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राजधानी लाइव: पॉल्यूशन,पॉलिटिक्स और पब्लिक?

दिल्ली में पॉल्यूशन पर हो रही पॉलिटिक्स से पब्लिक बेहाल है। वह पॉल्यूशन और गंदी पॉलिटिक्स की मार एक साथ झेल रही है। फिलहाल नेताओं की आपसी तू-तू, मैं-मैं और गाल बजाने वाली सामूहिक राजनीति की पोल प्रदूषण ने खोल दी है। लगातार बढ़ता दम घोंटू प्रदूषण राजनीतिक दलों की सामूहिक विफलता की तस्वीर पेश कर रहा है, जिसे देखकर भी राजनेताओं को शर्म नहीं आ रही। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण की स्थिति गंभीर रूप धारण कर चुकी है। आसमान में धुंध के काले बादल छाए हुए हैं। लोगों को सांस लेने में दिक्कतें हो रही हैं। उनका दम घुट रहा है। अस्पताल सांस के मरीजों से खचाखल भरते जा रहे हैं। एम्स की चिकित्सीय रिपोर्ट के मुताबिक बीते तीन दिनों में विभिन्न अस्पतालों में मौत के आंकड़ों में तेजी से उछाल आया है। दिल्ली की स्थिति गंभीर ही नहीं, बल्कि बेकाबू हो गई है। प्रदूषण पर किसी तरह से काबू पाया जाए, उसके लिए दिल्ली सरकार पेड़ों से लेकर सड़कों की पानी से धुलाई करवाने में लगी है। जगह-जगह पानी का छिड़काव हो रहा है। ऐसे सभी प्रयास विफल हो रहे हैं। प्रदूषण घटने के बजाय बढ़ रहा है। एक्यूआई लेवल ५०० से भी ऊपर जा चुका है, जो अति गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है।
हालात ऐसे बन गए हैं, जिससे स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी हैं। बड़े-बुजुर्ग घरों में वैâद हैं। निर्माण कार्य से लेकर कल-कारखाने तक बंद कर दिए गए हैं। डीजल से चलने वाली कारों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। सरकार का आदेश है, जरूरी न हो तो लोग घरों से बाहर न निकलें। कई कार्यालयों में ताले जड़ दिए गए हैं। स्थिति मानों आपातकाल जैसे प्रतीत होने लगी हैं। बेकाबू प्रदूषण को लेकर जब पब्लिक मौजूदा सरकार से सवाल करती है, तो उनका जवाब भी दिलचस्प होता है। तर्क देते हैं, दिल्ली में प्रदूषण की जिम्मेदार पराली का जलाना, पेट्रोल और डीजल की गाड़ियां और कंस्ट्रक्शन से उड़ने वाली धूल है। जबकि इन पर प्रतिबंध लगाना या लगाम कसना सरकार की चुटकियों का खेल है। वायु प्रदूषण को लेकर अरविंद केजरीवाल गुजरे सालों तक पंजाब को दोष दिया करते थे। अक्टूबर के आखिरी दिनों और नवंबर की शुरुआत में प्रदूषण बढ़ने पर कहते थे कि पंजाब के किसान पराली जलाते हैं, जिसका धुआं दिल्ली में आकर प्रदूषण बन जाता है। ये तर्क तब दिया करते थे, जब पंजाब में कांग्रेस की हुकूमत होती थी। लेकिन अब उन्हीं की पार्टी की सरकार है इसलिए ये तर्क भी अब उनका गायब हो गया।
पॉल्यूशन को लेकर विपक्षी दल भाजपा ने आम आदमी पार्टी (आप) को घेरा हुआ है। प्रदूषण का जिम्मेदार केजरीवाल को बता रहे हैं। इस तरह के बयान मनोज तिवारी और डॉ. हर्षवर्धन ने दिए तो पलटवार करते हुए ‘आप’ के नेताओं ने कहा कि चलिए प्रदूषण कम करने का तरीका आप ही बता दीजिए, इस पर दोनों नेता शांत हो गए। इस पक्ष-विपक्ष की लड़ाई में दिल्ली की जनता बेवजह पिस रही है। जबकि ऐसे वक्त में राजनीति नहीं, बल्कि समस्या का समाधान सामूहिक प्रयासों से खोजना चाहिए। सभी को आपस में मिलकर विकल्प ढूंढ़ना चाहिए। लेकिन भाजपा ऐसा कतई नहीं करेगी। क्योंकि भाजपा इस फिराक में शुरू से ही है कि जनता जितनी केजरीवाल से परेशान होगी, उतना ही उन्हें राजनीतिक फायदा होगा। दरअसल, केजरीवाल को भाजपा ने इस समय चारों ओर से घेरा हुआ है। ‘ईडी’ जांच की तलवार उन पर लटकी हुई है। उनके प्रमुख नेता इस समय जेलों में बंद हैं। पूरी पार्टी बैकफुट पर है इसलिए केजरीवाल न सरकार पर ध्यान दे पा रहे हैं और न ही समस्याओं पर? पांच राज्यों में चुनाव हैं, समय निकालकर उन्हें वहां प्रचार के लिए भी जाना पड़ता है। दिल्ली की जनता इस समय रामभरोसे है। राजनेताओं ने उन्हें उनकी किस्मत पर छोड़ दिया है।
बढ़ते प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए केजरीवाल सरकार द्वारा निर्माण कार्यों जैसी कई गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने से जनता की मुसीबतों को और बढ़ा दिया है। निर्माण कार्यों में लाखों की संख्या में मजदूर लगे थे, वो अब बेरोजगार हो गए हैं। ये ऐसे मजदूर होते हैं, जो दिन में कमाते हैं तो ही रात का खाना उन्हें मिल पाता है। सभी मजदूर बेकार होकर अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। रेहड़ी-पटरी वाले भी परेशान हैं। ऑटोरिक्शा से लेकर छोटे काम-धंधे वाले भी बेहाल हैं। इन पर पॉल्यूशन और पॉलिटिक्स की संयुक्त रूप से दोहरी मार पड़ी है। बहरहाल, प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता दिखाई है। स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों से हलफनामा दाखिल कर ये बताने को कहा है कि वह वायु प्रदूषण को रोकन के लिए क्या उपाय कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी राज्यों को हफ्तेभर की मोहलत दी है। अगली सुनवाई ७ नवंबर को होनी है। देखना मुकर्रर तारीख पर ये सभी राज्य एक-दूसरे पर ही दोष मढ़ते हुए नजर आएंगे?

डॉ. रमेश ठाकुर नई दिल्ली
(लेखक राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान, भारत सरकार के सदस्य, राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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