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बेरोजगारी की आवाज उठाना देशद्रोह नहीं!… ‘संसद कांड’ का मास्टरमाइंड ललित झा के पिता की दो टूक

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने का मास्टरमाइंड बताया जा रहा ललित झा पुलिस की गिरफ्त में है। ललित झा बेरोजगार है और बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था। ललित झा के ऊपर पुलिस ने देशद्रोह का मामला दर्ज किया है। यह खबर सुनने के बाद ललित झा के पिता का कहना है कि उनके बेटे ने तो बेरोजगारी का मुद्दा उठाया है। बेरोजगारी की आवाज उठाना देशद्रोह नहीं हो सकता।
ललित झा के ६८ वर्षीय पिता देवानंद झा का कहना है कि उनके बेटे का तरीका गलत हो सकता है, लेकिन उसने देश में बेरोजगारी को लेकर जो मुद्दा उठाया है, वह सही है। लोकसभा में गत १३ दिसंबर को अराजकता पैâलाने के आरोप में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ललित झा के पिता देवानंद झा का कहना है कि उनके बेटे ने कोई अपराध नहीं किया है, जिसके लिए उसे सजा दी जाए। ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने जोर देकर कहा कि बेरोजगारी के खिलाफ आवाज उठाना देशद्रोह नहीं है और पुलिस को उसे तुरंत रिहा करना चाहिए।
बता दें कि दिल्ली पुलिस ने ललित झा और अन्य के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानून गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धाराओं में मामला दर्ज किया है। देवानंद झा ने कहा, ‘ललित मेरा दूसरा बेटा है। वह बहुत प्रतिभाशाली है और दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहता है।’ उन्होंने बताया कि ललित ने विज्ञान में स्नातक किया है और डॉक्टर बनना चाहता था। वह घर चलाने के लिए कोलकाता में ट्यूशन पढ़ाता था। उन्होंने बताया कि परिवार ज्यादातर कोलकाता में रहता है, लेकिन १० दिसंबर को ललित ने उन्हें सियालदह रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया, जहां से वे दरभंगा के लिए ट्रेन में चढ़ गए। उन्होंने कहा, ‘उसने मुझे बताया कि वो कुछ दिनों के लिए दिल्ली जा रहा है, क्योंकि उसे कुछ जरूरी काम है। मुझे नहीं पता था कि वह जरूरी काम क्या था।’

मेरे बेटे ने हत्या, चोरी, डकैती जैसा कोई अपराध नहीं किया! कहना है ‘संसद कांड’ का मास्टरमाइंड ललित झा के पिता का

‘संसद कांड’ का मास्टरमाइंड ललित झा इस समय पुलिस की गिरफ्त में है। उसके पिता देवानंद झा बेनीपुर ब्लॉक के रामपुर उदई गांव में अपने पांच कमरों वाले पैतृक घर में हैं। उनका कहना है कि उनके बेटे का तरीका गलत हो सकता है, लेकिन उसने देश में बेरोजगारी को लेकर जो मुद्दा उठाया है, वह सही है। उसने हत्या, चोरी या डवैâती जैसा कोई अपराध नहीं किया है।
देवानंद झा पूर्णकालिक पुजारी हैं। उनका कहना है कि उनका बेटा भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद का प्रशंसक है। वह हमेशा समाज में बदलाव लाने की बात कहता था। ललित की मां मंजुला रोते हुए अपने बेटे की रिहाई की गुहार लगाते हुए कहती हैं, ‘मैं उसके कृत्य की गंभीरता नहीं जानती, लेकिन मैं इतना जानती हूं कि वह कभी अपराध नहीं कर सकता है। वह दो साल पहले गांव आया था और जब भी वह आता था तो बच्चों को पढ़ाता था।’ ललित के एक भाई सोनू ने बताया, ‘कल बड़े भैया ने बताया था कि पुलिस ने कोलकाता में उनसे भी पूछताछ की है। वह किसी गलत काम में शामिल नहीं है, ललित भैया ने भी कुछ गलत नहीं किया है। पुलिस ने मेरी भाभी से भी पूछताछ की है। हमारे परिवार को देखकर क्या आपको लगता है कि हममें से कोई भी कभी गलत काम में शामिल हो सकता है? मुझे यकीन है कि देर-सबेर मेरा भाई जेल से बाहर आएगा।’ ललित के पड़ोसी अजय झा ने कहा, ‘वे सभी बहुत ईमानदार लोग हैं।’ एक अन्य पड़ोसी प्रियरंजन मिश्रा ने कहा, ‘हम ललित के परिवार को अच्छी तरह जानते हैं। वह आतंकवादी नहीं है। वह एक क्रांतिकारी सोच रखने वाला साधारण व्यक्ति है।’ ऐसे भी आरोप हैं कि घटना के बाद ललित झा ने पश्चिम बंगाल में अपने एक दोस्त, जो एनजीओ से जुड़ा है और जहां पहले ललित काम करता था, को घटना के संबंध में एक वीडियो भेजा था। रिपोर्ट में कहा गया है कि उसने चार अन्य आरोपियों के भी मोबाइल फोन नष्ट कर दिए थे। इस बीच दिल्ली पुलिस ने संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने के मामले में सह-साजिशकर्ता महेश कुमावत को भी गिरफ्तार कर लिया। इस कृत्य के मास्टरमाइंड कहे जा रहे ललित झा के ३३ वर्षीय सहयोगी कुमावत के खिलाफ साजिश रचने और सबूतों को नष्ट करने की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

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