मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनापाठकों की पाती : ‘मेक इन इंडिया’ हुआ टांय-टांय फिस्स!

पाठकों की पाती : ‘मेक इन इंडिया’ हुआ टांय-टांय फिस्स!

‘दोपहर का सामना’ हमेशा सरकार को वादे की याद दिलाता है। इस अखबार ने पृथम पृष्ठ पर ‘मेक इन इंडिया’ की खबर के माध्यम से सरकार से सवाल पूछा है कि दस साल बीत गए, लेकिन ‘मेक इन इंडिया’ का क्या हुआ? २५ सितंबर, २०१४ को विज्ञान भवन के हॉल से ‘मेक इन इंडिया’ की धूमधाम से लॉन्चिंग की गई थी। इसके माध्यम से चीन को व्यापारिक चुनौती देने की कोशिश की गई थी लेकनि सब कुछ टांय-टांय फिस्स होता नजर आ रहा है। ‘१५ लाख खाते में आएंगे’ की तरह ही यह भी जुमला ही साबित होता दिखाई दे रहा है।
– रमेश चौधरी, चेंबूर

युवा उम्र में बढ़ती दिल की बीमारी
‘दोपहर का सामना’ में एक चौंका देनेवाली खबर पढ़ी। खबर थी दिल की बीमारी को लेकर। इसमें बताया गया है कि ३० से ४० वर्ष की उम्र के युवाओं में कार्डियक अरेस्ट की घटनाएं बढ़ रही हैं। यह चिंता करनेवाली बात है। दिल का दौरा आमतौर पर पचास से अधिक उम्र के लोगों में देखा जाता है। लेकिन अब तीस की उम्र में भी दिल के दौरे की टीस लोगों को सताने लगी है। ‘दोपहर का सामना’ की इस खबर के अनुसार ३० से ४० वर्ष की उम्र के युवा वयस्कों में अचानक हृदयाघात से मृत्यु की दर में १३ प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बदलती जीवनशैली, अनियमित भोजन, अपर्याप्त नींद और व्यायाम की कमी इसके मुख्य कारण हैं।
– रजनी काले, सांताक्रुज

अन्य समाचार