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चुन-चुनकर पड़ रहे हैं छापे … आरजेडी उम्मीदवार की ५ घंटे तलाशी के बाद आयोग को मिले मात्र रु. ५० हजार!

सामना संवाददाता / पटना
विपक्ष के खिलाफ चुनाव आयोग चुन-चुनकर कार्रवाई कर रहा है। इसके तहत वह विपक्षी नेताओं के कार, जीप, ऑफिस से लेकर हेलिकॉप्टर तक में छापे मार रहा है। ऐसी ही एक कार्रवाई में उसने ५ घंटे तक आरजेडी उम्मीदवार के ऑफिस में छापेमारी की, जिसके बाद उसे मात्र ५० हजार रुपए ही मिल पाए।
बता दें कि लोकसभा चुनाव को लेकर गहमागहमी अब चरम पर पहुंच गई है। कल शाम पहले चरण का चुनाव प्रचार खत्म हो गया। १९ अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग होनी है। इस बीच बिहार के औरंगाबाद में चुनाव आयोग की फ्लाइंग स्क्वॉड की टीम ने आरजेडी उम्मीदवार के प्रधान चुनाव कार्यालय पर छापेमारी कर नकदी और अन्य सामान बरामद किया है। आरजेडी कार्यकर्ताओं ने इसका जमकर विरोध भी किया। पुलिस की टीम ने करीब ५ घंटे तक की छापेमारी की। फ्लाइंग स्क्वॉड की टीम ने आरजेडी प्रत्याशी अभय कुशवाहा के कार्यालय पर छापेमारी की। नगर थाना क्षेत्र के फार्म स्थित मधुरम होटल में टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से छापेमारी की। आरजेडी कार्यकर्ताओं ने इसे कायरतापूर्ण कार्रवाई बताते हुए कहा कि पार्टी का मनोबल तोड़ने और वोटरों के बीच भय पैदा करने को लेकर यह कार्रवाई की गई है। टीम का सहयोग कर रहे सदर एसडीपीओ ने इस छापेमारी की पुष्टि की है।

चुनाव आयोग के पास नहीं है कानूनी गुंजाइश

लोकसभा चुनाव के वक्त मोदी सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। इस बात की शिकायत विपक्ष ने चुनाव आयोग से की थी। पर चुनाव आयोग ने साफ कह दिया है कि वह इस मामले में कानून के आड़े नहीं आएगा और कोई कार्रवाई नहीं करेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने इस मुद्दे की जांच करने के बाद निष्कर्ष निकाला कि उसके पास हस्तक्षेप करने और एजेंसियों को उनके कानूनी आदेश के अनुसार किए गए कार्यों को रोकने के लिए निर्देशित करने के लिए बहुत कम कानूनी गुंजाइश है, जो उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हैं। उसका मानना है कि कोई भी पीड़ित पक्ष कानूनी उपाय तलाशने के लिए अदालत जाने के लिए स्वतंत्र है, जैसा कि कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले जैसे मामलों में पहले से ही किया जा रहा है। चुनाव आयोग ने कहा कि उसने चुनावों के शुरुआत में ही प्रमुख सचिव (गृह) या अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) और मुख्यमंत्रियों के प्रधान सचिव के रूप में दोहरे प्रभार वाले अधिकारियों को हटा दिया था। चुनाव आयोग के एक पदाधिकारी ने कहा, ‘जिन छह राज्यों में चुनाव आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए तबादलों का आदेश दिया था, उनमें से चार भाजपा शासित हैं।’ पश्चिम बंगाल के डीजीपी सहित अधिकारियों, डीएम और एसपी के रूप में तैनात गैर-वैâडर अधिकारियों और उम्मीदवारों के साथ पारिवारिक संबंध साझा करने वाले अधिकारियों को भी स्वत: ही बदल दिया गया। महिलाओं की गरिमा के खिलाफ बयानों पर सख्त रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग ने ऐसी टिप्पणियों की निंदा की थी और सुप्रिया श्रीनेत और दिलीप घोष जैसे उल्लंघनकर्ताओं को भविष्य में सावधान रहने को कहा था।

विपक्षी नेताओं के हेलिकॉप्टर में रुपए ढूंढ़ रहा है चुनाव आयोग!
राहुल गांधी के बाद अभिषेक बनर्जी के चॉपर की भी हुई तलाशी

चुनाव आयोग की नजरें विपक्षी नेताओं के हेलिकॉप्टर पर लगी हुई हैं। वह इन हेलिकॉप्टरों में रुपए ढूंढ़ रहा है। हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी के हेलिकॉप्टरों की तलाशी ली गई। इस पर काफी बवाल मचा।
बता दें कि लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी नेताओं के हेलिकॉप्टर की जांच होना चर्चा का मुद्दा बन गया है। विपक्षी पार्टियों का कहना है कि यह तलाशी अभियान केवल उन्हें परेशान करने के लिए केंद्र के आदेश पर किया गया है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह तलाशी नियमों के हिसाब से ही ली गई है। इसका उद्देश्य केवल ज्यादा नकद जाने से रोकना है। आचार संहिता लागू होने के बाद से हवाई क्षेत्रों और हेलीपैड के जरिए फ्री की सुविधाएं दी जा रही हैं। टीएमसी महासचिव और पश्चिम बंगाल में डायमंड हार्बर से प्रत्याशी अभिषेक बनर्जी के हेलिकॉप्टर की भी तलाशी ली गई थी। टीएमसी ने आरोप लगाया कि इन अधिकारियों को कुछ भी नहीं मिला। राहुल गांधी के हेलिकॉप्टर की तलाशी के मामले पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश का कहना है कि पार्टी को चुनाव आयोग की टीम के द्वारा राहुल गांधी के हेलिकॉप्टर की जांच करने से कोई भी परेशानी नहीं है, लेकिन आयोग को केवल राहुल गांधी के हेलिकॉप्टर की ही नहीं बल्कि पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के हेलिकॉप्टर की भी जांच करनी चाहिए।

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