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पाठकों की रचनाएं : आनंद और सुख

दोनों में बहुत अंतर है,
जबकि सामान्य तौर पर एक ही समझ लिया जाता है।
सुख सीमित है, आनंद असीमित।
सुख अस्थाई है, आनंद स्थाई।
आंनद आत्मानुभूति का विषय है। सुख भौतिक पदार्थों से मिलता है।
आत्मा के चैतन्य स्वरूप में रहने से आनंद मिलता है।
सुख मन और सांसारिक विषयों की कड़ी है।
ईश्वर की समीपता से आनंद का आभास होता है।
सुख भौतिक पदार्थों का भोग है।
आनंद शाश्वत है, जिसे अपने ही भीतर खोजना है।
सुख संसार की मृग मरीचिका है।
आनंद आलौकिक होता है।
सुख भौतिक और नश्वर है।
-आर. डी.अग्रवाल `प्रेमी’, मुंबई

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