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वाराणसी में तेजी से बढ़ता गंगा का जलस्तर!  …बदलना पड़ा गंगा का आरती स्थल, श्मशान घाटों पर भी बढ़ी दुश्वारियां

उमेश गुप्ता / वाराणसी। कुछ दिनों से गंगा नदी का जलस्तर बढ़ते-बढ़ते अब घाट के ऊपर एक-एक सीढ़ियां चढ़ना शुरू कर दिया था। अब नदी की धारा में बढ़ाव के बाद पहले पंडों और तीर्थ पुरोहितों ने अपने बस्तों को घाट के ऊपर तीन दिनों पूर्व ही कर लिया था। अब मंगलवार को दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती स्थल में भी बदलाव करना पड़ा। मंगलवार की शाम से गंगा सेवा निधि की ओर से बाढ़ के खतरों को देखते हुए गंगा आरती स्थल से पीछे कर लिया है। जिसकी वजह से सीजन में पहली बार गंगा आरती स्थल बदला गया है।

वाराणसी में प्रतिदिन गंगा सेवा निधि द्वारा दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध मां गंगा की नैत्यिक आरती का स्थान जलस्तर बढ़ने के कारण बदलना पड़ा। चबूतरे के बजाय प्लेटफार्म पर ही मंगलवार को गंगा आरती का आयोजन करना पड़ा। फिलहाल गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है तो दूसरी ओर घाट पर एक-एक सीढ़ियां चढ़ती गंगा का रुख अब तल्खी की ओर है। माना जा रहा है कि गंगा का जलस्तर और बढ़ा तो प्लेटफॉर्म के पीछे सीढ़ियों पर गंगा आरती की व्यवस्था करनी पड़ेगी। इसके साथ ही आरती में बैठने की जगह भी कम होती जाएगी।

गंगा आरती स्‍थल में बदलाव के बाद अब महाश्‍मशान की राह भी बदलने वाली है। बाबा दरबार आनेवाले गंगा घाट पर जा रहे हैं लेकिन आस्‍था के सावन के बीच गंगा का जलस्‍तर बढ़ने के बीच दुश्‍वारियों ने सिर उठाया है। तटवर्ती इलाकों में बाढ़ की स्थिति होने से लोगों में चिंता बढ़ रही है। दरअसल प्रतिवर्ष गंगा में बाढ़ की वजह से हरिश्‍चंद्र घाट के अलावा मणिकर्णिका घाट पर भी चिताओं के घाट के ऊपर या छत पर जलाने की परंपरा शुरू हो जाती है। शवों की कतार अधिक रही तो गलियों में भी चिताएं सजने लगती हैं।

वाराणसी में अब गंगा का जलस्‍तर बढ़ने की वजह से सभी प्रमुख घाटों का आपसी संपर्क टूट चुका है तो दूसरी ओर गंगा का वेग और बढ़ा तो जल्‍द ही गंगा में नौका संचालन पर भी रोक लगाने की तैयारी है। फ‍िलहाल गंगा में रात में नौका विहार पर ही अभी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। अगर जलस्‍तर लगातार ऐसे ही बढ़ता रहा तो बाढ़ की सूरत बनते ही गंगा में नौका संचालन रोक दिया जाएगा।
वाराणसी में केंद्रीय जल आयोग द्वारा राजघाट से प्राप्‍त आंकड़ों के अनुसार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्‍तर 63.8 मीटर था। गंगा का जलस्‍तर 70.262 मीटर पर चेतावनी और 71.262 खतरा बिंदु है। बीते चौबीस घंटों में 3.4 मिमी तक बारिश दर्ज की गई है तो दूसरी ओर 30 मिमी प्रति घंटे की गति से गंगा में जलस्‍तर बढ़ रहा है। गंगा में बढ़ाव का रुख होने की वजह से अब प्रतिदिन करीब एक सीढ़ी तक घाट पर पानी चढ़ने लगा है। ऐसे में गंगा का जलस्‍तर अब दिन प्रतिदिन चुनौती देने लगा है। माना जा रहा है कि अगस्‍त के पहले पखवारे तक गंगा का रुख और भी तल्‍ख हो जाएगा।

वाराणसी में जहां गंगा का रुख चुनौती की ओर है तो दूसरी ओर पूर्वांचल के अन्‍य जिलों में सरयू नदी का जलस्‍तर लगातार बढ़ रहा है। मऊ, आजमगढ़ और बलिया जिले में सरयू का जलस्‍तर बढ़ रहा है। बारिश की सूरत लगातार बनी रहने के बीच अगस्‍त के पहले सप्‍ताह में बाढ़ की स्थिति पूर्वांचल में साफ नजर आने लगेगी। इसकी वजह से तटवर्ती इलाकों में कटान के साथ ही बाढ़ से फसलों को नुकसान तय है। हालांकि, बाढ़ पर निगरानी के साथ ही राहत और बचाव कार्य पर भी नजर रखी जा रही है।

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