मुख्यपृष्ठनए समाचार‘बौना’ बन गया रावण! ... महंगाई के कारण आयोजकों ने कद घटाया

‘बौना’ बन गया रावण! … महंगाई के कारण आयोजकों ने कद घटाया

•  ४० फीसदी महंगा हो गया है पुतले का निर्माण

जितेंद्र मल्लाह / मुंबई
आज दशहरा है। आज के दिन बुराई के प्रतीक रावण का दहन किया जाता है। पर महंगाई के इस दौर में बीते तीन वर्षों में दशानन ‘श्रृंकफ्लेशन’ का शिकार हो रहा है अर्थात पुतले की लागत स्थिर रखने के लिए लोग पुतले की साइज कम कर उसे बौना बना और उसमें लगाए जानेवाले सामान से समझौता करके किसी तरह रावण दहन की परंपरा को निभा रहे हैं। बता दें बुराई यानी रावण पर अच्छाई यानी मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की जीत की खुशी में हर साल दशहरे पर रावण का पुतला जलाया जाता है। इस साल दशहरा पर्व आज ५ अक्टूबर को मनाया जा रहा है।
मुंबई में खार-पश्चिम स्थित एस वी रोड, सांताक्रुज-पश्चिम के खोतवाड़ी स्थित धर्मवीर संभाजी मैदान सहित कई जगहों पर वर्षों से रावण दहन का कार्यक्रम किया जाता है। लेकिन इनमें से लगभग सभी जगहों पर रावण का आकार बीते कुछ वर्षों से घटता जा रहा है। उसमें पटाखे वगैरह की मात्रा भी कम होती जा रही है। रामलीला के लिए बननेवाले रावण के पुतलों के निर्माण की औसत लागत ही ३० से ६० हजार रुपए तक पहुंच गई है। बीते दो तीन वर्षों की तुलना में रावण के पुतले के निर्माण का खर्च इस बार ४०-६० फीसदी बढ़ गया है। करीब तीन साल पहले तक २५ फीट का रावण करीब २० से २५ हजार रुपए के बीच बन जाता था, जो इस बार ३५ से ४० हजार के बीच बन रहा है। बड़े पुतलों में १२ फीट का जो पुतला ८ हजार रुपए में तैयार होता था, उसकी कीमत इस साल १५ हजार तक पहुंच गई है। सांताक्रुज-पश्चिम धर्मवीर संभाजी मैदान पर रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन करनेवाले उत्तर भारतीय विश्व महासंघ के अध्यक्ष योगेश पांडे और महासचिव संजय मिश्रा के अनुसार इस साल ३० फुट के बजाय २६ फुट के रावण के पुतले पर उन्हें करीब ७० हजार रुपए खर्च करने पड़े हैं, जिसमें से करीब ३५ हजार रुपए कागज, बांस, पटाखे आदि पर खर्च हुए हैं तो वहीं लगभग उतने ही रुपए रावण के निर्माण की मजदूरी और रख-रखाव पर भी खर्च हुए हैं। मांग और मुनाफा कम होने जबकि सामग्री और मजदूरी बढ़ने से कारीगर व ठेकदार मायूस हैं।

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