मुख्यपृष्ठस्तंभराजधानी लाइव: सहानुभूति बटोर रही है गिरफ्तारी?

राजधानी लाइव: सहानुभूति बटोर रही है गिरफ्तारी?

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) देर-सबेर संजय सिंह के गले की फांस बनेगी ही ऐसी आशंका तो पहले से ही थी पर गिरफ्तारी का टाइम चुनावी होगा, ऐसा किसी ने सोचा नहीं था। संजय सिंह शुरू से प्रधानमंत्री के खिलाफ मुखर थे, वे खुलकर उनकी आलोचना करने से नहीं चूकते थे। चाहे संसद हो या सड़क, हर जगह बेखौफ होकर लोहा ले रहे थे। संसद का कोई ऐसा सत्र नहीं रहा, जिसमें उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई हो, इस वक्त बर्खास्त भी चल रहे थे। अर्थात केंद्र सरकार के निशाने पर वो बहुत पहले से थे। खैर, उनकी गिरफ्तारी के साथ ही ‘आम आदमी पार्टी’ (आप) की टॉप लीडरशिप इस वक्त तिहाड़ जेल में है। वह ‘इंडिया’ गठबंधन को भी मजबूती से संबल दे रहे थे। पांच राज्यों में चुनावों का बिगुल बज चुका है। एकाध दिनों के भीतर तारीखों का एलान होना है। उसके तुरंत बाद लोकसभा चुनाव का भी डंका बज जाएगा।
संजय सिंह की गिरफ्तारी निश्चित रूप से ‘आप’ को और ‘इंडिया’ गठबंधन के लिए बड़ा झटका है। चुनावी रणनीति बनाने में वे प्रमुख भूमिका निभा रहे थे। जितने दिन भी वे जेल में रहेंगे, उनकी कमी उन्हें खलेगी। लेकिन उनकी गिरफ्तारी ने केंद्र सरकार की मंशा को पूरी तरह से एक्सपोज कर दिया है। बदले की भावना से वैâसी सियासत की जा रही है, उसकी तस्वीर पूरा देश देख रहा है। इस पर अब दिल्ली के चुनावी पंडित कहने लगे हैं कि संजय की गिरफ्तारी विपक्षी पार्टियों के लिए अपार सहानुभूति देने का काम करेगी। ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा लोकसभा चुनाव से पूर्व किसी भी तरह से ‘इंडिया’ गठबंधन से जुड़ी पार्टियों को तितर-बितर करना चाहती है।
सियासत में एक कहावत खूब प्रचलित है कि ‘जिसमें जब किसी आंदोलन को कुचलना होता है तो उसकी अगुआई करनेवाले प्रमुख नेताओं को खत्म (गिरफ्तार करके अथवा बदनाम करके) कर दिया जाता है। इसके बाद आंदोलन में बाकी लोग थोड़ा बहुत शोर मचाकर खुद-ब-खुद शांत हो जाते हैं। भाजपा और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी कहावत को चरितार्थ करने में लगे हैं। प्रधानमंत्री हर तरह की रणनीति अपना रहे हैं, लेकिन विपक्षी भी कम नहीं, वो भी उनके सभी हथकंडों का करारा जवाब दे रहे हैं। केंद्र सरकार इस वक्त किसी को नहीं छोड़ रही है। विपक्षी नेताओं से लेकर पत्रकारों, अभिनेताओं तक पीछे पड़ी है। पिछले सप्ताह चीनी चंदा के आरोप में दिल्ली के कई नामचीन पत्रकारों के घरों पर छापेमारियां की, गिरफ्तारियां भी हुईं। जमकर विरोध हुआ और सरकार की थू-थू भी खूब हुई। ‘ईडी’ अब मायानगरी के लोगों के भी पीछे पड़ गई है। जहां एक नहीं बल्कि दर्जनों अभिनेताओं को समन भिजवाए हैं। कुल मिलाकर केंद्र सरकार सभी से दुश्मनी मोल ले ली है। ऐसा क्यों कर रही है, क्या है इसके पीछे की रणनीति? वो भी ऐन चुनाव के वक्त? यह थ्योरी किसी के पल्ले नहीं पड़ती। गौरतलब है कि वर्ष २०१४ से लेकर अभी तक जितनी भी छापेमारियां और गिरफ्तारियां जांच एजेंसियों द्वारा हुई, उनमें ९५ फीसदी विपक्षी लोग शामिल हैं। कुछ नेता बच गए, जो बीच भाजपा में चले गए।
बहरहाल, अगर बात संजय सिंह की गिरफ्तारी की करें, तो क्रोनोलॉजी समझ में नहीं आती। लेकिन गंदी राजनीति की बू जरूर आ रही है। अचानक संजय सिंह को ईडी ने आरोपी क्यों बनाया और बात गिरफ्तारी तक क्यों पहुंच गई? इसके पीछे एक वजह है? पूरी थ्योरी को अगर अच्छे से समझें तो काली राजनीति की एक गंदी तस्वीर सामने उभरी है। कुछ दिन पहले भाजपा ने टीडीपी को किनारे करके आंध्र प्रदेश की वाईएसआर पार्टी यानी सत्तारूढ़ जगन सरकार के साथ ही रहने का पैâसला किया। फिर मुख्यमंत्री जगन के करीबी और वाईएसआर के सांसद एमएस रेड्डी और उनके बेटे राघव को दिल्ली के ल्यूसिड केस से मुक्त कराने की डील हुई। डील के मुताबिक, जेल में बंद रेड्डी के बेटे राघव को ईडी का सरकारी गवाह बनाया जाएगा। कुछ दिन बाद यानी दो-तीन महीनों में राघव को जमानत मिल गई।
राघव के साथ बिजनेसमैन दिनेश अरोड़ा को भी ईडी का गवाह बनाने की आपस में डील फाइनल हुई। उसके बाद ३ अक्टूबर को दिल्ली की एक विशेष अदालत ने दिनेश अरोड़ा और राघव को ईडी का गवाह बनने की इजाजत दे दी। बस, यहीं से संजय सिंह की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हुआ। सरकारी गवाहों ने यह भी बयान दिया कि संजय सिंह ने उनको सिसोदिया और केजरीवाल से भी मिलवाया था। पटकथा का लेखन पानी की तरह साफ है। ३ अक्टूबर को अरोड़ा और राघव सरकारी गवाह बने और अगले ही दिन यानी ४ अक्टूबर को संजय सिंह के यहां छापेमारी हुई और बात गिरफ्तारी तक पहुंच गई। सारा गेम २४ घंटे के भीतर खेला गया। खेल ऐसा हुआ जिसे आम आदमी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व और संजय सिंह समझने में गच्चा खा गए। अंत में हुआ वही कि असली आरोपियों को राहत मिल गई और सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले नेता को पकड़कर जेल में डाल दिया गया। अब सवाल उठता है कि केंद्र सरकार का यह निर्णय कहीं उल्टा न पड़ जाए। संजय सिंह की गिरफ्तारी के बाद भाजपा भयभीत भी है।

डॉ. रमेश ठाकुर नई दिल्ली
(लेखक राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान, भारत सरकार के सदस्य, राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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