मुख्यपृष्ठनए समाचारउम्मीद की किरण : महिला की जान ले सकती थी अंगों की...

उम्मीद की किरण : महिला की जान ले सकती थी अंगों की उल्टी दिशा!

धीरेंद्र उपाध्याय

सांताक्रुज-पूर्व के वीएन देसाई अस्पताल में एक ३५ वर्षीय महिला को भर्ती कराया गया था। मोटापे से ग्रस्त ये महिला पेट दर्द से परेशान थी। नियमित चिकित्सा जांच से पता चला कि महिला पित्ताशय की सूजन और पित्ताशय में कई पथरी के कारण पेट दर्द से पीड़ित थी। जांच में पता चला कि महिला के शरीर में एक दुर्लभ अंग की संरचना देखी गई, जो मानव शरीर के विपरीत था।
चिकित्सकीय शब्दों में इसे `सिटस इनवर्सस टोटलिस’ कहा जाता है। इस स्थिति का मतलब है कि व्यक्ति के अंग सामान्य मानव शरीर रचना के विपरीत दिशा में हैं। यह एक दुलर्भ जन्मजात स्थिति है, जिसके सामान्यत: ०.०१ फीसदी मामले ही सामने आते हैं। पेट दर्द से जूझ रही इस महिला की शारीरिक संरचना में पेट के सभी अंग बार्इं ओर थे। दिल दाहिनी ओर था, लीवर दाहिनी ओर की बजाय बार्इं ओर था, आंत दाहिनी ओर की बजाय बार्इं ओर थी। साथ ही पित्ताशय भी बार्इं ओर था। इन सभी जटिलताओं के बीच अस्पताल में चिकित्सकों की टीम ने महिला को नया जीवन दिया।
महिला की जान बचानेवाले चिकित्सकों का कहना है कि उसमें पित्ताशय की थैली दार्इं ओर होने के बजाय बार्इं ओर थी। यदि समय रहते महिला की लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी सर्जरी कर उसके पित्ताशय को नहीं हटाया जाता तो उसकी मौत तक हो सकती थी। फिलहाल, यह सर्जरी किसी चुनौती से कम नहीं थी। पित्ताशय की सूजन और पथरी के कारण इस महिला को सर्जरी करानी पड़ी। हालांकि, `सिटस इनवर्सस टोटलिस’ एक महिला की सर्जरी को जोखिम भरा और जटिल बना देता है। इस बीच मोटापा और फेफड़ों की नाजुक हालत डॉक्टरों के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो गई। करीब आठ दिनों के बाद महिला की हालत स्थिर होने के बाद उसे छुट्टी दे दी गई।
अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विद्या ठाकुर, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हरबंश सिंह बावा के मार्गदर्शन में सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर दीक्षित और उनकी सहयोगी डॉ. रितु नंदिनीकर, डॉ. राहुल माहेश्वरी, एनेस्थेटिस्ट डॉ. किरण, डॉ. प्रियंका जगावकर की टीम ने टेलीस्कोप की मदद से लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी को बहुत ही कुशलता से किया। डॉ.सुधीर दीक्षित ने बताया कि अब इस महिला की हालत ठीक है।

अन्य समाचार