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अयोध्या में रामलला रहेंगे सुरक्षित, मंदिर की ‘रक्षा’ करेगा महाराष्ट्र! …राज्य के जंगलों से आएगी सागौन की लकड़ी

• राम मंदिर में बनाए जाएंगे ४२ दरवाजे
सामना संवाददाता / अयोध्या
राम नगरी अयोध्या में रामलला के मंदिर का निर्माण तीव्र गति से हो रहा है। अब रामलला के इस मंदिर की ‘रक्षा’ करने और रामलला को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी महाराष्ट्र उठाने जा रहा है। असल में मंदिर को सुरक्षित रखने के लिए इस मंदिर में ४२ दरवाजे बनाए जानेवाले हैं। अब इन दरवाजों के लिए लकड़ी की तलाश महाराष्ट्र में आकर खत्म हुई है। महाराष्ट्र के जंगलों से सागौन की लकड़ी लाई जाएगी और उससे मंदिर के लिए ४२ दरवाजे बनाए जाएंगे।

मिली जानकारी के अनुसार मंदिर में लगनेवाले ४२ दरवाजों के लिए तकरीबन १,७०० घनफीट लकड़ी लगेगी। लकड़ी की खरीदारी जल्द पूरी किए जाने की संभावना है। महाराष्ट्र के कारीगर ही इन लकड़ियों से दरवाजे तैयार करेंगे। सूत्रों की मानें तो भगवान रामलला के मंदिर का निर्माण कार्य ४० फीसदी से ज्यादा पूरा हो चुका है। मंदिर के प्रत्येक तल पर लगनेवाले हर दरवाजे की ऊंचाई ९ फीट व चौड़ाई सात फीट है। इन दरवाजों पर विशेष तरह की आकृतियां होंगी, जैसे कलश, सूर्य, चक्र, शंख, गदा और विविध फूल। राम मंदिर तीन तल का होगा। इसके प्रत्येक तल पर १४-१४ दरवाजे होंगे।

इस समय प्लिंथ का कार्य पूरा होने के साथ ही गर्भगृह के अतिरिक्त हिस्से में राजस्थान के गुलाबी गढ़े हुए पत्थरों से सुपर संरचना का निर्माण प्रारंभ हो गया है। गर्भगृह में निर्मित किए जानेवाले छह खंभों का निर्माण भी शुरू है। ये मकराना के संगमरमर से बनाया जा रहा है। संगमरमर के खंभेनुमा पीस को एक-दूसरे में जोड़कर तैयार किया जा रहा है। ये खंभे १९.३ फीट ऊंचे होंगे। ट्रस्ट के एक सदस्य ने बताया कि इसके अतिरिक्त मुख्य मंदिर के गर्भगृह में फर्श, मेहराब, रेलिंग, दरवाजे के प्रâेम सफेद मकराना के संगमरमर से ही तैयार किए जाएंगे। इनकी खरीद व गढ़ाई शुरू है। गर्भगृह की दीवारों पर भीतर की ओर पंजाब की छिद्रयुक्त विशेष र्इंटें प्रयुक्त की जा रही हैं। इसमें ११ लाख र्इंटें लगेंगी। इसके प्रयोग से गर्भगृह में धूप का प्रभाव कम होगा और हमेशा ही शीतलता बनी रहेगी।

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