मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनापाठकों की पाती : महिला आरक्षण अर्थात बिना तारीख का चेक 

पाठकों की पाती : महिला आरक्षण अर्थात बिना तारीख का चेक 

`दोपहर का सामना’ ने एनसीपी नेता सुप्रिया सुले के उस बयान को प्रकाशित किया है, जिसमें उन्होंने महिला आरक्षण बिल को बिना तारीख वाला चेक बताया है। मैं भी इस बात से सहमत हूं। लोकसभा और देश की सभी विधानसभाओं में महिलाओं को ३३ फीसदी आरक्षण देनेवाला महिला आरक्षण बिल, नारी शक्ति वंदन कानून संसद के दोनों सदनों में पास हो गया है। लेकिन केंद्र सरकार ने इसको लेकर कोई तारीख स्पष्ट नहीं की है कि यह आरक्षण कब लागू किया जाएगा। इससे सुप्रिया सुले की बात सही प्रतीत होती है। वह कहती हैं कि इस बिल को लेकर खुशी है लेकिन अफसोस इस बात का है कि केंद्र सरकार ने हमें आरक्षण देने का फैसला किया है लेकिन उसने ऐसा चेक दिया है, जिस पर कोई तारीख नहीं है यह आरक्षण २०२९ में मिलेगा २०३४ में मिलेगा या कब मिलेगा यह निश्चित नहीं है। -गणेश अवस्थी, बोरिवली
गांधी के नाम स्वच्छता अभियान का सच 
गांधी जयंती के मौके पर मोदी सरकार स्वच्छता अभियान की सफलता का जो दावा करती है उस दावे की पोल खोलती खबर `दोपहर का सामना’ ने प्रकाशित की है। इसमें बताया गया है कि सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ५० फीसदी अधिक शौचालय का निर्माण हो जाने का दावा किया गया है लेकिन इनमें से १२ लाख से अधिक शौचालय अस्तित्व में ही नहीं हैं। कई झूठे दस्तावेज प्रस्तुत कर शौचालय के आंकड़े बढ़ाए गए हैं जबकि वास्तव में स्थित कुछ और है। इस योजना में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। इसी तरह स्वच्छ भारत अभियान के तहत वित्तीय समस्या का समाधान करने की बजाय केवल सतही स्वच्छता पर ध्यान केंद्रित किया गया है। सरकार ने स्वच्छता को लेकर भारी आंकड़े जारी किए हैं, लेकिन उनमें गड़बड़ियां होने के आरोप लगातार लगते रहे हैं।
-गुड्डू खान, कुर्ला

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