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‘राज’नीति : गुस्से में गहलोत

रमेश सर्राफ धमोरा झुंझुनू

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इन दोनों गुस्से में नजर आ रहे हैं। अमूमन शांत स्वभाव व सौम्य छवि के माने जाने वाले गहलोत को गुस्सा कम ही आता है। मगर जब आता है तो जमकर आता है। पिछले दिनों राजस्थान कांग्रेस की नवगठित राजनीतिक समिति की बैठक चल रही थी, जिसमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुजरात के प्रभारी रघु शर्मा, कांग्रेस स्टेयरिंग कमेटी के सदस्य रघुवीर मीणा, राज्यसभा सांसद नीरज डांगी, वैâबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, उदयलाल आंजना सहित कई लोगों को गुस्से से झिड़क दिया। गहलोत के तेवर देखकर मीटिंग में शामिल अन्य नेता भी सकते की स्थिति में आ गए। इतना ही नहीं इस मीटिंग में कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा सहित तीनों सह प्रभारी व समिति के सभी ३५ सदस्य मौजूद थे। गहलोत के तेवर देखकर पार्टी के अन्य कई नेताओं की तो मीटिंग में किसी भी तरह का सवाल पूछने की हिम्मत ही नहीं हुई।

पति-पत्नी में होगा मुकाबला
सीकर जिले की दांतारामगढ़ विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक वीरेंद्र सिंह की पत्नी रीटा सिंह ने जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय चौटाला की उपस्थिति में पार्टी जॉइन कर ली। जेजेपी जॉइन करने के बाद रीटा सिंह ने कहा कि वह दांतारामगढ़ से चुनाव लड़ना चाहती हैं। पिछले विधानसभा चुनावों में भी रीटा सिंह ने कांग्रेस से टिकट मांगा था। लेकिन कांग्रेस ने उनके पति वीरेंद्र सिंह को टिकट दे दिया था। रीटा सिंह कांग्रेस के टिकट पर सीकर जिला प्रमुख भी रह चुकी हैं। रीटा व उनके पति के बीच लंबे समय से अनबन चल रही है इस कारण वह अपने पति वीरेंद्र सिंह से अलग रह रही हैं। इस बार वे अपने पति वीरेंद्र सिंह के सामने चुनाव ल़ड़ेंगी। जेजेपी ने रीटा सिंह को महिला विंग का अध्यक्ष बनाया है। रीटा सिंह दिग्गज कांग्रेस नेता नारायण सिंह की पुत्रवधू हैं। नारायण सिंह दांतारामगढ़ से ६ बार विधायक व कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं।

राजनीति छोड़ेंगे मंत्री
वन एवं पर्यावरण मंत्री हेमाराम चौधरी ने कहा है कि वे इस बार चुनाव लड़ने के मूड में नहीं हैं। उनका कहना है कि इस बार उनकी जगह किसी और को मौका देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने पहला चुनाव १९८० में लड़ा था। लगातार ४४ साल से चुनाव लड़ रहा हूं। जनता ने मुझे प्यार, सहयोग देने में कोई कमी नहीं रखी है। मैंने जितना हो सके जनता का हर काम पूरा करने की कोशिश की है। लेकिन इस बार चुनाव लड़ने के मूड में नहीं हूं। हेमाराम ने कहा कि गरीब और आम लोगों के लिए इतनी योजनाएं चला रखी हैं इसलिए जनता से भी उम्मीद है कि सरकार को दोबारा मौका देंगी। हेमाराम ने कहा कि मेरी चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं है। यह निर्णय पार्टी करेगी। मेरी इच्छा है कि किसी दूसरे को मौका देना चाहिए। चर्चा है कि हेमाराम चौधरी अपने स्थान पर अपनी बेटी सुनीता चौधरी को कांग्रेस का टिकट दिलवाना चाहते हैं।

नहीं होंगे छात्रसंघ के चुनाव
राजस्थान सरकार ने इस बार छात्रसंघ के चुनाव नहीं करवाने का पैâसला किया है। छात्रसंघ चुनाव नहीं कराने के सरकार के निर्णय के खिलाफ प्रदेशभर में छात्र नेता प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन लगता नहीं है कि सरकार अपने पैâसले से पीछे हटने वाली है। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार ने हाईकोर्ट में अपने पैâसले के बचाव को लेकर वैâविएट दायर कर दी है। हाईकोर्ट में वैâविएट दायर करने से यह साफ हो गया है कि सरकार अपने पैâसले के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ने को तैयार है। वहीं वैâविएट दायर होने के बाद अब छात्र संगठन व छात्र नेता अगर इस पैâसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हैं तो उन्हें याचिका की एडवांस कॉपी सरकारी अधिवक्ता को देनी होगी। वहीं हाईकोर्ट किसी भी याचिका पर कोई भी निर्देश देने से पहले राज्य सरकार का पक्ष सुनेगा। ऐसे में हाईकोर्ट से छात्रसंघ के चुनाव चाहनेवाले छात्रों को भी आसानी से राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं)

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