मुख्यपृष्ठधर्म विशेषजीवन दर्पण : राहु-मंगल का एकीकरण क्रोधी बनाता है!

जीवन दर्पण : राहु-मंगल का एकीकरण क्रोधी बनाता है!

डाॅ. बालकृष्ण मिश्र
गुरु जी, मेरी राशि क्या है और मेरी शादी कब होगी? -शिवेंद्र यादव

(जन्मतिथि- १६ सितंबर १९९६, समय- प्रात: ५.३६ बजे, स्थान- प्रयागराज, यूपी)
शिवेंद्र जी, आपका जन्म कन्या लग्न एवं तुला राशि में हुआ है। आपकी राशि पर इस समय शनि की ढैया भी चल रही है। लग्नेश एवं कर्मेश स्वग्रही होकर लग्न में राहु के साथ बैठकर आपको एवं सप्तम भाव को दूषित कर दिया है। इन सब कारणों से आप अपने लिए अनुकूल जीवन साथी प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। आपकी कुंडली का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया। आपकी कुंडली में अनंत नामक कालसर्प योग बन रहा है, जिसके कारण जीवन के हर प्रकार से विकास में किसी-न-किसी प्रकार से बाधा आती है। जीवन को पूर्ण तरह से विकसित करने के लिए अनंत नामक कालसर्प योग का पूजन आवश्यक है। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाना आवश्यक है।

काफी संघर्ष कर रहा हूं, कोई उपाय बताएं ?
– शिवराज सिंह
(जन्मतिथि- १२ अगस्त १९६४, समय- रात्रि में ३.२५ बजे, स्थान- रायपुर, छतीसगढ़)
शिवराज जी, आपका जन्म मिथुन लग्न एवं कन्या राशि में हुआ है। मिथुन लग्न में जन्म लेना ही भाग्यशाली माना जाता है। आपकी कुंडली में भाग्य शनि स्वगृही होकर आपको भाग्यशाली तो बनाया हुआ है लेकिन आपकी कुंडली में लग्न में ही राहु एवं लाभेश, मंगल तथा पंचमेश होकर शुक्र आपकी कुंडली में अंगारक योग भी बना दिया है। लग्न में राहु बैठकर तथा सप्तम भाव में केतु बैठकर अनंत नामक कालसर्प योग भी बनाया है। इन्हीं योगों के कारण आपके जीवन में बार-बार विकास में अवरोध उत्पन्न हो ही जाता है। इन्हीं योगों के कारण आप अपने परिश्रम का पूर्ण पारिश्रमिक भी प्राप्त नहीं कर पाते। आपकी योग्यता एवं काबिलियत का अन्य लोग लाभ प्राप्त कर लेते हैं। राहु और मंगल का एकीकरण व्यक्ति को क्रोधी एवं चिड़चिड़ापन भी बना देता है। आप अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें नहीं तो बना बनाया काम भी आपका बिगड़ सकता है। शनि आपका भाग्येश है और शनि के द्वारा शुभ फल प्राप्त करने के लिए पीपल के पेड़ की परिक्रमा प्रतिदिन ७ मिनट किया करें। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

मेरी शादी कब होगी और मेरी नौकरी कब लगेगी, उपाय बताएं? – अभिनव सिंह
(जन्मतिथि- १० दिसंबर १९८५, समय- प्रात: ७.४६ बजे, स्थान- जौनपुर, यूपी)
अभिनव जी, आपका जन्म धनु लग्न एवं तुला राशि में हुआ है। लग्नेश बृहस्पति नीच राशि का होकर आपके आत्मबल को कम कर दिया है। किसी भी कुंडली के केंद्र में ग्रह का होना व्यक्ति के लिए बहुत ही लाभकारी होता है लेकिन आपकी कुंडली में केंद्र में कोई भी ग्रह नहीं बैठा है, न किसी ग्रह की दृष्टि केंद्र पर पड़ रही है। आपकी कुंडली का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया तो आपकी कुंडली मांगलिक नहीं है। लेकिन सूक्ष्मता से अवलोकन करने पर आपकी कुंडली चंद्र मांगलिक कही जाएगी। विवाह का निर्धारण करने के लिए कुंडली में बृहस्पति एवं शुक्र का ताकतवर होना आवश्यक माना जाता है। आपकी कुंडली में बृहस्पति नीच राशि का है तथा शुक्र द्वादश भाव में बैठकर कमजोर हो गया है एवं पंचमेश मंगल राहु के द्वारा पीड़ित होकर अंगारक योग बना दिया है। अंगारक योग के साथ-साथ ग्रहण काल सर्प योग भी बना हुआ है। आप अनुकूल पत्नी प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। वैदिक विधि से उपाय करें अनुकूल जीवन साथी प्राप्त हो जाएगी।

मेरी परेशानी कब खत्म होगी और मेरा बिजनेस कब चालू होगा?
– ज्ञानेश्वर यादव
(जन्मतिथि- ८ मई १९८०, समय- रात्रि २.४८ बजे, स्थान- पवई, मुंबई)
ज्ञानेश्वर जी, आपका जन्म कुंभ लग्न एवं मकर राशि में हुआ है। आपकी राशि पर इस समय शनि की साढ़ेसाती भी चल रही है। आपकी कुंडली का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। लग्न में ही केतु बैठकर आपको समय-समय पर भ्रमित कर देता है तथा सप्तम भाव में बृहस्पति राहु, मंगल एवं शनि बैठकर आपको भाग्यशाली तो बनाया है लेकिन मंगल एवं राहु बैठकर अंगारक योग भी बना दिया है। आपके कार्यक्षेत्र को भी दुष्प्रभावित किया है। राहु एवं बृहस्पति का एकीकरण चांडाल योग बना दिया है। इन दूषित योगों के कारण आप अपनी योग्यता का पूर्ण लाभ प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। आपकी योग्यता एवं बुद्धिमानी का लाभ अन्य लोग प्राप्त कर लेते हैं। सप्तम भाव से जीवन साथी एवं व्यापार दोनों का ही विचार किया जाता है। सप्तम भाव में ही राहु के साथ में मंगल बैठकर आपको मांगलिक भी बना दिया है। व्यापार भाव एवं दांपत्य जीवन को कमजोर कर दिया है। उक्त दोषों को दूर करने के लिए वैदिक विधि से उपचार कराएं तभी आप हर प्रकार से लाभ प्राप्त कर पाएंगे। जीवन की अन्य गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

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