर्वोपरि माना- राजन विचारे

लोकसभा चुनाव में ठाणे संसदीय क्षेत्र से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष की तरफ से लगातार दो बार सांसद चुने गए नेता राजन विचारे को एक बार फिर से हैट्रिक बनाने के लिए चुनाव मैदान में उतारा गया है। नगरसेवक, महापौर और विधायक रहते हुए शिवसेना नेता राजन विचारे ने मनपा और विधानसभा में जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाने का काम किया है। इसी तरह बीते दस सालों में उन्होंने दीघा रेलवे स्टेशन, नया ठाणे स्टेशन, ठाणे कोस्टल रोड परियोजना, गायमुख से फाउंटेन तक एलिवेटेड मार्ग, जल परिवहन जैसी कई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाई है। इसके साथ ही उन्होंने नई मुंबई और मीरा-भायंदर में दमदार तरीके से विकास कार्यों को अंजाम तक पहुंचाया है। इस बार भी वे जनता के हितों से जुड़े विकास के मुद्दों को लेकर लोगों के बीच जा रहे हैं। इसके जरिए वे लोगों को भाजपा के साथ ही शिंदे सरकार का भी असली चेहरा दिखाएंगे। ठाणे लोकसभा क्षेत्र में तमाम विषयों पर राजन विचारे से `दोपहर का सामना’ के संवाददाता
धीरेंद्र उपाध्याय ने खास बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश…
ठाणे लोकसभा संसदीय सीट से जीत की हैट्रिक बनानेवाले हैं, ऐसी चर्चा जोरों पर है। क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए कोई नई योजना?
महाराष्ट्र में ठाणे लोकसभा क्षेत्र में आनेवाले ठाणे शहर, मीरा-भायंदर और नई मुंबई का सर्वश्रेष्ठ विकास हो, इस तरह का मेरा प्रयास रहेगा। हिंदुस्थान में पहली ट्रेन ठाणे से बोरीबंदर के बीच चली थी। यह रेलवे स्टेशन रोजाना करीब छह लाख यात्रियों के आवागमन के बोझ को ढोता है। इस बीच भारी भीड़ के चलते यात्रियों को अनेक समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। इसके समाधान के लिए ठाणे और मुलुंड के बीच एक `नया ठाणे स्टेशन’ का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसका विकास मल्टीमॉडल हब यानी हवाई अड्डे की तर्ज पर किया जाएगा। इसकी टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू हो जाएगा। इस स्टेशन के लिए ठाणे मेंटल हॉस्पिटल के भूखंड को लेकर हम लगातार १२ सालों तक हाई कोर्ट में लड़ते रहे और आखिरकार इसमें सफलता मिली। ये स्टेशन घोड़बंदर, वागले इस्टेट और आनंदनगर के निवासियों के लिए फायदेमंद होगा। इसके निर्माण के बाद ठाणे स्टेशन की ४० फीसदी और मुलुंड स्टेशन की ७५ फीसदी भीड़ कम हो जाएगी। मेरे जीवन का सबसे बड़ा काम `नया रेलवे स्टेशन’ का निर्माण ही है।
ठाणे कोस्टल रोड को लेकर कितनी मशक्कत करनी पड़ी?
मेरे जीवन में दूसरा सबसे बड़ा काम कोस्टल रोड का है। करीब १.९ किमी वाले इस कोस्टल रोड का निर्माण साकेत से गायमुख तक किया जा रहा है। हालांकि, इस रोड के निर्माण में कई बाधाएं आ रही थीं। मैं इस परियोजना को लेकर बीते १५-२० सालों से लगातार फॉलोअप कर रहा था। इसमें सबसे बड़ा बाधक एयर फोर्स था, क्योंकि मुद्दा सुरक्षा से जुड़ा हुआ था इसलिए उनकी तरफ से हमें एनओसी नहीं मिल रहा था। मंत्रालय की तरफ से सकारात्मक रूख नहीं अपनाया जा रहा था। लेकिन तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर से मैंने मुलाकात की और उन्हें इस बारे में बताया तो उन्होंने बिना देर किए योजना के लिए कंडीसनेबल एनओसी दे दी। फिलहाल, योजना की लागत पर मुहर लग गई है और अब उसकी टेंडरिंग प्रक्रिया चल रही है।
ठाणे में ट्रैफिक की समस्या को दूर करने के लिए किस तरह का प्रयास रहेगा?
