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मुसीबतों में कोइलरी शिक्षक… शिवसेना ने उठाई संसद में आवाज, मिनिमम वेजेस देने की मांग

सामना संवाददाता / मुंबई। कोल इंडिया के अधीन चलनेवाले स्कूलों में पढ़ानेवाले शिक्षक मुसीबत में हैं। दुर्दशा और उपेक्षा का दंश झेल रहे इन शिक्षकों की आवाज शिवसेना ने संसद में उठाई। शिवसेना सांसद संजय राऊत ने राज्यसभा में यह मुद्दा उठाया और मांग की कि सरकार इन शिक्षकों की व्यथा पर ध्यान दे और उन्हें मिनिमम वेजेस के तहत वेतन दिया जाए। राऊत ने मांग की है कि इन शिक्षकों को १६वीं लोकसभा की स्थायी समिति कोल की १४वीं रिपोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य सरकार के शिक्षकों के बराबर वेतन दिया जाए।
संजय राऊत ने कहा कि कोयला खदान शिक्षक एसोसिएशन के नेतृत्व में शिक्षक अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनकी मामूली मांग है। उन्हें मिनिमम वेजेस नहीं मिल रहा है। उनका वेतन ठेके पर काम करनेवाले श्रमिकों के बराबर भी नहीं है। शिक्षकों का अमानवीय शोषण हो रहा है। कोल इंडिया के अधीन बीसीसीएल, एमसीएल, आईसीएल, सीसीएल इत्यादि कॉर्पोरेशन काम करते हैं। उनके माध्यम से पिछले ४० से ४५ साल से स्कूल चलाए जा रहे हैं। इन स्कूलों में लगभग २ हजार शिक्षक गरीब कोल कर्मियों के बच्चे पढ़ते हैं। ये शिक्षक बच्चों को मुफ्त शिक्षा देते हैं। उन शिक्षकों को मात्र ४ से ५ हजार रुपए वेतन मिलता है। वह भी ६ से ७ महीने देरी से वेतन दिया जाता है। शिक्षक और उनका परिवार भूखा रहेगा तो वह वैâसे बच्चों को पढ़ाएगा? संजय राऊत ने कहा कि कोल इंडिया में पैसा पानी की तरह बहाया जाता है। एक तरफ शिक्षकों को मिनिमम वेजेस नहीं मिल रहा है तो दूसरी तरफ कोल इंडिया के कमर्शियल एजुकेशन इंस्टिट्यूट को करोड़ों रुपए बांटा जा रहा है। पिछले ५ साल में कोल इंडिया ने लगभग २,००० करोड़ रुपए सीएसआर के तहत खर्च किया है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत लाखों-करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। लेकिन ये शिक्षक जो कोल कर्मियों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देते हैं वे उपेक्षित हैं।

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