मुख्यपृष्ठसमाचारदूर हुआ दुर्लभ दिल का दर्द... तंदुरुस्त हुआ मुंबई में मिला रोगी

दूर हुआ दुर्लभ दिल का दर्द… तंदुरुस्त हुआ मुंबई में मिला रोगी

-कार्डियक सारकॉइडोसिस और टीबी से था पीड़ित

-एशिया में चपेट में आते हैं १० लाख में से पांच लोग

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई

मुंबई में एक ऐसा मरीज मिला है, जो दिल की बीमारी सारकॉइडोसिस और ट्यूबरक्लोसिस से जूझ रहा था। इस बीमारी का पता चलने के बाद पहले तो चिकित्सक भी हैरान रह गए, लेकिन उन्होंने बिना देर किए मरीज का इलाज शुरू कर दिया। फिलहाल, रोगी में मिले दुर्लभ दिल के दर्द और फेफड़ों की टीबी को दूर करते हुए उसे पूरी तरह से तंदुरुस्त कर दिया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि एशिया में १० लाख में से किसी एक को दोनों ही बीमारियां एक साथ होती हैं। इस सूची में इस मरीज का नाम भी शामिल हो गया है।
मुंबई निवासी बैंक कर्मचारी राज गोरसा जिस समय काम कर रहे थे, तभी उन्हें सीने में तेज दर्द उठा। उन्हें अत्यधिक घबराहट होने लगी और बेहोशी की कगार पर जाने लगे थे। इन शिकायतों के साथ उन्हें १० नवंबर २०२३ को मुंबई के जसलोक अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लाया गया। जांच में डॉक्टरों ने पाया कि मरीज को बार-बार वेंट्रीकुलर टैकीकार्डिया पड़ रहा था, जो दिल की धड़कन में पाए जानेवाला एक खतरनाक विकार है। हालांकि, दवाइयां देने के बाद भी हालत में सुधार नहीं हो रहा था। इसलिए कार्डियक टीम ने एक ऑटोमेटेड इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर इम्प्लांटेशन करने का निर्णय लिया। इस बीच किए गए अन्य परीक्षणों में पता चला कि उसके दिल की बीमारी के कारण टीबी और कार्डियक सारकॉइडोसिस हैं। यह हृदय की मांसपेशियों को प्रभावित करनेवाली एक दुर्लभ सूजन वाली बीमारी है। इस तरह का मामला बहुत दुर्लभ होता है। फिलहाल, मरीज में इन बीमारियों का पता चल चुका था। अस्पताल के मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम का नेतृत्व डॉ. अश्विन मेहता ने किया और इस टीम में डॉ. राहुल छाबरिया, डॉ. उपेंद्र भालेराव समेत कई वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम ने हिस्सा लिया और मरीज को नई जिंदगी दी।
दुनिया में मिलते हैं बहुत कम मामले
मुख्य कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राहुल छाबरिया ने कहा कि मायोकार्डियल ट्यूबरक्लोसिस एक अत्यधिक दुर्लभ एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी है, जिसके दुनिया में बहुत कम मामले सामने आए हैं। सारकॉइडोसिस एक मल्टी सिस्टम ग्रैनुलोमेटस इंफ्लेमेटरी डिजीज है, जिसमें अज्ञात इटियोलॉजी के नॉन-केसेटिंग ग्रैनुलोमा (प्रोटीन की गांठ) बन जाते हैं। सारकॉइडोसिस हृदय का एक दुर्लभ रोग है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली अत्यधिक प्रतिक्रियाशील हो जाती है और हृदय की मांसपेशियों में ऊतकों की गांठ बन जाती हैं।
सर्जरी भी है दुर्लभ
मरीज वेंट्रीकुलर टैकीकार्डिया से पीड़ित था। उसके दिल की धड़कन सामान्य करने के लिए एआईसीडी से कई झटके दिए गए थे। इसके अलावा उसकी हृदय गति को नियंत्रित करने के लिए सर्जिकल विकल्पों का परामर्श दिया गया। इसके बाद उसकी बाइलेटरल थोरेकोस्कोपिक सिम्पैथेक्टोमी की गई। इस प्रक्रिया में हृदय गति को नियंत्रित करनेवाली नसों को काटा जाता है। मरीज का ऑपरेशन थोरेकोस्कोपिक मिनिमली इनवेसिव तकनीक द्वारा किया गया, जो दुर्लभ सर्जरी है। यह हृदय गति को नियंत्रित करने का अंतिम उपाय है।

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