मुख्यपृष्ठखबरेंउम्मीद की किरण : खत्म हो चुकी थी जीने की आशा!

उम्मीद की किरण : खत्म हो चुकी थी जीने की आशा!

धीरेंद्र उपाध्याय

यूपी के मुरादाबाद जिले के रहनेवाले ४७ वर्षीय मोहम्मद वारिस के दिल में जन्मजात एक दुर्लभ बीमारी थी, जिसके बारे में उसे जानकारी नहीं थी। वारिस ने बताया कि मेरे सीने में अक्सर तेज दर्द हुआ करता था, जिसे मैं नजरअंदाज कर दिया करता था। जब दर्द शुरू होता था तो मेरे दैनिक कार्यों में भी अड़चन पैदा होती थी। चार साल पहले यह समस्या और बढ़ गई। साथ ही पता चला कि वे एनजाइना के भी शिकार हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि कुछ महीनों तक वे झेलते रहे, लेकिन जब दर्द बर्दाश्त से बाहर हो गया तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया और चिकित्सकों की राय पर तमाम सुझाए गए मेडिकल टेस्ट कराने शुरू कर दिए।
मेडिकल टेस्ट की रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उनकी लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग आर्टरी (एलएडी) में मायोकार्डियल ब्रिज फंक्शन में रुकावट है। इसके बाद चिकित्सकों की सलाह पर ही उनकी दो बार कोरोनरी एंजियोग्राफी हुई। इसके बावजूद उन्हें राहत मिलती हुई नहीं दिखाई दे रही थी। इस बीच उन्होंने जीने की आशा खो दी थी। जो थोड़ी बहुत उम्मीद बची भी थी वो उस समय समाप्त हो गई, जब उन्हें अचानक हल्का दिल का दौरा पड़ा। इससे उनकी हालत और बिगड़ती चली गई। हालांकि, इस बीच करीबी लोगों द्वारा सुझाए जाने के बाद मुंबई के लीलावती अस्पताल में घरवालों ने भर्ती करा दिया। इसके बाद अस्पताल में डीरूफिंग मायोटॉमी और कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी की गई। इस सर्जरी के बाद उन्हें नई जिंदगी मिली है।
कार्डियक सर्जन डॉ. पवन कुमार ने कहा कि मरीज को नवंबर के दूसरे सप्ताह में सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकीय जांच में मरीज को मायोकार्डियल ब्रिज नामक जन्मजात हृदय दोष का पता चला। यह स्थिति तब धमनी पर दबाव पैदा कर सकती है, जब हृदय धड़कन के साथ ही रक्त प्रवाह बाधित होता है। इससे सीने में दर्द, हृदय की मांसपेशियों में रक्त की आपूर्ति में कमी, दिल का दौरा, अनियमित दिल की धड़कन और यहां तक कि दिल का दौरा पड़ने से अचानक मौत भी हो सकती है। यह स्थिति बायीं धमनी पर सबसे अधिक दबाव डालती है। एंजियोग्राफी के दौरान देखे गए दो फीसदी से छह फीसदी मामलों में सीने में दर्द जैसे लक्षण होते हैं। आमतौर पर हृदय की मांसपेशियों की किसी भी असामान्यता की पहचान करने के लिए सीटी स्कैन, कोरोनरी एंजियोग्राफी, और इंट्राकोरोनरी डॉपलर और एंजियोग्राफी के साथ-साथ रक्त प्रवाह मूल्यांकन का उपयोग किया जाता है। डॉ. कुमार ने कहा कि ७० फीसदी मामलों में मायोकार्डियल ब्रिजिंग एथेरोस्क्लेरोसिस या ब्लॉकेज के साथ शुरू या समाप्त होती है, जो हार्ट अटैक का कारण बनता है। इस मामले में मायोकार्डियल ब्रिज और कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी पर डीरोफिंग मायोटॉमी प्रक्रिया की गई। कोरोनरी धमनियों में मायोकार्डियल ब्रिज एक सामान्य असामान्यता है और इसका इलाज चिकित्सकों द्वारा किया जाता है। ज्यादातर समय इसके लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। यदि मरीजों में लक्षण मौजूद हों तो इसे नजरअंदाज न करते हुए समय रहते सर्जिकल विकल्प पर विचार करना जरूरी है। इस स्थिति वाले रोगियों में आमतौर पर स्टेंट एंजियोप्लास्टी की जाती है। हालांकि, शारीरिक गतिविधि के दौरान हृदय की मांसपेशियों के निरंतर संकुचन और पैâलाव के कारण ये स्टेंट अक्सर मायोकार्डियल ब्रिज के भीतर टूट जाते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में एंजियोप्लास्टी से बचना चाहिए।

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