मुख्यपृष्ठनए समाचारध्वनि तरंगों से भागेंगे चूहे! ...प्रायोगिक तौर पर होगा तकनीक का प्रयोग

ध्वनि तरंगों से भागेंगे चूहे! …प्रायोगिक तौर पर होगा तकनीक का प्रयोग

• योजना की सफलता पर उठने लगे हैं सवाल
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
सरकारी अस्पतालों में चूहों और बिल्लियों का आतंक हमेशा से रहा है। इन चूहों के चलते मरीजों को भी कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, मनपा ने दावा किया है कि इनसे मुक्ति पाने के लिए उसने तोड़ निकाल लिया है। इसके तहत अब चूहों को भगाने के लिए मनपा अस्पतालों में उच्च ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया जाएगा। फिलहाल, इस तकनीक का इस्तेमाल प्रायोगिक तौर पर शुरू है। इसमें सफलता मिलने के बाद चूहों के प्रकोप वाले स्थानों पर इस तकनीक का उपयोग किए जाने का पैâसला किया गया है। इसके लिए प्रत्येक अस्पताल में एक समिति गठित की जाएगी, जो इस तकनीक का परीक्षण करेगी। हालांकि, इस पर अभी से सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अस्पतालों में चूहों को मारने के लिए अभी तक कई योजनाएं चलाई गई हैं, लेकिन उसमें खास सफलता नहीं मिली है। ऐसे में इस योजना के सफल होने की कम ही संभावना लगाई जा रही है।
उल्लेखनीय है कि मुंबई मनपा के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. सुधाकर शिंदे को जब से स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी मिली है, तभी से वे अस्पतालों में सुविधाओं और साफ-सफाई की समीक्षा कर रहे हैं, जिसमें उन्हें साफ-सफाई की कमी मिली। इसी दौरान उन्हें अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में चूहे, कुत्ते, बिल्ली आदि दिखाई दिए हैं। इसके बाद अतिरिक्त आयुक्त डॉ. शिंदे ने कीटनाशक विभाग को अस्पताल की साफ-सफाई पर जोर देने के साथ ही अस्पतालों में चूहों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। कीटनाशक विभाग की ओर से चलाए गए अभियान के पहले चरण में ८०० और दूसरे चरण में ७०० से अधिक चूहे मारे गए, लेकिन यह प्रक्रिया परेशानी भरी है। इसलिए मुंबई मनपा द्वारा अस्पताल परिसर से चूहों को भगाने के लिए उच्च ध्वनि तरंगों का उपयोग करने का निर्णय लिया गया है। इस तकनीक का उपयोग करने के लिए प्रत्येक अस्पताल में एक समिति बनाई जाएगी। यह समिति इस तकनीक का परीक्षण करेगी। यदि यह परीक्षण सफल रहा तो इसका उपयोग मनपा के सभी प्रमुख अस्पतालों, उपनगरीय अस्पतालों, दवाखानों और प्रसूति अस्पतालों में किया जाएगा।
इस तरह काम करती हैं उच्च ध्वनि तरंगें
चूहों को तेज ध्वनि तरंगें पसंद नहीं होती हैं इसलिए ध्वनि तरंगें उत्सर्जित होते ही चूहे उस क्षेत्र से भाग जाते हैं। ध्वनि तरंगें न केवल चूहों को बल्कि मच्छरों, मक्खियों और तिलचट्टों को भी दूर रखती हैं। ध्वनि तरंगें पर्यावरण की दृष्टि से भी सुरक्षित हैं। इससे चूहों और कीड़ों को बिना मारे ही अस्पताल परिसर से बाहर भगाया जा सकेगा।
संदेह के घेरे में योजना की सफलता
मुंबई मनपा चूहों, आवारा कुत्तों और बिल्लियों के साथ ही मच्छरों की तादाद कम करने के लिए अब तक कई तरह की योजनाएं चला चुकी है। इसमें कुत्तों और बिल्लियों की आबादी को कम करने के लिए नसबंदी के साथ ही मच्छरों को मारने के लिए कीटनाशकों का इस्तेमाल, धुएं मारने के साथ ही चूहों को मारने के लिए कृंतकनाशकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इतना ही नहीं, इन्हें पकड़ने के लिए चूहेदानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बावजूद न तो चूहे, बिल्ली और कुत्तों की जनसंख्या पर कंट्रोल हुआ है और न ही बीमारियां कम हुई हैं। ऐसे में मनपा द्वारा चूहे भगाने के लिए प्रायोगिक तौर पर शुरू किए गए उच्च ध्वनि तरंग कितना कारगर साबित होती है ये समय बताएगा।

अन्य समाचार