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मीडिया की आवाज दबाने के लिए पत्रकारों पर छापेमारी! …प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने बुलाई आपात बैठक

• प्रेस संगठनों में रोष, जताया विरोध
रमेश ठाकुर / नई दिल्ली
चीन से कथित फंडिंग के आरोप पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कल दिल्ली-एनसीआर के कई वरिष्ठ पत्रकारों के यहां छापेमारी की। छापेमारी की कार्रवाई तड़के शुरू हुई, जो दोपहर तक चली। घरों में छापेमारी के बाद पत्रकारों को पुलिस अपने साथ थाने ले गई। सभी कथित आरोपी पत्रकार ‘न्यूजक्लिक’ नाम की डिजिटल वेबसाइड से जुड़े हैं। इन पत्रकारों पर केंद्र सरकार की ओर से इससे पहले भी कार्रवाई की गई थी, लेकिन तब शोरगुल इतना नहीं मचा था। देशभर के पत्रकारों का कहना है कि केंद्र की सरकार मीडिया की आवाज को दबाने के लिए कार्रवाई करवा रही है।
ज्यादातर कथित आरोपी पत्रकार स्वतंत्र पत्रकारिता करते हैं और प्रत्येक मुद्दों पर मुखरता के साथ सरकार की गलत नीतियों की आलोचना करते हैं। इसको लेकर केंद्र सरकार उनसे खफा है। छापे के दौरान पुलिस ने मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर समेत तमाम इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं बतौर एविडेंस जब्त किए। सूचना है कि सभी आरोपी पत्रकारों पर गैरजमानती केस यानी यूएपीए लगाया गया हैं जिसमें जमानत नहीं मिलती।
‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया’ ने जताया विरोध
छापेमारी को लेकर ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया’ ने विरोध जताया है। इसको लेकर एक आपात बैठक हुई, जिसमें निर्णय हुआ कि पूरे मामले को लेकर एक डेलीगेट राष्ट्रपति से मिलेगा और उनसे न्याय की गुहार लगाई जाएगी। इसके अलावा देशभर के पत्रकार संगठनों में भी गहरा रोष है। कई जगहों पर ज्ञापन दिए गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी हुई।
अभिव्यक्ति की आजादी पर आपातकाल?
पत्रकारों पर की गई कार्रवाई को लेकर सियासत भी गर्म हो गई है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि जो पत्रकार मोदी-शाह के खिलाफ बोलेगा, उसका यही हाल केंद्र सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि मोदी ने मीडिया को बंधक बना दिया है। चुनाव नजदीक हैं उनकी गलत नीतियों की कोई आलोचना न कर पाए, इसलिए पत्रकारों में भय पैदा करने के लिए ये हथकंडा अपनाया है। बाकी दलों ने भी कठोर प्रतिक्रियाएं दी हैं।
इन पत्रकारों के घरों पर हुई छापेमारी
जिन लोगों पर कथित पर छापेमारी हुई, उसमें वेबसाइट के संपादक प्रबीर पुरकायस्थ, पत्रकार अभिसार शर्मा, औनिंद्यो चक्रवर्ती, भाषा सिंह, व्यंग्यकार संजय राजौरा, इतिहासकार सोहेल हाशमी, उर्मिलेश, निलांजन मुखर्जी और परंजॉय गुहा ठाकुरता आदि शामिल हैं। मुंबई में एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ के घर भी मुंबई पुलिस की एक टीम पहुंची। पुलिस सूत्रों से जानकारी मिली है, लिस्ट में अभी और भी पत्रकारों के नाम जुड़ेंगे।
पराजित भाजपा की हताशा का संकेत-अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पत्रकारों के घरों पर छापे डालने की निंदा करते हुए कहा कि ये छापे की कार्रवाई पराजित भाजपा की हताशा का एक संकेत है। यादव ने कहा कि ये कोई नई बात नहीं है, ईमानदार खबरनवीसों पर भाजपाई हुक्मरानों ने हमेशा छापे डाले हैं। लेकिन सरकारी प्रचार-प्रसार के नाम पर हर महीने मित्र चैनलों को कितने करोड़ दिए जा रहे हैं, यह भी जनता के सामने आना चाहिए। भाजपा राज में पत्रकारों का सर्वाधिक उत्पीड़न हुआ है। मंत्रियों से सवाल पूछने भर से उन्हें जेल की हवा खानी पड़ी है। कई पत्रकारों की जिंदगी से भी खिलवाड़ की घटनाएं हुर्इं। पत्रकारों के पीछे जांच एजेंसियां लगाकर भाजपा ने वस्तुत: अपने खिलाफ आत्मघाती गोल किया है। अभिव्यक्ति की आजादी उसे सहन नहीं हो रही है। बदले की भावना से वह जो कदम उठा रही है, वे उस पर ही भारी पड़ेंगे।

अघोषित आपातकालीन काल
देश में जानबूझकर उन पत्रकारों को निशाना बनाया गया है, जो सत्ता के गुलाम नहीं हैं। ऐसे पत्रकारों को चैनलों में नौकरी मिलने से रोकने के लिए जहां एक तरफ इन चैनलों को बड़े उद्योगपतियों से खरीदने की योजना है। ये पत्रकार लगातार सरकार के निशाने पर हैं। ये आगामी आपातकालीन काल है। दिल्ली में पत्रकारों के घर पर दिल्ली पुलिस की विशेष टीम ने मंगलवार सुबह छापेमारी की। मंत्रालय और विधानमंडल संवाददाता संघ मीडिया को चुप कराने के लिए की गई इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करता है।
-प्रमोद डोईफोडे-अध्यक्ष, प्रवीण पुरो-कार्यवाहक

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