मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनापाठकों की रचनाएं : जगह-जगह टकराना होगा, सारा प्रश्न उठाना होगा

पाठकों की रचनाएं : जगह-जगह टकराना होगा, सारा प्रश्न उठाना होगा

जगह-जगह टकराना होगा।
सारा प्रश्न उठाना होगा।।

कंपनियों ने सबकुछ लूटा।
उसको तो समझाना होगा।।

नेता जी कर रहे गुलामी।
यह सबको बतलाना होगा।।

अपनी मेहनत चली जा रही।
उसको हमें बचाना होगा।।

दफन हो रही सच्चाई को।
जीवन-दान दिलाना होगा।।

पूंजीपति विध्वंश ला रहे।
लड़कर उन्हें हटाना होगा।।

पूरी दुनिया की जनता को।
आपस में मिल जाना होगा।।

फूट डालनेवालों को तो।
हरदम आंख दिखाना होगा।।

सारे दूषित गठजोड़ों पर।
हैमर हमें चलाना होगा।

जनता को आजादी देकर।
मंगल-मंगल गाना होगा।।

संघर्षों के साथ चले जो।
उसका साथ निभाना होगा।।

जगह-जगह टकराना होगा।
सारा प्रश्न उठाना होगा।।
-अन्वेषी

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