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आरबीआई दे सकती है झटका… अगले महीने फिर बढ़ेगी रेपो रेट

सामना संवाददाता / मुंबई
पिछले आठ वर्षों से अच्छे दिनों की आस लगा रही जनता को केंद्र  में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपाई सरकार नियमित अंतराल पर झटका देती रही है। कोरोना काल में रोजगार की समस्या का सामना कर रहे लोगों के जख्मों पर मोदी सरकार मिर्च मलने का काम कर रही है। पहले पेट्रोल-डीजल फिर सीएनजी-पीएनजी, रसोई गैस एवं बाद में जीएसटी की नई दरें लागू करके महंगाई की आग में तेल डालने का काम केंद्र सरकार ने किया है। इसी दौरान रेपो रेट बढ़ा कर कई बार लोगों के कर्ज का बोझ बढ़ाने वाला रिजर्व बैंक एक बार फिर तैयार हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक एक बार फिर रेपो रेट में बढ़ोतरी का एलान कर सकता है, जिससे ब्याज दरें बढ़ने की संभावना है।
बता दें कि आरबीआई अगले सप्ताह होने वाली एमपीसी मीट में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का एलान कर सकती है। आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि आरबीआई नीतिगत रेपो दरों में ०.३५ फीसदी तक की बढ़ोतरी कर सकता है। ३ से ५ अगस्त तक होनेवाली मौद्रिक नीति समिति के प्रस्ताव से पहले एक रिपोर्ट में बोफा सिक्योरिटीज ने कहा कि आरबीआई नीतिगत रुख में बदलाव करके ‘कैलिब्रेटेड सख्ती’ करके ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। आरबीआई ने पिछली दो नीतिगत बैठकों में महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में कुल ०.९० फीसदी की वृद्धि की है। अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी ‘बोफा सिक्योरिटीज’ की एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है। बोफा सिक्योरिटीज ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि हम देख रहे हैं कि आरबीआई अपनी मौद्रिक समिति की बैठक में रेपो रेट में ०.३५ फीसदी की बढ़ोतरी करने जा रहा है, जो इसे बढ़ाकर ५.२५ फीसदी कर देगा, जो कि कोरोना महामारी आने से पहले के स्तर से कहीं ज्यादा है। इसमें कहा गया है कि एमपीसी वित्त वर्ष २०२२-२३ में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति और वास्तविक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर के अनुमान को क्रमश: ६.७ प्रतिशत और ७.२ प्रतिशत पर बरकरार रख सकती है।

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