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पाठकों की रचनाएं : शंखनाद कर जोर से बोलो, बोलो वंदे मातरम् !!

शंखनाद कर जोर से बोलो, बोलो वंदे मातरम् !!
लहराएगा अमर तिरंगा, लहर लहर लहराएगा,
आंधी-तूफानों से लड़कर नभ पर जा छा जाएगा,
बोलो बंदे जोर से बोलो-बोलो वंदे मातरम्,
लाल किले की शोभा है ये भारत मां की शान है,
देश के वीरों को देता ये आत्मबल अभिमान है,
बोलो बंदे जोर से बोलो बोलो वंदे मातरम्,
लहराएगा अमर तिरंगा, लहर लहर लहराएगा,
इंकबाल जिंदाबाद, इंकबाल जिंदाबाद,
वीर शिवाजी, राणा प्रताप, लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, मंगल पांडेय, भगत सिंह, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, बाल गंगा धर तिलक, बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, सिधो कान्हू ,खुदी राम बोस, सुभाष चंद्र बोस, बलिदानी पहचान हैं,
बोलो बंदे जोर से बोलो बोलो वंदे मातरम्,
१५ अगस्त `स्वतंत्रता दिवस’ भारत की आन-बान और शान है,
इसे नमन कर जोर से बोलो, बोलो वंदे मातरम्,
गांधी, सुभाष, सावरकर ये आजाद के मतवाले ये,
अंग्रेजों को धूल चटाया, ब्रिटिश शासन को थराNया,
अब तो यारो जोर से बोलो, बोलो वंदे मातरम्,
आजादी के जश्न में डूबा, इंकलाब का नारा गूंजा,
भारत जय जय जय भारतम्,
चप्पा-चप्पा बोल रहा अब, बोलो वंदे मातरम्,
लहराएगा अमर तिरंगा, बोलो भारत भारतम्,
भारत माता की जय बोलो, बोलो वंदे मातरम् ,
सत्य, अहिंसा ने मिलकर भारत को आजाद किया,
जय चंदी सांप छछुंदर ने ही भारत को तबाह किया,
अंग्रेजी दुश्मन क्या करते, जब अपनों ने बर्बाद किया,
बोलो यारो जोर से बोलो, बोलो वंदे मातरम्,
देश के सैनिक मचल रहे अब, युवा शक्ति ने ली तरुणाई,
भारत जन ने ली अंगड़ाई, जय भारत जय भारतम्,
लाल किला से घोषित कर दो
`भारत हिंदू राष्ट्रम्’ भारत हिंदू राष्ट्रम्,
जय भारत, जय भारतम्, जय भारत जय भारतम्
आजादी की खुशी मनाओ, भाव स्वदेशी देशी लाओ,
बोलो बंदे जोर से बोलो, जय भारत जय भारतम्,
शंखनाद कर जोर से बोलो, बोलो वंदे मातरम्,
लहराएगा अमर तिरंगा, अमर तिरंगा, इंकलाब जिंदाबाद, इंकलाब जिंदाबाद
जिंदाबाद-जिंदाबाद!!
संजय सिंह `चंदन’, मुंबई

`सवा सवा लाख पर एक-एक को लड़ाऊंगा’
कहां से शुरू हों मेरे ये छंद,
मेरे ही शब्दों में निकलेंगे द्वंद्व
जज्बा था जिनका फौलादी बुलंद,
जो बोले सो निहाल-सत श्री अकाल,
भारत मां ने देखे थे जिनके कमाल,
नहीं था वो दानव, नहीं मुंड माल,
महामानव सा मानव, नहीं कोई जाल,
थे शत्रु के शत्रु वे भारत के भाल,
भुजाओं की ताकत से काटे भुजाल,
जन्म पटना साहेब ले किए निहाल,
इनके तलवार की मार से होते दुश्मन बेहाल,
नोच फेंकते नकाबों-नवाबों के ढाल,
अजब उनमें ताकत थी शक्ति विशाल,
बने थे वो भारत के ध्वज के मिसाल,
मर्दों में थे शेर वो, मर्दानों के सिंह गर्जना,
तलवारों के मार से मांगे दुश्मन क्षमा अर्चना,
नारों में उनके दम था, उद्घोष में रहती घोषणा,
खालसा पंथ की नींव से सिखों की हुई संरचना,
सवा-सवा लाख पर एक एक को लड़ाऊंगा,
युद्ध वीर ऐसा इस देश में बनाऊंगा,
रोटी, दाल, बाजरा ही सबको खिलाऊंगा,
स्वाभिमान और शौर्य का परचम लहराऊंगा,
तभी नाम गुरु गोविंद सिंह कहलाऊंगा,
गंभीरता, वीरता और धीरता सिखाऊंगा,
मर्दानगी और साहस की गर्जना सुनाऊंगा,
स्वर्ण मंदिर मे पूज्य पवित्र `गुरु ग्रंथ साहिब’ की महिमा बताऊंगा,
हिंदुस्थान में भारत की गूंज नया बनाऊंगा,
मुगलों की ताकत को जूती में लाऊंगा,
वाहे गुरु, वाहे गुरु जग में कहलाएगा,
सवा-सवा लाख पर एक एक लडाऊंगा!!
-संजय सिंह `चंदन’, मुंबई

परख
व्यक्ति पहचानने में जो भूल हो जाए,
भव्यता से खड़ी इमारत भी धूल हो जाए
उपलब्धियों के भी परखच्चे उड़ जाए,
नष्ट सारा समूल हो जाए,
व्यक्ति पहचानने में जो भूल हो जाए
वास्तव में अस्तित्व नहीं है,
जो कुछ भी दिखाई देता है
भावनाओं की ओट को ओढ़े,
वो घाघ भेड़िया होता है,
अवसर पाकर कोमल पुष्प भी
न जाने कब शूल हो जाए,
व्यक्ति पहचानने में जो भूल हो जाए
इस दुनिया की जांच परख में गलती कभी न करना
गलत साथ के गलत चाल को
समय के रहते पढ़ना
समय बीत जाने पर छोटा घाव भी नासूर हो जाए,
व्यक्ति पहचानने में जो भूल हो जाए
-हर्षित पांडेय, पडरौना, (उ.प्र.)

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