मुख्यपृष्ठस्तंभ‘राज'नीति : गहलोत का बड़ा कदम

‘राज’नीति : गहलोत का बड़ा कदम

रमेश सर्राफ धमोरा झुंझुनू

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दोनों पैरों में चोट लगने के कारण पिछले कई महीनों से अपने सरकारी आवास पर रहकर ही राज कार्य कर रहे हैं। अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए गहलोत लगातार आमजन के हित की नई-नई योजनाओं की घोषणा कर रहे हैं। इसी शृंखला में बैंकों के कर्ज से परेशान प्रदेश के किसानों को राहत दिलाने के लिए गहलोत सरकार राजस्थान राज्य कृषक ऋण राहत आयोग का गठन करने जा रही है। इस आयोग के गठन करने के बाद राजस्थान के किसी भी किसान से बैंक जबरन ऋण वसूली नहीं कर सकेंगे। विधानसभा के आखिरी सत्र के आखिरी दिन मुख्यमंत्री गहलोत ने विधानसभा से इस बाबत बिल पास करवाकर एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है, जिसकी विपक्षी दलों के पास भी कोई काट नहीं है। इस विधेयक के कानून बनने से प्रदेश के उन लाखों किसानों को लाभ मिलेगा जो बैंक ऋण से परेशान नजर आ रहे हैं।

बेनीवाल की चाहत
नागौर लोकसभा सीट से सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल अपनी पार्टी को राजस्थान में तीसरा विकल्प बनाने के प्रयास में लगे हुए हैं। इस बाबत वह रात-दिन मेहनत कर राजस्थान का दौरा कर रहे हैं। मगर उनके सामने सबसे बड़ी समस्या उनकी पार्टी पर एक जाति का ठप्पा लगा होना है। जाट समाज से आनेवाले हनुमान बेनीवाल की पार्टी अभी तक प्रदेश में अन्य दूसरे समाज को जोड़ने में सफल नहीं हो पाई है। पहले बेनीवाल कांग्रेसी नेता सचिन पायलट को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे थे। मगर पायलट के कांग्रेस में ही बने रहने के चलते उनका प्रयास सफल नहीं हो पाया। अब बेनीवाल राजस्थान में आम आदमी पार्टी, हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से गठबंधन करने का प्रयास कर रहे हैं। यदि अगले विधानसभा चुनाव में बेनीवाल की पार्टी का किन्हीं अन्य दलों के साथ गठबंधन हो जाता है तो उसका उन्हें निश्चित तौर पर लाभ मिलेगा।

साइड लाइन हुए पायलट
राजस्थान में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट इन दिनों राजनीति की मुख्यधारा से कटे हुए लग रहे हैं। पिछले दिनों दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर राजस्थान को लेकर संपन्न हुई एक हाई लेवल मीटिंग में राहुल गांधी की मौजूदगी में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ अगले विधानसभा चुनाव में एकजुट होने के लिए मना लिया गया था। उसके बाद से पायलट राजस्थान में कम ही नजर आ रहे हैं। उनके द्वारा इन दिनों न तो कोई मीटिंग की गई है और न ही किसी क्षेत्र का दौरा किया गया है। पार्टी संगठन के पुनर्गठन में भी पायलट समर्थकों को ज्यादा तवज्जो नहीं मिल पाई है। टोंक जिले में ही उनकी सहमति से जिलाध्यक्ष बनाया गया है। चर्चा है कि अगले विधानसभा चुनाव में भी पायलट समर्थकों को ज्यादा तवज्जो नहीं मिलेगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को प्रâंट पर रखकर ही पार्टी चुनाव लड़ेगी।

चुनाव लड़ेंगे अध्यक्ष
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष हरिप्रसाद शर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। चर्चा है कि वे फुलेरा से विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी शर्मा पिछले विधानसभा चुनाव में भी फुलेरा से कांग्रेस पार्टी की टिकट मांग रहे थे मगर उन्हें टिकट तो नहीं मिला लेकिन चुनाव के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कर्मचारी चयन बोर्ड का अध्यक्ष बनाकर उपकृत कर दिया था। शर्मा के इस्तीफा देने से बोर्ड में होनेवाली विभिन्न पदों की १० भर्तियों के तकरीबन ७००० पदों पर संकट मंडराने लगा है। यदि सरकार ने शर्मा के स्थान पर शीघ्र ही नया अध्यक्ष नहीं बनाया तो ये भर्तियां अटक सकती हैं, क्योंकि आनेवाले दो महीने के बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लग जाएगी। आचार संहिता लगने के बाद किसी भी तरह की नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाएगी।
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं)

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