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कीर्ति व्यास मर्डर मामले में सजा का एलान … सहयोगियों को हुई उम्रकैद …एक बूंद खून से हुआ था खुलासा

आज तक नहीं मिली लाश

सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई के चर्चित कीर्ति व्यास हत्याकांड को लेकर मंगलवार को सेशन कोर्ट ने अहम पैâसला सुनाया। कोर्ट ने इस मामले में दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही अपहरण को लेकर १० साल व सबूत मिटाने के आरोप में ७ साल की भी सजा सुनाई है।
क्या था मामला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतका कीर्ति व्यास के साथ दोनों दोषी सिद्धेश ताम्हणकर और ख़ुशी सजवानी ‘बी ब्लंट’ नाम के सैलून में काम करते थे। सिद्धेश ताम्हणकर सैलून में कर्मी के रूप में कार्यरत था तो वहीं कीर्ति व्यास फाइनेंस मैनेजर के तौर पर काम करती थी। बताया जाता है कि सिद्धेश ठीक ढंग से काम नहीं करता था, जिसे लेकर कीर्ति ने उसे एक महीने का नोटिस थमा दिया था। इस बात से सिद्धेश काफी नाराज था, जिसके बाद उसने अपनी गर्लफ्रेंड ख़ुशी के साथ मिलकर कीर्ति की हत्या की योजना बनाई। दोनों ने १६ मार्च २०१८ को कार में कीर्ति की गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद शव को वडाला की खाड़ी में फेंक दिया। इस घटना के बाद कीर्ति के परिजनों ने कीर्ति की मिसिंग रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराई। हैरानी की बात यह थी कि कीर्ति को खोजने के लिए ख़ुशी और सिद्धेश भी पुलिस की मदद करते, ताकि किसी को उन पर शक नहीं हो।
आरोपियों को किया गया गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले को लेकर जांच के दौरान कई सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इस दौरान एक फुटेज में सिद्धेश कीर्ति के घर के बाहर दिखाई दे रहा था। इसके आधार पर जब पुलिस ने खुशी के कार की तलाशी ली तो उसमें खून का बूंद दिखा। उसके डीएनए की जांच की गई, जो कीर्ति के माता-पिता से मैच हुई। जिसके बाद पुलिस ने सिद्धेश और खुशी को गिरफ्तार कर लिया।
नहीं मिला शव
इस केस की सुनवाई न्यायाधीश एम जी देशपांडे के कोर्ट में पिछले ६ साल से चल रहा था, जिसके बाद मंगलवार को इसका पैâसला आया। पुलिस ने कीर्ति के शव का वडाला की खाड़ी में काफी खोजबीन की, लेकिन शव आज तक नहीं मिला।

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