मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनापाठकों की पाती: ऑटोरिक्शा वालों के जज्बे को सलाम 

पाठकों की पाती: ऑटोरिक्शा वालों के जज्बे को सलाम 

चोरी और लूटमारी रोकने के लिए और अपराधियों को जल्द से जल्द दबोचने के लिए ठाणे पुलिस ने एक बहुत अच्छा रास्ता निकाला है। ‘दोपहर का सामना’ में प्रकाशित खबर के अनुसार, अब पुलिस ऑटोरिक्शा चालकों की मदद लेगी। अक्सर चेन स्नेचर जब चैन खींचकर भागते हैं या कोई अपराधी अपराध कर फरार होता है तब नाके पर या रास्ते पर मौजूद ऑटोरिक्शा चालक पुलिस को इसकी तुरंत जानकारी देंगे जिससे अपराधी की शिनाख्त होगी और वह जल्दी सलाखों के पीछे होगा। पुलिस ने ऑटोरिक्शा चालकों के सामने इस तरह से मदद करने का प्रस्ताव रखा था जिसे ऑटोरिक्शा चालकों ने मान लिया। इसलिए उनके इस जज्बे को मेरा सलाम है।

-विनय यादव, ठाणे

डॉक्टर कब होंगे डिजिटल?
`दोपहर का सामना’ में एक खबर पढ़कर मैं थोड़ा सोच में पड़ गई कि क्वालिफाइड डॉक्टर्स अभी तक पूरी तरह से डिजिटल नहीं हुए हैं। ग्लोबल डिजिटल समिट में उठे इस मुद्दे वाली खबर सचमुच गंभीर है। इस समिट में यह मुद्दा उठाया गया कि कई डॉक्टर्स आज भी नई तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, जहां मौजूदा समय में देश डिजिटलीकरण की ओर तेजी से बढ़ रहा है, अधिकांश लोग डिजिटल होते जा रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में डॉक्टर्स पुराने सिस्टम से ही इलाज कर रहे हैं। जबकि उनको सबसे पहले डिजिटल हो जाना चाहिए था। मेरा मानना है कि जब सभी क्षेत्र डिजिटल हो रहे हैं तो ऐसे में ये डॉक्टर्स भला पीछे क्यों हैं, उन्हें भी समय के साथ चलना चाहिए।

-नीलम गुप्ता, अंधेरी

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