ठाणे में भिवंडी, गुजरात, मुंबई समेत कई राज्यों से गाड़ियां आती हैं, जो शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या का सबब बनती हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए एमएसआरडीसी के माध्यम से गायमुख से लेकर फाउंटेन तक ठाणे में एलिवेटेड रोड का निर्माण किया जाएगा। इतना ही नहीं टिकुजीनी वाडी से बोरीवली नेशनल पार्क तक अंडर पास का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही रेलवे स्टेशन पूर्व में सैटिस दो का निर्माण चल रहा है, जो तीन हाथ नाका के गुरुद्वारा तक बन रहा है। रेलवे कोपरी पुल बनकर तैयार है। इसे लेकर मैं जिस समय विधायक था, तभी से प्रयासरत था। इसके साथ ही १,३३१ करोड़ रुपए की लागत वाले वाटर ट्रांसपोर्ट से भी ट्रैफिक से निजात मिलेगी। इसके तहत डोंबिवली, कोलशेत, मीरा-भायंदर और काल्हेर में जेट्टी का काम शुरू करने के लिए १०० करोड़ रुपए की मंजूरी मिल गई है। महाराष्ट्र सागरी महामंडल की तरफ से काम प्रगति पर है। इसके साथ ही घोड़बंदर फाउंटेन पर जेट्टी बनकर तैयार हो गया है। इससे पर्यटन को गति मिलने के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
दिघा गांव रेलवे स्टेशन को लेकर आपको किस तरह से संघर्ष करना पड़ा?
दिघा गांव रेलवे स्टेशन बीते कई सालों से फाइलों में दबा पड़ा था। इससे लोगों को या तो ऐरोली या ठाणे रेलवे स्टेशन की तरफ रुख करना पड़ता था। इसके बाद साल २०१४ में तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल से कई बार मुलाकात करके इसके महत्व को समझाया। इसके बाद उन्होंने वित्त वर्ष २०१४-१५ के बजट में इस स्टेशन के निर्माण के लिए ४२८ करोड़ रुपए का प्रावधान किया। इसके बाद साल २०१६ में प्रधानमंत्री के हाथों और शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे की उपस्थिति में भूमिपूजन हुआ। फिल्ाहाल, अब यह रेलवे स्टेशन बनकर तैयार हो गया, जिसका १२ जनवरी को लोकार्पण भी किया जा चुका है। इसके साथ ही लगातार किए गए प्रयासों से सीवुड से नेरूल तक रेलवे मार्ग का काम शुरू हुआ। इसके तहत पहले चरण में नेरूल से खारकोपर तक काम शुरू कर दिया गया, जिसे अब उरण तक विस्तार दे दिया गया है। इसके साथ ही सीवुड रेलवे स्टेशन यात्रियों के लिए खोल दिया गया है।
दस सालों में आपका कौन से विकास कार्यों पर अधिक फोकस रहा है?
मैं नगरसेवक से लेकर महापौर फिर विधायक और पिछले दस सालों से सांसद हूं। इस अवधि में मैंने केवल जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए काम किया है। मैंने अपने संसदीय कार्यकाल में `नया ठाणे रेलवे’ स्टेशन के साथ ही मीरा रोड स्टेशन और भायंदर स्टेशन के विकास पर अधिक जोर दिया है। ये दोनों ही रेलवे स्टेशन आनेवाले समय में हाईटेक होंगे। उत्तन में मछुआरों को सुविधाएं देने के लिए अब तक लगातार प्रयासरत हूं। वर्सोवा पुल के पास अंडरपास बनाया जाएगा। मीरा-भायंदर के छत्रपति शिवाजी महाराज क्षेत्र से लेकर सात सिग्नल पार करके उड़ान पुल का काम किया जाएगा। नागपुर की तर्ज पर मेट्रो के काम को वरीयता दे रहे हैं।
 शिंदे सरकार के शासन में आपको विकास कार्य में किस प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ा है?
इस सरकार ने पिछले ढाई सालों में केवल अपना विकास किया है। इस सरकार ने ठाणे और मुंबई समेत प्रदेश की सभी महानगर पालिकाओं को लूटने का काम किया है। शहर में अच्छी- खासी सड़कों को तोड़कर फिर से बनाकर पैसे बर्बाद करने का काम किया जा रहा है। शहर की समस्याओं को सुलझाने की बजाय ये पुलों की रंगाई-पुताई में लगे हुए हैं, जिसका कोई मतलब नहीं है, क्योंकि छह महीने के बाद फिर से रंगाई-पुताई करनी ही पड़ेगी। शहर के कई स्थानों पर लाइटें बंद है, जिसका मेंटेनेंस नहीं किया जा रहा है। ये केवल जनता के पैसों का दुरुपयोग करना जानते हैं। मौजूदा समय में मनपा की हालत इतनी खस्ता हो गई है कि ठेकेदारों को पैसे देने के लिए इनके पास पैसे नहीं है। इस सरकार ने मनपा का दिवाला निकाल दिया है।
प्रतिद्वंद्वियों को किस तरह से पटखनी देंगे?
सभी दलों के वरिष्ठ नेता यह कहते फिर रहे हैं कि अपने प्रत्याशी के पक्ष में वोट कराओ। लेकिन उनकी पार्टी में पिछले ३० सालों से काम कर रहे निष्ठावान कार्यकर्ताओं के साथ जिस तरह से व्यवहार किया जा रहा है, उससे वे नाखुश हैं। इसके साथ ही महाराष्ट्र में जिस तरीके से जोड़-तोड़ की राजनीति हुई है, उससे जनता नाराज है। वह बस केवल मतदान की राह देख रही है। जनता इनको सबक जरूर सिखाएगी।

 

 

अन्य समाचार