मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनापाठकों की पाती : सबका साथ, सबका विकास सिर्फ जुमला है 

पाठकों की पाती : सबका साथ, सबका विकास सिर्फ जुमला है 

नरेंद्र मोदी का `सबका साथ, सबका विकास’ नारा एक जुमला बन कर रह गया है। यह बात शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने हिंगोली में संपन्न सभा में कही। `दोपहर का सामना’ के प्रâंट पेज पर प्रकशित इस खबर को पढ़ कर जनता को ऐसा लगा होगा कि उद्धव ठाकरे ने उनके मन की बात की है। उन्होंने कहा कि `केवल चुनाव आने तक इनका ‘सबका साथ, सबका विकास’ रहता है। एक बार चुनकर आए कि ‘सबको लात, अपने दोस्तों का विकास’ ऐसा नया पर्व भाजपा ने शुरू किया है। लेकिन यह मित्रशाही अब नहीं चलेगी।’ हिंगोली की इस सभा को जिस तरह का प्रतिसाद मिला है उसे देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि अब मोदी के किसी भी जुमले का असर लोगों पर नहीं पड़ने वाला है और आगामी २०२४ को जनता इस तानाशाही सरकार को बाहर का रास्ता दिखाने वाली है।
–वीरेंद्र घोष, कुर्ला 

करोड़ों के फंड के लिए  गद्दारी 
हाल ही में कुछ पूर्व नगरसेवक चंद फायदे के लिए पुराने दल को दर-किनार कर शिंदे गुट में शामिल हो गए और कारण बताया विकास का। `दोपहर का सामना’ ने इन सभी की बखिया उधेड़ते हुए लोगों के सामने हकीकत रखी है। इस खबर के अनुसार ये सभी पूर्व नगरसेवक अपनी नाकामियों को छिपाने और करोड़ों रुपए के फंड के लालच में वहां गए हैं। इनमें कुछ कांग्रेस के पूर्व नगरसेवक हैं तो वहीं कुछ शिवसेना के हैं। इनको इनकी पार्टियों ने क्या कुछ नहीं दिया था? पार्टी इन्हें टिकट देकर चुन कर लाई, पार्टी में अच्छी पोस्ट और वैल्यू दी गई थी, इसके बावजूद इनका रंग दिखाना यह जनता को नागवार गुजरा है। यह सभी भविष्य में पछताने वाले हैं।
-समीर शिंदे, वडाला

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