मुख्यपृष्ठस्तंभउम्मीद की किरण : मायावती का जज्बा, बीमारियों को हराया

उम्मीद की किरण : मायावती का जज्बा, बीमारियों को हराया

धीरेंद्र उपाध्याय

कहते हैं कि मनुष्य के भीतर ऊर्जा का असीम स्रोत है लेकिन वह कभी यह विश्वास नहीं कर पाता है। मनुष्य अगर ठान ले तो इस ऊर्जा की बदौलत कुछ भी कर सकता है। यदि मनुष्य अपनी मन की गहराइयों में जाए तो वह अपनी शक्तियों को पहचानकर और उनका इस्तेमाल करके असंभव कार्य को भी संभव कर सकता है। वह चाहे कोई विकट कार्य करने की बात हो अथवा किसी गंभीर बीमारी को मात देने की बात ही क्यों न हो! कुछ ऐसा ही ९९ वर्षीय बुजुर्ग महिला मायावती तांबे के साथ भी हुआ। इतनी उम्रदराज होने के बाद भी उन्होंने अपने जज्बे से कई बीमारियों को हरा दिया। मायावती के साथ कई हादसे हुए। लेकिन एक हादसे ने उनके जीवन के लिए संकट पैदा कर दिया। वे गांव में अचनाक गिर गई थीं, जिसके चलते उनके पीठ में तेज दर्द शुरू हुआ। इसके बाद वे एक दिन अचानक बिस्तर पर गिर पड़ीं। उनमें उठने तक की हिम्मत नहीं बची थी। इसके बाद परिजन बिना देर किए उन्हें इलाज के लिए मुंबई के जसलोक अस्पताल लेकर पहुंचे। उस समय उनका वजन किया गया तो वे महज २६ किलो की ही थीं। इसके साथ ही वे बहुत कमजोर भी हो चुकी थीं। हालांकि, बीमार होने के पहले वे आपना पूरा काम कर लिया करती थीं। जांच में अस्पताल के डॉक्टरों ने पाया कि बुजुर्ग महिला की रीढ़ की हड्डी में प्रैâक्चर था। ९९ वर्षीय इस महिला को बैक्टीरियल निमोनिया हो गया था, जिसके चलते उन्हें सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। इसलिए उन्हें बेहतरीन देखभाल के लिए आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। इसके साथ ही
डॉक्टरों ने उनकी एंटीबायोटिक डोज भी बढ़ा दी। इस बीच हार्ट वाल्व अथवा इस तरह के किसी भी इंफेक्शन की भी जांच की गई। कार्डियोलॉजी सलाहकार डॉ. निकेश जैन ने एक ट्रांस ईसो फेfिजयल ईको कार्डियोग्राम (टीईई) किया। इसके पोषण आहार शुरू होने से इंफेक्शन कंट्रोल में रहा और हालत में सुधार हुआ। हालांकि, जैसे-जैसे उनकी हालत में सुधार हुआ, फेफड़े में मांस का पता चला। इसके बाद इमेजिंग और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के निदेशक डॉ. श्रीनिवास देसाई ने सीटी स्वैâन के जरिए फेफड़ों के मास की बायोप्सी की, जिसमें वैंâसर का पता चला। इस बीमारी का इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. रीतू जैन कर रही हैं। डॉ. कोठारी ने कहा कि मायावती के इलाज के बाद सीमेंट ऑग्मेंटेशन (वर्टेब्रोप्लास्टी) नामक मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी की गई, जिसमें मेडिकल ग्रेड पीएमएमए सीमेंट के साथ स्पाइनल प्रैâक्चर वाली जगह की मरम्मत की गई। रोगी की उम्र और चिकित्सीय समस्याओं को देखते हुए यह उचित विकल्प था।
बैक्टीरियल इंफेक्शन से लड़नेवाली पहली उम्रदराज महिला
कंसल्टेंट क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. श्रुति टंडन ने कहा कि ९९ साल की उम्र में मायावती संभवत: सबसे उम्रदराज आईसीयू रोगियों में से एक हैं, जिन्होंने ऑर्गन सपोर्ट की आवश्यकता के बिना गंभीर बैक्टीरियल इंफेक्शन से लड़ाई लड़ी है। अपनी आप बीती बताते हुए मायावती तांबे ने कहा कि गिरने के बाद बिस्तर पर एक सप्ताह बहुत निराशाजनक था, क्योंकि मैं हर चीज के लिए अपने बेटे और दूसरों पर निर्भर थी। डॉक्टरों के प्रयासों से मुझे मेरा पहले जैसा स्वतंत्र जीवन वापस मिल गया है।

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