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हमारी एकता पर प्रश्नचिह्न

हमारी एकता पर प्रश्नचिह्न क्यों?
क्यों हम एक नहीं?
पूर्वजों ने ये न सोचा
ये मिट्टी किसको जाएगी
सींच दिया इसे अपने लहू से
नारे लगाए, मिट्टी को चूमा
तिलक किया, जयकारा लगाया
“भारत माता की जय।”
भगत सिंह पंजाब से, खुदीराम बोस बंगाल से,
लोकमान्य तिलक मराठा की माता
जब सबकी है एक, तो क्यों हो रहे इसके टुकड़े अनेक?
आप तो मौजूद थे उस क्रांतिकारी संघर्ष में,
क्यों नहीं आपने इस मिट्टी की रक्षा की?
अपने बेटों और भाइयों की कुर्बानी दी!
आज साजिशें रचकर क्यों बांट रहे हो
भारतवर्ष की एकता को!… स्वतंत्र राष्ट्र की अखंडता को!
एक  ही मां के लाल थे जिन्होंने हमें इस सरजमीं का सौभाग्य दिया
फिर क्यों जहर घोल रहे हो इस भाईचारे में!
बेशक, एक है मां हमारी भारतमाता
और एक है संविधान, एक है विशाल आसमान और एक है अपनी ‘राष्ट्रीय जुबान’ (हिंदी)
एक हैं जज़्बात हमारे
एक ‘तिरंगा’ है हम सबकी शान
हम भारत माता के लाल, क्या कम है ये
हमारी  सशक्त पहचान।
हम हिंदुस्तानी… वतन हमारा हिंदुस्तान।

नैन्सी कौर
नई दिल्ली।

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